90 के दशक के गानों (90s Bollywood Songs) का क्रेज कभी खत्म नहीं हो सकता और हो भी क्यों ? ये गाने हैं ही इतने खूबसूरत और रूहानी. चाहे वह मिलेनियल्स हों या आज की जेन-जी पीढ़ी, उस दौर की धुनों के जादू से कोई खुद को दूर नहीं रख सकता. आज के रीमिक्स और लाउड म्यूजिक के दौर में भी लोग सुकून के लिए उन गानों को बार बार सुनते हैं. यही वजह है कि इन गानों पर यूट्यूब पर करोड़ों में व्यूज हैं. आज हम एक ऐसे गाने के बारे में बताने जा रहे हैं, जो 90 में खूब सुना जाता था. इस पर शादी ब्याह, पार्टिज में खूब डांस किया जाता था. यह गाना है 1998 में आई फिल्म 'सत्या' का 'सपने में मिलती है'. यह एक बेहद लोकप्रिय और सदाबहार गाना है. यह गाना अपनी अनूठी शैली, मजेदार बोल और लोक संगीत के धुन के लिए मशहूर है.
फिल्म 'सत्या' और गाने के बारे में
आशा भोंसले और सुरेश वाडेकर द्वारा गाया गया गाना "सपने में मिलती है," फिल्म 'सत्या' के सबसे यादगार गानों में से एक है. यह गाना शेफाली शाह और मनोज बाजपेयी पर फिल्माया गया था. इस गाने को मशहूर संगीतकार और फिल्ममेकर विशाल भारद्वाज ने कंपोज किया था. यह देसी लोक संगीत (Folk) से प्रेरित धुन थी. गाने के बोल दिग्गज लेखक गुलजार ने लिखे थे. गाने में "सारा दिन घूंघटे में बंद पुड़िया सी" और "सड़क पे खाली रिक्शे सा" जैसे उपमाओं का इस्तेमाल फैंस को खूब पसंद आया. राम गोपाल वर्मा की 'सत्या' 1998 में रिलीज हुई थी और इसमें जेडी चक्रवर्ती और उर्मिला मातोंडकर ने लीड रोल में थे. मुंबई के अंडरवर्ल्ड में एक बाहरी व्यक्ति के आगे बढ़ने की कहानी पर आधारित यह फिल्म अपनी जबरदस्त कहानी और दमदार अभिनय के कारण भारतीय सिनेमा में एक मील का पत्थर साबित हुई.
पंजाबी लोक संगीत से प्रेरित
फिल्म 'सत्या' (1998) का मशहूर गाना "सपने में मिलती है" मुख्य रूप से पंजाबी लोक संगीत (Punjabi Folk Music) से प्रेरित है. इस गाने को लोकगीत की तर्ज पर ढालने में पारंपरिक पंजाबी भांगड़ा, गिद्धा की लय की योगदान है. विशाल भारद्वाज ने इसमें पारंपरिक ढोलक, वाद्य यंत्रों और ताली की थाप का इस्तेमाल किया है, जो उत्तर भारत के शादियों या त्योहारों में गाए जाने वाले लोकगीतों (Folk songs) में सुनाई देती है. वहीं गीतकार गुलजार ने इसमें 'कुड़ी', 'मुंडा', 'पाजी' जैसे ठेठ पंजाबी शब्दों के साथ-साथ बेहद अनूठी उपमाओं का प्रयोग किया है.