ऑस्कर विजेता और विश्वप्रसिद्ध संगीतकार ए.आर. रहमान हाल ही में उस वक्त सुर्ख़ियों में आ गए थे, जब उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि सांप्रदायिक कारणों की वजह से उन्हें काम मिलना कम हो गया था. इस बयान के बाद फ़िल्म और संगीत जगत से जुड़े कई लोगों ने खुलकर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दीं और मामला एक विवाद का रूप ले बैठा. इस पूरे विवाद के बाद मुंबई में ए.आर. रहमान पहली बार नज़र आए फिल्म ‘गांधी टॉक्स' के एक विशेष इवेंट में. इस कार्यक्रम में रहमान ने अपनी आने वाली फिल्म के लिए ऑर्केस्ट्रा के साथ लाइव परफॉर्मेंस दी. माना जा रहा था कि इस मंच से रहमान अपने बयान पर कुछ कहेंगे, लेकिन उन्होंने शब्दों की जगह संगीत को चुना.
26 जनवरी के दिन इस कार्यक्रम की शुरुआत रहमान ने ‘रघुपति राघव राजा राम' के इंस्ट्रूमेंटल वर्ज़न से की. बिना कुछ बोले, बेहद सधे हुए अंदाज़ में, रहमान ने अपने संगीत के ज़रिए मानो अपने आलोचकों को जवाब दे दिया. इस इवेंट में ए.आर. रहमान ने फिल्म ‘गांधी टॉक्स' के दृश्यों के साथ लाइव म्यूजिक परफॉर्म किया, जिसने दर्शकों को एक अलग और अनोखा सिनेमाई अनुभव दिया. यह फ़िल्म एक मूक (साइलेंट) फ़िल्म है, जिसमें संवाद या आवाज़ें नहीं हैं. पूरी कहानी और भावनाएँ रहमान के संगीत के ज़रिए सामने आती हैं.
फ़िल्म ‘गांधी टॉक्स' में अरविंद स्वामी और विजय सेतुपति अहम भूमिकाओं में नज़र आएंगे, जबकि मराठी सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता सिद्धार्थ जाधव भी इस फ़िल्म का हिस्सा हैं. इस फ़िल्म का निर्देशन किशोर पांडुरंग बेलेकर ने किया है और यह फ़िल्म 30 जनवरी को रिलीज़ होने जा रही है.
फ़िल्म के निर्देशक किशोर पांडुरंग बेलेकर के मुताबिक, विजय सेतुपति ने सिर्फ़ इसकी कहानी सुनकर ही फ़िल्म के लिए हाँ कर दी थी. वहीं ए.आर. रहमान को लेकर एक दिलचस्प क़िस्सा भी सामने आया है. किशोर ने बताया कि जब उन्होंने रहमान से कहा कि उनके पास इस फ़िल्म के लिए पर्याप्त बजट नहीं है और वह निर्माता की तलाश करेंगे, तो रहमान ने उन्हें अनुमति दे दी कि वे उनका नाम इस्तेमाल कर सकते हैं और यह कह सकते हैं कि रहमान इस फ़िल्म से जुड़े हुए हैं.
किशोर पांडुरंग के अनुसार, ‘गांधी टॉक्स' को पर्दे तक लाने में क़रीब 15 साल का समय लगा है. यह फ़िल्म उनके लिए सिर्फ़ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक लंबा और धैर्य भरा सफ़र रही है. भारतीय सिनेमा में आवाज़ आने के बाद मूक फ़िल्मों का प्रयोग बेहद सीमित रहा है. ‘पुष्पक' जैसी कुछ गिनी-चुनी फ़िल्मों को छोड़ दें, तो ऐसे प्रयोग कम ही देखने को मिले हैं. आज के पैन-इंडिया दौर में ‘गांधी टॉक्स' एक साहसिक प्रयोग है, जहां भाषा दीवार नहीं बनती और संगीत ही संवाद करता है. इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे, जिन्होंने रहमान के संगीत का भरपूर आनंद लिया. बिना किसी बयान के, रहमान ने अपनी ख़ामोशी और संगीत के ज़रिए यह जता दिया कि कभी-कभी चुप रहकर भी बहुत कुछ कहा जा सकता है.