हिंदी सिनेमा में कई ऐसे गीत हैं जो दशकों बाद भी उतने ही लोकप्रिय हैं, जितने अपनी रिलीज़ के समय थे. इन्हीं में शामिल हैं ‘तेरी रब ने बना दी जोड़ी' और ‘ऐ यार सुन यारी तेरी', जो वर्ष 1979 में रिलीज़ हुई सुपरहिट फ़िल्म ‘सुहाग' के गीत हैं. फिल्म में अमिताभ बच्चन, शशि कपूर, परवीन बॉबी और रेखा मुख्य भूमिकाओं में नज़र आए थे, जबकि इसके निर्देशक थे हिंदी सिनेमा के मनोरंजन के बादशाह कहे जाने वाले मनमोहन देसाई.
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भारत नहीं आ पा रहे थे शशि कपूर
फ़िल्म की लगभग पूरी शूटिंग पूरी हो चुकी थी, लेकिन दो गीतों की शूटिंग बाकी थी. पहला था ‘तेरी रब ने बना दी जोड़ी', जिसमें चारों प्रमुख कलाकारों की मौजूदगी जरूरी थी. दूसरा गीत था ‘ऐ यार सुन यारी तेरी', जिसे अमिताभ बच्चन और शशि कपूर पर फिल्माया जाना था. परेशानी यह थी कि शशि कपूर के पास भारत आने की तारीखें नहीं थीं. उस समय वह लंदन में एक दूसरी फिल्म की शूटिंग में व्यस्त थे.
जब मनमोहन देसाई ने शशि कपूर से तारीखों को लेकर बात की तो शशि कपूर ने उन्हें एक अनोखा सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि उनकी फिल्म की शूटिंग रात में होती है और दिन का समय खाली रहता है. ऐसे में अगर पूरी यूनिट लंदन आ जाए तो दिन के समय इन गीतों की शूटिंग आराम से की जा सकती है. इसके बाद मनमोहन देसाई ने बिना समय गंवाए अमिताभ बच्चन, परवीन बॉबी, रेखा और अपनी टीम के कुछ सदस्यों के साथ लंदन का रुख किया.
पूरी यूनिट लंदन गई
‘तेरी रब ने बना दी जोड़ी' गीत की शूटिंग लंदन के रिचमंड पार्क में की गई. इस गीत में साउथॉल के पंजाबी डांसरों को भी शामिल किया गया, जिसने गीत की भव्यता और ऊर्जा को और बढ़ा दिया. लेकिन इससे भी दिलचस्प कहानी ‘ऐ यार सुन यारी तेरी' की है. इस गीत का एक हिस्सा पहले ही भारत में फिल्माया जा चुका था, जबकि बाकी हिस्सा शूट होना बाकी था. मनमोहन देसाई ने तय किया कि जब पूरी यूनिट लंदन में ही मौजूद है, तो गीत का बचा हुआ हिस्सा भी वहीं पूरा कर लिया जाए.
फर्क कर पाना मुश्किल
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि आज भी जब यह गीत देखा जाता है तो यह पहचान पाना बेहद मुश्किल है कि इसके कौन-से दृश्य भारत में फिल्माए गए हैं और कौन-से लंदन में. आमतौर पर अलग-अलग देशों का मौसम, प्राकृतिक रोशनी और वातावरण फिल्म के रंगों और दृश्य गुणवत्ता पर साफ असर डालते हैं. यही वजह है कि एक ही गीत को दो अलग-अलग देशों में फिल्माया जाए तो उसका अंतर आसानी से नजर आ जाता है. लेकिन ‘ऐ यार सुन यारी तेरी' में यह फर्क लगभग नामुमकिन है.
यही वह बारीकी, तकनीकी समझ और निर्देशन का कमाल था, जिसने मनमोहन देसाई को हिंदी सिनेमा का ‘एंटरटेनमेंट किंग' बनाया. सीमित संसाधनों में भी दर्शकों को भव्य मनोरंजन देना उनकी सबसे बड़ी खूबी थी और ‘सुहाग' के ये दोनों गीत आज भी उस हुनर की शानदार मिसाल माने जाते हैं.