फिल्म मेकर रोहित शेट्टी के घर पर हुई फायरिंग ने एक बार फिर बॉलीवुड और अंडरवर्ल्ड को एक साथ हेडलाइन में ला दिया है. इस बार मामला हमले का है लेकिन बीते कुछ दशकों में दोनों के बीच रिश्ता कुछ ऐसा रहा है-शिकारी-शिकार, एक्टर-प्रोटेक्शन, काराबारी स्टेक से लेकर रोमांटिक रिश्तों तक. कभी ये रिश्ता किसी के लिए तकलीफ दे रहा तो कभी फायदेमंद. पिछले कुछ सालों में कई कलाकार अंडरवर्ल्ड का शिकार हो चुके हैं. इस लिस्ट में सलमान से लेकर रोहित शेट्टी तक का नाम शामिल है.
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शिकारी-शिकार का रिश्ता
लॉरेंस बिश्नोई गिरोह ने पिछले रविवार सुबह रोहित शेट्टी के घर हुई फायरिंग की जिम्मेदारी ली है. घटना के पीछे का मकसद अभी साफ नहीं है. यही गिरोह पहले बांद्रा में अभिनेता सलमान खान के घर पर भी फायरिंग कर चुका है. 1998 में काले हिरण के शिकार के मामले में आरोपी होने के कारण सलमान बिश्नोई के निशाने पर बताए जाते हैं. बिश्नोई समुदाय काले हिरण को पवित्र मानता है. कुछ महीने पहले जेल से दिए एक इंटरव्यू में बिश्नोई ने सलमान से माफी मांगने या जान गंवाने की धमकी दी थी.
हालांकि वह धर्म का हवाला देता है, लेकिन अंडरवर्ल्ड के जानकार मानते हैं कि असली मकसद किसी बड़े सेलिब्रिटी को निशाना बनाकर अपने गिरोह का खौफ पैदा करना है. चार साल पहले पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद उसका गिरोह कुख्यात हुआ ठीक वही तरीका जो 1980-90 के दशक में मुंबई के अंडरवर्ल्ड गिरोह अपनाते थे.
90 के दशक में दाऊद इब्राहिम, छोटा राजन, अबू सलेम और अरुण गवली जैसे माफिया सरगनाओं के गिरोहों ने फिल्म हस्तियों पर कई हमले किए. विदेशों में बैठे ये गैंगस्टर धमकी भरे फोन कर भारी वसूली करते थे. जो नहीं मानते, उन्हें गोली मार दी जाती थी. अगस्त 1997 में कैसेट किंग गुलशन कुमार की हत्या, जून 1997 में निर्माता मुकेश दुग्गल की हत्या, 2000 में निर्देशक राकेश रोशन पर फायरिंग, 2001 में अभिनेत्री मनीषा कोइराला के सेक्रेटरी अजीत दीवानी की हत्या और 2002 में डायरेक्टर लॉरेंस डी'सूजा पर फायरिंग इसके उदाहरण हैं.
इनका तरीका था एक को मारो, सबको डराओ. किसी बड़े फिल्मी नाम पर हमला होता तो बाकी लोग डर के मारे पैसा पहुंचा देते. अगर किसी एक गिरोह को भुगतान की खबर दूसरे गिरोहों तक पहुंच जाती, तो वे भी वसूली के लिए फोन करने लगते. उन दिनों मुंबई पुलिस की एंटी-एक्सटॉर्शन सेल पर भारी दबाव रहता था.
बॉलीवुड अंडरवर्ल्ड नेक्सस
बॉलीवुड और अंडरवर्ल्ड के बीच साझेदारी का रिश्ता भी रहा है. आज जहां बड़े घरेलू-विदेशी कॉरपोरेट्स फिल्म उद्योग में निवेश करते हैं, वहीं कुछ दशक पहले साफ-सुथरे निवेशकों की कमी थी. इस मजबूरी का फायदा अंडरवर्ल्ड ने उठाया और फिल्मों को काले धन को सफेद करने का जरिया बनाया. अवैध धंधों से कमाए पैसे फिल्मों में लगाए जाते, बदले में फिल्म की कमाई में हिस्सा और अंतरराष्ट्रीय अधिकार लिए जाते. 2001 में फिल्म चोरी-चोरी चुपके-चुपके से जुड़ा आपराधिक मामला ऐसे ही रिश्ते का उदाहरण है. उस दौर में गैंग्स का दखल इतना था कि वे स्टार कास्ट और सीन तक तय करते थे. 2002 में लीक हुई छोटा शकील और संजय दत्त की टेप बातचीत से भी पता चलता है कि शकील को फिल्म-मेकिंग की गहरी समझ थी और उसने उद्योग में भारी निवेश किया था.
गैंगस्टरों का स्टार आकर्षण
एक संबंध था स्टार और उनके गैंगस्टर फैन का. 90 के दशक में अंडरवर्ल्ड गिरोह बॉलीवुड सितारों के लाइव शो आयोजित करते थे, जिनमें कलाकारों को मोटी रकम दी जाती थी. दाऊद इब्राहिम के दुबई और शारजाह में आयोजित कार्यक्रमों में सितारों के नाचने-गाने की तस्वीरें-वीडियो बाद में सामने आए. डी-कंपनी पारिवारिक आयोजनों में भी फिल्मी हस्तियों को बुलाती थी और उन्हें भरपूर भुगतान करती थी. कुछ सितारे नजदीकी बढ़ाने के लिए स्वेच्छा से जाते थे, जबकि कुछ दुश्मनी से बचने के लिए.
अंडरवर्ल्ड का बॉयफ्रेंड, बॉलीवुड की गर्लफ्रेंड
मुंबई पुलिस में काम कर चुके अफसरों के अनुसार, बॉलीवुड सितारों और गैंगस्टरों के बीच रोमांटिक रिश्ते भी रहे. दाऊद इब्राहिम-मंदाकिनी, अबू सलेम-मोनिका बेदी, अनीस इब्राहिम-अनीता अय्यूब जैसे रिश्ते चर्चित रहे. आमतौर पर ये रिश्ते सहमति से होते थे, लेकिन अगर कोई अभिनेत्री मना करती, तो गैंगस्टर उसकी हत्या तक का आदेश दे देता. अनीस इब्राहिम चाहता था कि माधुरी दीक्षित दुबई आए. वो नहीं गईं तो जान से मारने की धमकी दी थी. समय पर मिली खुफिया सूचना से मुंबई पुलिस ने उन्हें बचाया. जान के खतरे के बाद माधुरी कुछ वर्षों के लिए विदेश चली गईं. 90 के दशक का मुंबई अंडरवर्ल्ड अब खत्म हो चुका है. दाऊद का गिरोह सक्रिय नहीं है. छोटा राजन, अबू सलेम और अरुण गवली जेल में हैं. आज बॉलीवुड अंडरवर्ल्ड के डर से मुक्त है, लेकिन रोहित शेट्टी और सलमान खान को जिस तरह निशाना बनाया गया है, उससे यह चिंता जरूर है कि कहीं पुराना दौर वापस न लौट आए.