आजकल हर तरफ ‘धुरंधर 2' के एक्शन के चर्चे हैं. फिल्म में जिस तरह के स्टंट्स और फाइट सीक्वेंस दिखाए गए हैं, उन्होंने दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए हैं. लेकिन पर्दे पर दिखने वाला यह रोमांच असल में कितनी मेहनत से तैयार हुआ है, इसका खुलासा खुद फिल्म के एक्शन डायरेक्टर एजाज गुलाब ने किया है. उन्होंने बताया कि फिल्म के क्लाइमेक्स को शूट करना कोई आसान काम नहीं था और इसके पीछे पूरी टीम की दिन-रात की मेहनत छिपी है.
15 दिनों तक चला नॉन-स्टॉप एक्शन
आमतौर पर फिल्मों के एक्शन सीन कुछ ही दिनों में निपटा लिए जाते हैं, लेकिन धुरंधर 2 का मामला एकदम अलग था. एक्शन डायरेक्टर की मानें तो फिल्म के दूसरे हिस्से (Part 2) का जो क्लाइमेक्स है, वह फिल्म का सबसे लंबा और थका देने वाला हिस्सा था. उन्होंने बताया, “वो जो क्लाइमेक्स है, सेकंड पार्ट का जो क्लाइमेक्स है, वो बहुत लंबा चला. मेरे ख्याल से वो 14-15 दिन शूट हुआ.” लगातार 15 दिनों तक एक ही सीक्वेंस पर काम करना टीम के जुनून को दर्शाता है. इसमें न केवल एक्टर्स बल्कि सैकड़ों क्रू मेंबर्स की सुरक्षा और टाइमिंग का भी पूरा ख्याल रखना था.
कभी सेट, तो कभी रेलवे ट्रैक: लोकेशन्स की चुनौती
इस एक्शन सीन की एक खास बात यह थी कि यह किसी एक जगह पर फिक्स नहीं था. कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, एक्शन का बैकग्राउंड भी बदलता रहता है. शूटिंग की शुरुआत एक शानदार महल के सेट से हुई थी, लेकिन देखते ही देखते यह सड़कों और रेलवे ट्रैक तक जा पहुंची. एक्शन डायरेक्टर ने उन दिनों को याद करते हुए कहा, “इसमें अलग-अलग लोकेशन्स भी थे… महल का सेट था, सेट के बाहर का हिस्सा था… फिर जब वो लोग वहां से निकलते हैं, तो गांवों की गलियों के अंदर था, फिर वो खेतों की तरफ थ्रू (through) जाते हैं.” गांव की तंग गलियों और खेतों के बीच भारी कैमरा सेटअप के साथ भाग-दौड़ करना पूरी टीम के लिए एक बड़ा टास्क था.
कंटेनर यार्ड और असली धमाके
क्लाइमेक्स का रोमांच तब और बढ़ जाता है जब सीन रेलवे ट्रैक और कंटेनर यार्ड में शिफ्ट होता है. यहां दिखाए गए ब्लास्ट और स्टंट्स को बहुत ही सावधानी से अंजाम दिया गया था. डायरेक्टर ने आगे बताया, “फिर जब वो रेलवे ट्रैक पर आते हैं, कंटेनर यार्ड में आता है, फिर वो रेलवे ट्रैक पर ब्लास्ट है… तो वो बहुत ही लंबा चला वो सीक्वेंस. शूटिंग वाइज ऑलमोस्ट 15-16 दिन का सीक्वेंस हो गया.” दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान एक ‘राइस गोडाउन' (चावल के गोदाम) में भी काफी शूटिंग हुई थी, जिसे शायद बाद में फिल्म की एडिटिंग के दौरान हटा दिया गया. धुरंधर 2 का यह क्लाइमेक्स इस बात का सबूत है कि जब मेहनत और सही विजन मिलता है, तो पर्दे पर जादू जैसा एक्शन देखने को मिलता है. 15-16 दिनों की यह मेहनत आज रंग ला रही है और यही वजह है कि लोग इस फिल्म के एक्शन के दीवाने हो गए हैं.