आमिर खान का 38 साल पुराना वीडियो वायरल, खुद ऑटो-रिक्शा पर चिपका रहे थे अपनी फिल्म के पोस्टर, लोग पूछ रहे थे- हीरो कौन है?

आज जिन आमिर खान के नाम से फिल्में बिकती हैं, कभी वही अपनी पहली फिल्म के पोस्टर लेकर सड़कों पर घूमते थे और लोगों को खुद बताते थे- मैं ही आमिर खान हूं. इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

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आमिर खान का पुराना वीडियो हुआ वायरल

जरा इमेजिन कीजिए. मुंबई की सड़क पर एक ऑटो-रिक्शा रुकता है. एक नौजवान उसके पास जाता है और बड़ी उम्मीद के साथ कहता है, "भैया, क्या आपकी गाड़ी के पीछे मेरी फिल्म का पोस्टर लगा सकते हैं?" रिक्शा वाला पोस्टर हाथ में लेकर देखता है और पूछता है, "कौन सी फिल्म है?" लड़का जवाब देता है, "कयामत से कयामत तक." अगला सवाल आता है, "हीरो कौन है?" लड़का कहता है, "आमिर खान." रिक्शा वाला फिर पूछता है, "ये आमिर खान कौन है?" इस बार लड़का मुस्कुरा देता है और कहता है, "मैं ही हूं."

आज के दौर में यह बात नामुमकिन सी लगती है कि मिस्टर परफेक्शनिस्ट अपनी फिल्म के पोस्टर तक खुद ही चिपका रहे हैं. लेकिन 'कयामत से कयामत तक' से पहले हकीकत यही थी. और इस पूरे किस्से का बाकायदा पूरा वीडियो मौजूद है, जो इन दिनों इंटरनेट पर खूब वायरल हो रहा है. वीडियों में आमिर अपनी पहली बड़ी फिल्म का प्रचार करने के लिए खुद पोस्टर लेकर सड़कों पर घूम रहे हैं और लोगों को अपना नाम बता रहे हैं. फिर फिल्म रिलीज हुई और सब कुछ बदल गया. 'कयामत से कयामत तक' ने ऐसी सफलता हासिल की कि वही आमिर खान कुछ ही समय में देशभर के युवाओं की धड़कन बन गए.

पोस्टर का बैग, गोंद की बोतल और सपनों से भरा एक लड़का

साल 1988 में 'कयामत से कयामत तक' रिलीज होने वाली थी. फिल्म में आमिर खान और जूही चावला नई जोड़ी के तौर पर नजर आने वाले थे. उस समय आमिर कोई बड़ा नाम नहीं थे. फिल्म को लेकर उत्साह तो था, लेकिन पहचान लगभग नहीं के बराबर थी. आमिर खान अपने दोस्त और अभिनेता राज जुत्शी के साथ मुंबई की सड़कों पर निकल पड़ते थे. कभी कभी उनके कजिन और फिल्म के डायरेक्टर मंसूर खान भी उनके साथ होते थे. कई बार तो पूरा दिन पोस्टर लगाने में और लोगों से फिल्म देखने की गुजारिश करने में ही निकल जाता था.

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जब ड्राइवर ने पूछा, "आमिर खान कौन है?"

इस पूरे किस्से का सबसे मजेदार और यादगार हिस्सा यहीं से शुरू होता है. जब कुछ ड्राइवर पोस्टर देखते और उस पर लिखे नाम पर नजर डालते, तो पूछ बैठते, "ये आमिर खान कौन है?" सोचिए, सामने खड़ा लड़का अपनी फिल्म का पोस्टर लगवा रहा है और लोग उसी से पूछ रहे हैं कि पोस्टर में दिख रहा हीरो आखिर है कौन. ऐसे मौकों पर आमिर मुस्कुराकर जवाब देते थे, "मैं ही हूं." आज के दौर में इस तरह की बात पर भरोसा करना भी मुश्किल लगता है. लेकिन ये उस दौर की सरलता और सच्चाई है.

फिर आई वो फिल्म जिसने सब बदल दिया

जब 'कयामत से कयामत तक' रिलीज हुई तो फिल्म ने सबको चौंका दिया. फिल्म जबरदस्त हिट साबित हुई. इसके गाने, रोमांस और आमिर-जूही की जोड़ी ने दर्शकों का दिल जीत लिया. देखते ही देखते वही चेहरा, जिसे लोग पहचानते नहीं थे, पूरे देश में मशहूर हो गया. कुछ ही महीनों पहले जिस चेहरे को लोग पहचान नहीं पा रहे थे, वही चेहरा अब देशभर के युवाओं के कमरे, मैगजीन के कवर और लोगों के दिलों पर छा चुका था.

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आज फिल्मों के प्रमोशन पर ही करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, ऐसे दौर में ये किस्सा नई पीढ़ी के लिए काफी हैरान कर देने वाला जान पड़ता है. लेकिन इस वाकये में एक सबक भी छिपा है कि हर चमकते सितारे के पीछे एक ऐसा दौर होता है जब उसे खुद अपने लिए रास्ता बनाना पड़ता है. शायद इसी वजह से मुंबई की उन सड़कों पर पोस्टर चिपकाने वाला लड़का आगे चलकर बॉलीवुड का 'मिस्टर परफेक्शनिस्ट' बन गया.\

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