8 एपिसोड की सीरीज में दिखे दिल्ली के दो कत्ल और फांसी की सजा, 48 साल बाद परदे पर आई कहानी बनी नंबर 1

प्राइम वीडियो पर 12 जून 2026 को एक क्राइम थ्रिलर वेब सीरीज रिलीज हुई. ये दिल्ली की 48 साल पुरानी घटना पर बनी है. सीरीज रिलीज होते ही नंबर वन पर पहुंच गई है.

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प्राइम वीडियो पर इस राख का गदर, दिल्ली के 48 साल पुराने केस पर है आधारित
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नई दिल्ली:

ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेजन प्राइम वीडियो पर 12 जून 2026 को रिलीज हुई वेब सीरीज राख ने दर्शकों के दिलों में जगह बना ली है. रिलीज के तीन दिन बाद ही यह ओटीटी प्लेटफॉर्म पर ट्रेंडिंग में नंबर वन पर पहुंच गई थी और अब पांच दिन बाद भी इसका वर्चस्व कायम है. 1970 के दशक की दिल्ली में सेट यह 8 एपिसोड वाली सीरीज दर्शकों को सस्पेंस, इमोशन और डार्क रियलिटी के सफर पर ले जाती है. राख का निर्देशन पाताल लोक सीजन 1 का निर्देशन करने वाले प्रोसित रॉय ने किया है.  लेकिन इस सीरीज की कहानी ने दर्शकों को झकझोर कर रख दिया है और इसी वजह से इसे खूब देखा जा रहा है.

राख की कहानी

सीरीज की कहानी 1978 की सच्ची घटना (रंगा-बिल्ला केस) से प्रेरित है. दिल्ली कैंटोनमेंट में रहने वाले आर्मी अधिकारी अशोक अरोड़ा (आमिर बशीर) और उनकी पत्नी मोना (सोनाली बेंद्रे) की 16 वर्षीय बेटी सुमन और 14 वर्षीय बेटे साहिल अचानक गायब हो जाते हैं. एक रेडियो परफॉर्मेंस के लिए जाते हुए दोनों बच्चे दो अजनबियों की कार में सवार होते हैं और फिर कभी वापस नहीं लौटते. उनकी बर्बर हत्या पूरे शहर में दहशत फैला देती है. सब-इंस्पेक्टर जेपी (अली फजल) इस केस की जांच संभालता है. यही इस सीरीज की कहानी है.

राख की मोना अरोड़ा

सीरीज में सोनाली बेंद्रे ने 'मोना अरोड़ा' का किरदार निभाया है. उन्होंने ​प्रोसित रॉय, अनुषा नंदाकुमार और संदीप साकेत के साथ अपने पहले नरेशन को याद करते हुए कहा, 'इस कहानी में एक ऐसी संवेदनशीलता और इमोशनल ईमानदारी थी जो बिल्कुल अलग महसूस हुई. यह दुख या दर्द को आसान करने के पक्ष में नहीं थी. इसने उन जज्बातों को उनकी पूरी जटिलता के साथ जीने की जगह दी, और यही वो चीज थी जिसका मैं हिस्सा बनना चाहती थी. बतौर एक्टर्स, हमसे अक्सर उन इमोशंस को दिखाने के लिए कहा जाता है जिनसे दर्शक पहले से वाकिफ हैं. चुनौती उन बारीकियों को खोजने की होती है जो किसी किरदार के एक्सपीरियंस को उसके लिए खास बनाती हैं. मोना के साथ, मेरा ध्यान इस बात को समझने पर था कि किस चीज ने उसके दुख को बिल्कुल अलग बनाया, न कि इसे ऐसे पेश करने पर जो जाना-पहचाना या प्रेडिक्टेबल लगे.'

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​आज के दौर में वे जिस तरह की कहानियों और किरदारों की तरफ अट्रैक्ट हो रही हैं, उस बदलाव पर बात करते हुए वे कहती हैं, 'राख ने निश्चित रूप से उन कहानियों के दायरे को बढ़ा दिया है जिनकी तरफ मैं आज आकर्षित होती हूं. इस एक्सपीरियंस ने मुझे याद दिलाया कि कुछ सबसे मीनिंगफुल कहानियां अक्सर वही होती हैं जो हमें असहज करने वाले इमोशंस से भागने के बजाय उनके साथ ठहरने के लिए कहती हैं. मोना के बारे में जिस चीज ने मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया, वो यह थी कि उसका दुख किसी एक इमोशनल दायरे में नहीं बंधा है. यह खामोशी, गुस्से, इनकार, लचीलेपन और कभी-कभी नॉर्मल पलों के रूप में भी सामने आता है. असल जिंदगी में लोग अक्सर इसी तरह किसी नुकसान या दुख का सामना करते हैं.'

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​अली फजल, सोनाली बेंद्रे और आमिर बशीर जैसे बेहतरीन कलाकारों से सजी 'राख' को प्रोसित रॉय ने डायरेक्ट और प्रोड्यूस किया है. इसे अनुषा नंदाकुमार और संदीप साकेत ने क्रिएट, राइट और को-डायरेक्ट किया है.

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