भारत में सबसे ज्यादा समय तक थियेटर में रही फिल्मों का जिक्र होता है तो जहन में एक ही नाम आता है. ये नाम है शाहरुख खान और काजोल की हिट रोमांटिक क्लासिक 'दिलवाले दुल्हनिया' का. ये फिल्म टिकट खिड़की पर करीब 30 साल तक चली लेकिन ये इकलौती फिल्म नहीं है जिसके नाम लंबे समय तक टिके रहने का रिकॉर्ड है. इससे कई साल पहले एक और क्लासिक रोमांटिक सागा फिल्म आई थी जिसे दर्शकों ने दिल खोलकर प्यार दिया और इसका नतीजा ये रहा था कि ये 150 हफ्ते तक थियेटर्स में रही. पृथ्वीराज कपूर, दिलीप कुमार, मधुबाला, दुर्गा खोटे के लीड रोल वाली मुगल-ए-आजम 1960 में बनी एक भारतीय ऐतिहासिक ड्रामा फिल्म है. के.आसिफ के डायरेक्शन में बनी ये फिल्म मुगल राजकुमार सलीम और दरबार की कनीज अनारकली के प्रेम कहानी पर आधारित है. सलीम के पिता, सम्राट अकबर, इस रिश्ते के खिलाफ होते हैं. इस प्रेम कहानी को उनकी नफरत मिली जिसके चलते पिता और पुत्र के बीच युद्ध छिड़ जाता है.
अनारकली नाटक से मिली फिल्म की प्रेरणा
के.आसिफ ने इस फिल्म पर काम 1944 में शुरू किया था. ये वो वक्त था जब आसिफ ने नाटककार इम्तियाज अली ताज का 1922 का नाटक 'अनारकली' पढ़ा. यह सम्राट अकबर (1556–1605) के शासनकाल पर आधारित था. फिल्म के प्रोडक्शन में देरी और आर्थिक संकट आते रहे. 1950 के दशक की शुरुआत में शूटिंग शुरू होने से पहले प्रोजेक्ट ने एक फाइनेंसर खो दिया और कास्ट में पूरी तरह से बदलाव हुआ.
उस वक्त की मेगा बजट फिल्म थी मुगल-ए-आजम
इस फिल्म को बनाने में उस वक्त की किसी भी फिल्म से ज्यादा खर्च आया था. सिर्फ एक गाने के सीक्वेंस का बजट ही उस समय की पूरी फिल्म के बजट से भी ज्यादा था. भारतीय शास्त्रीय और लोक संगीत में लिपटी इस फिल्म की एल्बम में 12 गाने हैं. ये 12 के 12 सुपर हिट रहे और आज तक सुने और पसंद किए जाते हैं. इन खूबसूरत नगमों को लता मंगेशकर के साथ-साथ मोहम्मद रफी, शमशाद बेगम और बड़े गुलाम अली खान ने गाया है. इस फिल्म के गानों को हिंदी सिनेमा के इतिहास के सबसे बेहतरीन गानों में से एक माना जाता है.
मुगल-ए-आजम उस समय की सबसे बड़ी फिल्म थी. इसकी रिलीज भी बड़े पैमाने पर हुई थी. बताया जाता है कि दर्शक टिकट के लिए पूरे-पूरे दिन लाइन में खड़े रहते थे. 5 अगस्त 1960 को रिलीज हुई इस फिल्म ने भारत में बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए और सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म बन गई. यह रिकॉर्ड 15 साल तक इस फिल्म के नाम रहा. इस फिल्म को लेकर एक मजेदार ट्रीविया यह भी है कि यह करीब 150 हफ्ते यानी 3 साल तक थियेटर्स से नहीं उतरी थी.