15 अगस्त पर जरुर बजता है 63 साल पुराना देशभक्ति गीत, भारत-चीन युद्ध पर बना, आशा भोसले को हुआ ऑफर लेकिन लेखक ने लता मंगेशकर की आवाज से बनाया अमर

इस गाने को पहली बार सुन पंडित प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की आंखें भर आईं थीं और उन्होंने लता जी को अपना पास बुला कर उनकी तारीफ की थी. अब तो आप समझ ही गए होंगे हम किस गीत की बात कर रहे हैं.

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15 अगस्त पर जरुर बजता है 63 साल पुराना देशभक्ति गीत, भारत-चीन युद्ध पर बना
नई दिल्ली:

अगस्त का महीना आज से शुरू हो गया है. वहीं इस महीने 15 अगस्त को पूरा देश स्वतंत्रता दिवस मनाता है. जबकि स्कूल से लेकर इवेंट में हर साल लता मंगेशकर का गाया एक गाना जरूर सुनाई देता है. वो गाना जिसे सुनते ही दिल में देशभक्ति का गहरा गौरव जाग उठता है. जिसे सुन आंखें नम हो जाती हैं और भावनाओं से मन भर जाता है. इस गाने को पहली बार सुन पंडित प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की आंखें भर आईं थीं और उन्होंने लता जी को अपना पास बुला कर उनकी तारीफ की थी. अब तो आप समझ ही गए होंगे हम किस गीत की बात कर रहे हैं.

कौन सा है वो गाना?

जी हां, हम 'ऐ मेरे वतन के लोगों' गीत की बात कर रहे हैं. इस गाने को 27 जनवरी 1963 को स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने गाया था. गणतंत्र दिवस के मौके पर लता जी ने इस गाने को गाया और इसे अमर बना दिया. कहा जाता है कि जब कार्यक्रम में लता जी ने ये गाना गाया तो वहां मौजूद तत्कालीन प्रधानमंत्री पं जवाहर लाल नेहरू की आंखें नम हो गईं. उन्होंने लता जी को बुला कर उनकी खूब तारीफ की. गाने के बोल कवि प्रदीप ने लिखा था और इसका संगीत सी रामचंद्र ने दिया था. ये गाना 1962 के भारत-चीन युद्ध को समर्पित था. 

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आशा भोसले को हुआ था ऑफर

लता मंगेशकर ने इस गाने से जुड़ा अपना अनुभव साझा करते हुए कहा था कि वह पहले इस गाने को गाने के लिए तैयार नहीं थीं, उन्हें लगा था कि वह प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के आगे इस गाने को गा नहीं पाएंगी. लेकिन कवि प्रदीप को विश्वास था कि इस गाने के साथ लता ही इंसाफ कर सकती हैं. उन्हें अपना लिखे गाने पर पूरा यकीन था कि ये बहुत अधिक लोकप्रिय होगा.

लता मंगेशकर ने पहले किया था मना

लता जी ने एक इंटरव्यू में कहा था,  ऐ मेरे वतन के लोगो' को तैयार करने के लिए हमारे पास बहुत कम समय था. जल्दबाजी करने के बजाय, मैं इससे अलग रहना चाहती थी. लेकिन प्रदीप जी ने कहा कि अगर मैं 'ऐ मेरे वतन के लोगो'  नहीं गाऊंगी , तो वे इस विचार को रद्द कर देंगे. मैं मान गई. लेकिन मैंने सुझाव दिया कि हम इस गाने को मेरे और मेरी बहन आशा (भोसले) के साथ युगल गीत के रूप में पेश करूं. लेकिन प्रदीप जी इसे एकल गीत के रूप में चाहते थे. इधर, दिल्ली जाने से कुछ दिन पहले, आशा मेरे पास आई और बोली, 'दीदी, मैं दिल्ली नहीं आ रही हूं.'

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लता जी ने आगे कहा, ‘27 जनवरी को हम कार्यक्रम स्थल पर पहंचे. मैंने दो गाने गाए. पहला भजन 'अल्लाह तेरो नाम' और दूसरा ' ऐ मेरे वतन के लोगों'. गाने खत्म करने के बाद, मैं एक कप कॉफी लेकर आराम करने के लिए मंच के पीछे चली गई, इस बात से अनजान कि उस गाने ने मुझ पर कितना गहरा प्रभाव डाला था. अचानक मैंने महबूब खान साहब को मुझे बुलाते हुए सुना. उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और कहा, ' चलो, पंडितजी (जवाहरलाल नेहरू) ने बुलाया है .'

मुझे आश्चर्य हुआ कि वह मुझसे क्यों मिलना चाहता था. जब मैं बाहर गया तो पंडितजी, उनकी बेटी इंदिराजी, राधाकृष्णनजी सहित सभी लोग विनम्रतापूर्वक खड़े होकर मेरा स्वागत करने लगे. मेहबूब खान साब ने कहा, ' ये रही हमारी लता. आपको कैसा लगा उसका गाना ?' पंडितजी ने कहा, " बहुत अच्छा. मेरी आंखों में पानी आ गया '. उन सभी ने मेरी सराहना की.

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Topics mentioned in this article
Aye Mere Watan Ke Logon
Lata Mangeshkar
Asha Bhosale
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