कुछ गाने वक्त के साथ पुराने नहीं होते, बल्कि हर नई पीढ़ी के दिल में अपनी जगह बना लेते हैं. हिंदी सिनेमा का ऐसा ही एक सदाबहार गीत है लग जा गले. साल 1964 में रिलीज हुई फिल्म ‘वो कौन थी?' का यह गाना आज भी प्रेम, जुदाई और अधूरी मोहब्बत की सबसे खूबसूरत धुनों में गिना जाता है. करीब 62 साल बाद भी इस गीत का जादू बरकरार है. कभी दादा-दादी के जमाने में रेडियो पर गूंजने वाला यह गाना आज Gen Z की प्लेलिस्ट, इंस्टाग्राम रील्स और सोशल मीडिया वीडियो में भी खूब सुनाई देता है.
लता मंगेशकर की जादुई आवाज, मदन मोहन का दिल छू लेने वाला म्यूजिक और राजा मेहदी अली खान की इमोशनल लिरिक्स इस गीत को खास बनाते हैं. क्या आप जानते हैं कि जिस गाने को आज हिंदी सिनेमा की अनमोल धरोहर माना जाता है, उसे लेकर शुरुआत में फिल्म डायरेक्टर राज खोसला को बिल्कुल भी भरोसा नहीं था? यही नहीं, इस गीत की रिकॉर्डिंग के समय लता मंगेशकर की तबीयत भी ठीक नहीं थी.
जब ‘लग जा गले' को लेकर असमंजस में थे राज खोसला
फिल्म वो कौन थी? के निर्देशक राज खोसला को हिंदी सिनेमा में रहस्य और रोमांच से भरपूर फिल्में बनाने के लिए जाना जाता है. फिल्म में मनोज कुमार और साधना मुख्य भूमिकाओं में थे. मदन मोहन ने इस फिल्म के म्यूजिक की जिम्मेदारी संभाली थी और उनके म्यूजिक ने फिल्म के रहस्यमय माहौल को एक अलग पहचान दी.
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बताया जाता है कि जब मदन मोहन ने पहली बार 'लग जा गले' की धुन निर्देशक राज खोसला को सुनाई, तो उन्हें लगा कि यह गाना फिल्म के मिजाज के अनुरूप नहीं है. ऐसे में इस गाने को लेकर असमंजस पैदा हो गया. हालांकि, मदन मोहन को अपनी धुन पर पूरा भरोसा था. उसके बाद गीत को लेकर मनोज कुमार और निर्माता एन.एन. सिप्पी के पास गए. मनोज कुमार को यह धुन खूब पसंद आई और उन्होंने राज खोसला से इसे दोबारा सुनने की रिक्वेस्ट की. दोबारा सुनने पर गीत को सिलेक्ट कर लिया गया और आखिरकार इसे फिल्म में जगह मिली.
नासाज तबीयत में लता मंगेशकर ने गाया गाना
'लग जा गले' की लोकप्रियता में लता मंगेशकर की गायकी का सबसे बड़ा योगदान है. गीत की खासियत यह है कि इसमें भावनाओं को व्यक्त करने के लिए ऊंचे सुरों या नाटकीय अंदाज का सहारा नहीं लिया गया. लता की आवाज धीरे-धीरे श्रोता के दिल तक पहुंचती है. गीत में मौजूद बारीक सुरों, मुरकियों और उतार-चढ़ाव को उन्होंने जिस सहजता से निभाया, वह उनकी असाधारण गायकी का प्रमाण है. बताया जाता है कि जब लता मंगेशकर को ये गीत गाना था तो उनकी तबीयत ठीक नहीं थी. लता मंगेशकर ने अपने लंबे करियर में हजारों यादगार गीत गाए. लेकिन लग जा गले उनके पसंदीदा गानों में रहा. लग जा गले में राग पहाड़ी का इस्तेमाल किया गया है.
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इसकी लिरिक्स पर नजर डालें...
लग जा गले के फिर ये हसीं रात हो ना हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो ना हो...
हमको मिली हैं आज ये घड़ियाँ नसीब से
जी भर के देख लीजिये, हमको करीब से
फिर आप के नसीब में, ये बात हो ना हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो...
Gen Z को क्यों पसंद आ रहा 62 साल पुराना गीत?
आज के दौर में संगीत सुनने के तरीके बदल गए हैं. रेडियो और रिकॉर्ड की जगह स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म, शॉर्ट वीडियो और सोशल मीडिया ने ले ली है. इसके बावजूद ‘लग जा गले' जैसे पुराने गीत नई पीढ़ी को आकर्षित कर रहे हैं. प्यार, दूरी, यादें और किसी खास पल को थाम लेने की इच्छा ऐसी भावनाएं हैं, जो किसी एक पीढ़ी तक सीमित नहीं हैं.
'लग जा गले' की सबसे बड़ी खूबी यही है कि इसे समझने के लिए किसी खास दौर का हिस्सा होना जरूरी नहीं. 1964 में रिलीज हुआ यह गीत आज भी सुनने वाले को अपनी दुनिया में ले जाता है. दादा-दादी की यादों से निकलकर Gen Z की प्लेलिस्ट तक पहुंचा यह नगमा साबित करता है कि सच्चा संगीत कभी पुराना नहीं होता.
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