हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम युग की यादों को ताजा करने वाला एक अनोखा गाना आज भी दर्शकों के दिलों में बसा हुआ है. 1974 में रिलीज हुई फिल्म 'रेशम की डोरी' का गाना 'बोलो सियावर रामचंद्र की जय' सिर्फ एक भजन नहीं, बल्कि मात्र 322 सेकंड (लगभग 5 मिनट 22 सेकंड) में पूरी रामायण की कथा को समेटने वाला अद्भुत गीत है. इस हिंदी गाने में मन्ना डे की आवाज, नीरज के दिल छू लेने वाले बोल और शंकर-जयकिशन का संगीत मिलकर एक ऐसा अनुभव देते हैं जो बेमिसाल है.
फिर इस गाने के साथ चली आ रही धर्मेंद्र की कहानी तो और भी दिल छू लेने वाली है. इस गाने में सायरा बानो भी नजर आती है. क्या आपने देखी है ये फिल्म और गाना.
राजेश खन्ना थे पहली पसंद, बाजी मार ले गए धर्मेंद्र
फिल्म 'रेशम की डोरी' का निर्देशन आत्मा राम ने किया था, जो महान फिल्मकार गुरु दत्त के छोटे भाई थे. निर्माता टी.सी. दीवान थे. फिल्म 21 अगस्त 1974 को रिलीज हुई. इसमें धर्मेंद्र ने अजीत सिंह की भूमिका निभाई, जबकि सायरा बानो अनुपमा बनीं. कुमुद चुगानी ने राज्जो का किरदार निभाया. अन्य कलाकारों में सुजीत कुमार, रमेश देव, राजेंद्रनाथ, सज्जन और सप्रू शामिल थे. दिलचस्प यह है कि इस फिल्म को पहले राजेश खन्ना के साथ बनाया जाना था. लेकिन उनके साथ डेट का इश्यू आ रहा था, इस वजह से फिल्म को बॉलीवुड के हीमैन धर्मेंद्र के साथ बनाया गया.
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रक्षा बंधन की कहानी में हिट हुआ दशहरा का गाना
'रेशम की डोरी' फिल्म की कहानी भाई-बहन के अटूट प्रेम पर आधारित है. अजीत और राज्जो अनाथ हो जाते हैं. बड़ा भाई अजीत बहन की परवरिश के लिए हर कुर्बानी देता है. लेकिन कुछ ऐसा होता है कि अजीत जेल चला जाता है और इसी बीच अपनी बहन से दूर हो जाता है. फिर वो एक टेक्सटाइल मिल में काम करने लगता है, जहां उसकी मुलाकात सायरा बानो से होती है. फिल्म कपड़ा उद्योग, अमीरों के घमंड और तीन पीढ़ियों की कहानी को भी छूती है. आखिर में 'रेशम की डोरी' ही भाई-बहन को फिर से जोड़ती है.
'रेशम की डोरी' का बजट और कलेक्शन
धर्मेंद्र और सायरा बानो की फिल्म का अनुमानित बजट 30 लाख रुपये था. बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म सेमी हिट रही. फिल्म ने भारत में ग्रॉस कलेक्शन लगभग 1.10 करोड़ रुपये किया. 1974 की 15 सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में इसका नाम शामिल है. धर्मेंद्र को फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर के लिए नामांकन मिला, जबकि शंकर-जयकिशन को बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का नामांकन मिला.
क्या है इस हिंदी गाने में खास
'बोलो सियावर रामचंद्र की जय' गाने की खासियत इसकी कहानी में है. नीरज के शब्दों में राम कथा समाहित है, दशरथ के घर जन्म, शिवधनुष तोड़ना, वनवास, सोने का हिरण, सीताहरण, हनुमान का लंका जाना, मेघनाद से मुकाबला और अंत में राम-रावण युद्ध. 'इंसानों में भगवान था जो उस राम की कथा सुनाता हूं' जैसे बोल सुनकर रोमांच हो आता है. शंकर-जयकिशन के संगीत ने इसे भक्ति और सिनेमाई भाव से भर दिया. मन्ना डे की गंभीर आवाज ने इसे कालजयी बना दिया.
आज 52 साल बाद भी यह गाना रामनवमी, दीवाली या किसी भी धार्मिक मौके पर बजता है. यह गाना साबित करता है कि शब्दों में अगर आत्मा डाली जाए तो वो समय से परे हो जाते है.