यूट्यूब पर जब हनुमान भजन या हनुमान चालिसा सर्च करो तो हनुमान चालिसा के कई लो-फाई वर्जन सुनने को मिलते हैं. इसके अलावा और भी कभी नए कलाकार हैं जिन्होंने हनुमान की महिमा का बखान करते हुए गीत गाए हैं. ताजा उदाहरण हनुमान अंश में इस्तेमाल हुए सुनील लोधी का गाना 'मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान जी...' है लेकिन हम आज किसी नए हनुमान भजन नहीं बल्कि अतीत की गलियों के एक नगीने से आपकी मुलाकात करवाने जा रहे हैं. इस गीत में स्क्रीन पर तो हनुमान जी नजर आ रहे हैं लेकिन इस गीत में उनकी राम के प्रति भक्ति की झलक दिखाई गई है. साल 1981 में आई फिल्म महाबली हनुमान में प्रभु प्रेम से भरा ये गीत मोहम्मद रफी ने गाया था.
मोहम्म रफी की आवाज में सुंदर भजन
मोहम्मद रफी जैसे लीजेंड्री सिंगर की मधुर और भक्ति रस में डूबी आवाज में भजन ‘मन की आंखों से मैं देखूं रूप सदा सियाराम का' एक खूबसूरत नंबर है. यह गीत हनुमान जी की रामभक्ति को इतने गहरे भाव से व्यक्त करता है कि सुनने वाले का दिल भर आता है. संगीतकार कमलकान्त और गीतकार उदय खन्ना ने इसे बड़ी ही खूबसूरती से रचा.
गीत के बोल और उनका मतलब
गीत की शुरुआत एक दो45 साल पुराना गीत, राम-सीता के आयोध्या लौटने का था सीन, मोहम्मद रफी बने थे हनुमान की आवाज, भाव ऐसे कि आंखों से ना रुकें आंसूहे से होती है 'किस काम के यह हीरे-मोती, जिस में ना दिखे मेरे राम. राम नहीं तो मेरे लिए है व्यर्थ स्वर्ग का धाम' हनुमान जी सीता माता से मिले मोतियों के हार को तोड़कर देख रहे हैं. दरबार में सब हैरान हैं. हनुमान कहते हैं कि जिन मोतियों में मेरे राम का रूप न दिखे, वे मेरे किस काम के? अगर राम नहीं तो स्वर्ग भी बेकार है. हनुमान जी कहते हैं कि मैं बाहरी आंखों से नहीं, बल्कि मन की आंखों से हमेशा सीता-राम का रूप देखता हूं. मेरे मन के मंदिर में उनका आसन कभी खाली नहीं रहता.
फिल्म में यह सीन बहुत ही मार्मिक है. राम-सीता अयोध्या लौट आए हैं. सीता माता हनुमान जी को उपहार देना चाहती हैं. हनुमान जी राम को ही मांगते हैं. जब मोतियों का हार मिलता है तो वे उसे तोड़कर देखते हैं कि इनमें राम हैं या नहीं. लोग उन पर अपमान करने का आरोप लगाते हैं. तब हनुमान जी अपनी छाती चीरकर दिखाते हैं कि उनके हृदय में सदा सीता-राम विराजमान हैं. यह चमत्कार उनकी अटूट भक्ति का प्रमाण है.