बॉलीवुड में कुछ ऐसे स्टार्स हैं, जिन्होंने बहुत ही कम उम्र में ऐसी फिल्मों और गानों में काम किया जा न सिर्फ सालों बाद तक लोगों को याद हैं. बल्कि उनकी छाप लोगों के दिलों में आज भी बसी हुई है. आज हम बात कर रहे हैं 44 साल पुराने एक गाने की जिसमें ऋषि कपूर और पद्मिनी कोल्हापुरे ने अभिनय किया. महज 17 साल की उम्र में पद्मिनी ने अपनी एक्टिंग से लोगों को दीवाना बना दिया था. ऋषि और उनकी जोदी ने दर्शकों को कायल कर दिया. उनकी इस फिल्म की कहानी ही नहीं बल्कि उसका संगीत को भी बेहद पसंद किया गया. आज हम उनके एक गाने की बात करेंगे जिसने प्यार करने वालों के दिल के हाल को बेहद ही खूबसूरत तरीके से पेश किया. इस गाने को खास बनाने में संगीत, बोल और आवाज के साथ ही थी नीदरलैंड के ट्यूलिप गार्डन की खूबसूरती. तो चलिए जानते हैं ये कौन सा गाना है.
एम्सटर्डम के पास ट्यूलिप के खेतों में हुई थी शूटिंग
हम बात कर रहे हैं साल 1982 में आई फिल्म 'प्रेम रोग' के गाने 'भंवरे ने खिलाया फूल, फूल को ले गया राजकुंवर' की, इस गाने को सुनते ही खूबसूरत वादिया और रंग-बिरंगे फूल और प्यार के पुराने दिन याद आ जाते हैं. इस गाने में ऋषि कपूर और पद्मिनी कोल्हापुरे की जोड़ी नजर आई थी. गाने के बोल नरेंद्र शर्मा ने लिखे थे और इसका संगीत तैयार किया था लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने. गाने को लता मंगेशकर और सुरेश वाडेकर ने अपनी आवाज से चार चांद लगा दिए थे. इस गाने की शूटिंग नीदरलैंड में एम्सटर्डम के पास स्थित केयूकेनहॉफ (Keukenhof) के ट्यूलिप गार्डन में की गई थी.
ट्यूलिप गार्डन के फूल इस गाने को किसी खूबसूरत पेंटिंग जैसा फील देते हैं. फूलों से भरे खेत, खुला आसमान और यूरोप की प्राकृतिक सुंदरता गाने के रोमांटिक अंदाज को और खास बनाते हैं. इस गाने को शूट करने में करीब नौ दिन लगे थे. जिस समय पर इस गाने को वहां पर शूट किया गया, वहां पर दिन लंबे होते थे और अंधेरा देर से होने के कारण शूटिंग भी लंबे समय तक चलती थी. इसी लोकेशन पर इससे पहले फिल्म 'सिलसिला' के फेमस गाने 'देखा एक ख्वाब' को भी फिल्माया गया था.
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सुरेश वाडकर और लता की आवाज
इस गाने को और भी खास बनाती है सिंगर्स की आवाज. गाने के बोलों में भंवरे और फूल के जरिए प्यार, मासूमियत और फीलिंग्स को पेश किया गया. इसमें भंवरे की आवाज को सुरेश वाडकर ने ही गाया थी. सुरेश वाडकर ने खुद मुंह से भंवरे जैसी गुनगुनाहट की आवाज निकाली थी. राज कपूर को यह आवाज पसंद आई और उन्होंने इसे गाने में रखने के लिए कहा. इस गाने में सिर्फ रोमांस ही नहीं बल्कि एक खूबसूरत फीलिंग्स को भी दिखाया गया, जिसने इसको खास बनाया. गाने के बोलों को भी बेहद ही खूबसूरती से लिखा गया. जो इस प्रकार हैं-
भँवरे ने खिलाया फूल
फूल तो ले गया राज कुंवर
भँवरे तू केहना न भूल
फूल तुझे लग जाये मेरी उम्र
भँवरे ने खिलाया फूल
फूल तो ले गया राज कुंवर
है हां हां हां अहह
भँवरे ने खिलाया फूल
फूल तो ले गया राज कुंवर
भँवरे ने खिलाया फूल
फूल तो ले गया राज कुंवर
भँवरे तू केहना न भूल
फूल तेरा हो गया इधर उधर
भँवरे ने खिलाया फूल
फूल तो ले गया राज कुंवर
वो दिन अब न रहे
क्या क्या विपदा पड़ी फूल
पर कैसे फूल कहे
वो दिन अब न रहे
होनी यहॉ अनहोनी जाने इसे विधाता
छूटे हर शिंघार
गिरा टुटा गलहार हर नाता
शेष फूल मिला गया धूल
में क्या क्या दुखन सहे
वो दिन अब न रहे
भँवरे तू केहना न भूल
फूल दलि से उतर गया इधर
सुख दुःख आये जाए जाए
सुख दुःख आये जाए जाए
सुख की भूख न दुःख की चिंता
प्रीत जिसे अपनाये
सुख दुःख आये जाए
मीरा ने पिया विष का प्याला
विष को भी अमृत कर डाला
प्रेम का ढाई अक्षर पढ़
के मस्त कबीरा गाये
सुख दुःख आये जाए
भँवरे तू केहना न भूल
फूल गुज़रे दिन गए गुज़ार
भँवरे ने खिलाया फूल
फूल तो ले गया राज कुंवर
आ आ आ आ आ
न न रे न
होली फूल फुलवारी में
भँवरा गन गन
गन गन गन गाए
काहे सोवत नीरा जगाये
काहे सोवत नीरा जगाये
लाखों में किस एक
फूल ने लाखों फूल खिलाये
मंद मंद मुस्काये
काहे सोवत निन्दिया जगाये
भँवरे तू केहना न
भूल फूल तेरा मधुर
नहीं मधुकर
भँवरे ने खिलाया फूल
फूल तो ले गया राज कुंवर
भँवरे तू केहना न भूल
फूल मेरा सुन्दर सरल सुधर
भँवरे ने खिलाया फूल
फूल तो ले गया राज कुंवर
तू ही मेरा सुन्दर सरल सुधर
फूल को ले गया राज कुंवर
तू ही मेरा सुन्दर सरल सुधर
फूल को ले गया राज कुंवर
'भंवरे ने खिलाया फूल, फूल को ले गया राजकुंवर' की लाइनें आज भी पुराने हिंदी फिल्मी गाने के शौकीनों को याद है.
राज कपूर की 'प्रेम रोग' ने बॉक्स ऑफिस पर भी मचाई थी धूम
राज कपूर के निर्देशन में बनी 'प्रेम रोग' में ऋषि कपूर और पद्मिनी कोल्हापुरे के अलावा शम्मी कपूर, नंदा और तनुजा जैसे कलाकार भी नजर आए थे. फिल्म की कहानी प्रेम, सामाजिक रूढ़ियों और एक विधवा की जिंदगी से जुड़े सवालों को सामने लाती है. फिल्म में ऋषि कपूर ने देवधर और पद्मिनी कोल्हापुरे ने मनोरमा का किरदार निभाया था. ये फिल्म उस साल की सबसे ज्यादा फेमस फिल्मों में शामिल रही और इसे बॉक्स ऑफिस पर भी सफलता मिली. बता दें कि इस फिल्म के लिए राज कपूर को बेस्ट डायरेक्टर निर्देशक और पद्मिनी कोल्हापुरे को बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला था.
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