40 साल पुराना गाना जिसे सुन सिसक-सिसक कर रोया पूरा देश, घर से दूर रह रहे हर शख्स की आंख में था आंसू

40 साल पहले रिलीज हुई एक फिल्म का ये इमोशनल गाना आज भी लोगों को भावुक कर देता है. दिलचस्प बात ये है कि पंकज उधास पहले इसे गाने के लिए तैयार नहीं थ, लेकिन बाद में यही गाना उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गया.

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पंकज उधास का ये गाना आद भी रुला जाता है
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नई दिल्ली:

पर्दे पर एक बेटा अपने घर से आई चिट्ठी पढ़ रहा था और सिनेमाघर में बैठे लोग अपने आंसू पोंछ रहे थे. किसी को मां की याद आ गई, तो किसी को अपना गांव और बचपन. यही हाल विदेशों में रहने वाले भारतीयों का भी हुआ. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस गाने ने लाखों-करोड़ों लोगों को भावुक कर दिया, उसे गाने के लिए पंकज उधास पहली बार में तैयार ही नहीं थे. बाद में किस तरह यही गाना उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मील का पत्थर बन गया, इसकी कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है.

एक गाने ने रातों-रात बदल दी किस्मत

साल 1986 में रिलीज हुई फिल्म 'नाम' में कई दमदार सीन थे, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा जिस चीज की हुई, वो था 'चिट्ठी आई है'. गाना शुरू होते ही लोगों का दिल भर आता था. पंकज उधास की आवाज, आनंद बक्शी के बोल और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का संगीत ऐसा मिला कि ये गाना सीधे लोगों के दिल में उतर गया. रिलीज के कुछ ही दिनों में ये हर घर, हर रेडियो और हर महफिल की पहचान बन गया.

पंकज उधास ने गाना गाने से कर दिया था इनकार

आज ये बात सुनकर यकीन करना मुश्किल होगा लेकिन शुरुआत में पंकज उधास इस गाने को गाने के लिए तैयार नहीं थे. उन्हें लग रहा था कि क्या वो इस गाने के दर्द को उतनी सच्चाई से निभा पाएंगे जितनी इसकी कहानी मांगती है. निर्देशक महेश भट्ट ने उन्हें समझाया कि रिकॉर्डिंग के वक्त ऐसा महसूस करें, जैसे वो विदेश में अपने किसी लाइव शो में बैठे लोगों के सामने गा रहे हों. बस यही बात उनके दिल को छू गई और उन्होंने गाना रिकॉर्ड करने का फैसला कर लिया.

रिकॉर्डिंग के बाद हर कोई रह गया खामोश

जैसे ही रिकॉर्डिंग पूरी हुई स्टूडियो का माहौल बदल चुका था. वहां मौजूद कई लोग भावुक हो गए. फिल्म रिलीज हुई तो पर्दे पर इस गाने का असर और भी गहरा दिखा. खासकर दुबई के एक थिएटर में फिल्म देखते वक्त कई दर्शक अपने परिवार को याद करके रो पड़े. गाना खत्म होने के बाद भी लोग काफी देर तक उसकी बातें करते रहे.

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विदेशों में भी छलक पड़े थे आंसू

इस गाने का जादू सिर्फ फिल्म तक सीमित नहीं रहा. एक लाइव शो के दौरान जब पंकज उधास ने 'चिट्ठी आई है' गाना शुरू किया तो सामने बैठे एक शख्स की आंखों से आंसू निकल पड़े. उसे देखकर बाकी लोग भी भावुक हो गए. माहौल इतना इमोशनल हो गया कि गाना खत्म होने के बाद पंकज उधास ने सबसे माफी मांगी और फिर दूसरा गाना गाकर माहौल हल्का किया.

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आज भी दिल को छू जाता है ये गाना

चार दशक बीत चुके हैं, लेकिन 'चिट्ठी आई है' का जादू आज भी वैसा ही है. सोशल मीडिया से लेकर म्यूजिक प्लेलिस्ट तक ये गाना आज भी उतना ही पसंद किया जाता है. शायद यही वजह है कि इसे सिर्फ एक सुपरहिट गाना नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा के सबसे इमोशनल गीतों में गिना जाता है. कुछ गाने वक्त के साथ पुराने हो जाते हैं लेकिन 'चिट्ठी आई है' हर दौर में लोगों के दिल के और भी करीब आता चला गया.

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