33 साल पुराना करवाचौथ का गाना, सुहासिनी की आवाज और समीर के कालजयी बोल बना गए सदाबहार

33 साल पहले सैनिक नाम से एक फिल्म आई थी. इस फिल्म का एक गाना ऐसी सिचुएशन पर फिल्माया गया जिसमें हर किसी को यही लग रहा था कि हीरो मर चुका है. जबकि हीरोइन ने करवाचौथ का व्रत रखा था. समीर के बोल और सुहासिनी की आवाज ने इस गाने को हमेशा के लिए यादगार बना दिया.

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करवाचौथ पार्टी के लिए बिलकुल परफेक्ट है ये 33 साल पुराना गाना
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नई दिल्ली:

करवाचौथ का व्रत सुहागनों के लिए बहुत ही खास महत्व रखता है. ये व्रत अपने पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है. इस दिन शादीशुदा महिलाएं निर्जल व्रत रखती हैं और फिर रात में चांद को जल चढ़ाकर ही व्रत तोड़ती हैं. इस व्रत को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. ऐसे में गाना बजाना ना हो ऐसा कैसे हो सकता है. इस साल करवाचौथ 29 अक्तूबर को है. यकीनन महिलाएं इस दिन की खास तैयारियों में जुटी होंगी ऐसे में हमने सोचा क्यों ना हम भी गाने सिलेक्ट करने में आपकी कुछ मदद कर दें. इसी कड़ी में आज हम आपके लिए 33 साल पुराना एक करवाचौथ वाला गाना. फिल्म में गाना एक इमोशनल मोड पर आता है लेकिन अगर गाने से अलग आप इसके बोल सुनें तो ये आपको एक परफेक्ट करवाचौथ वाला गाना लगेगा. 

हम बात कर रहे हैं अक्षय कुमार और अश्विनी भावे के लीड रोल वाली फिल्म सैनिक की. साल 1993 में आई इस फिल्म का गाना 'है मेरी सांसों में मेरे पिया' करवाचौथ के मौके पर एक परफेक्ट नंबर है. इसके भावुक कर देने वाले बोल और पति-पत्नी के बीच का अटूट प्रेम इसे करवाचौथ जैसे त्योहार की भावना से जोड़ देता है. सुहासिनी नंदगांवकर की आवाज ने इसमें चार चांद लगा दिए. सुहासिनी ने 90 के दशक में कई फिल्मी गानों में अपनी छाप छोड़ी, लेकिन “है मेरी सांसों में मेरे पिया” उनके सबसे यादगार गीतों में से एक माना जाता है. गाने में पत्नी की समर्पण भावना इतनी स्वाभाविक लगती है कि सुनने वाले सीधे दिल से जुड़ जाते हैं. समीर के बोल और इस गाने को नदीम-श्रवण ने कम्पोज किया था. ये वही जोड़ी जिसने 90 के दशक में रोमांटिक म्यूजिक का नया स्वाद दिया. उनकी धुनें सरल, मीठी और दिमाग में छपने वाली होती थीं. इस गाने की धुन भी वैसी ही है धीमी, भावुक और दिल को छू लेने वाली.

है मेरी सांसों में मेरे पिया के लिरिक्स

है मेरी सांसों में मेरे पिया
मैंने पिया से वचन है लिया
है मेरी सांसों में मेरे पिया
मैंने पिया से वचन है लिया
जन्मों जनम तक साथ रहेंगे
सुख चाहे दुख मिलके सहेंगे
है मेरी सांसों में मेरे पिया
मैंने पिया से वचन है लिया..

जब जब मुझे जीवन मिले
मुझको यही साजन मिले
जब जब मुझे जीवन मिले
मुझको यही साजन मिले
ये ज़िन्दगी उनके लिए
मेरी हर खुशी उनके लिए
घडी घडी मेरा जिया कसम यही खाए

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है मेरी सांसों में मेरे पिया
मैंने पिया से वचन है लिया
जन्मों जनम तक साथ रहेंगे
सुख चाहे दुख मिलके सहेंगे
है मेरी सांसों में मेरे पिया
मैंने पिया से वचन है लिया

सैनिक फिल्म की कहानी

सैनिक 1993 में रिलीज हुई एक्शन-ड्रामा फिल्म है. इसे सिकंदर भारती ने डायरेक्ट किया था. कहानी भारतीय सेना के अधिकारी लेफ्टिनेंट सूरज दत्त (अक्षय कुमार) के इर्द-गिर्द घूमती है. सूरज छुट्टी पर घर आता है, रास्ते में स्कूल के बच्चों को बचाकर हीरो बन जाता है और अलका (अश्विनी भावे) से प्यार हो जाता है. दोनों शादी कर लेते हैं. सूरज की बहन मिन्नी की भी शादी होती है. शादी के कुछ समय बाद सूरज, सीमा पर ड्यूटी पर लौट जाता है. कुछ दिनों बाद परिवार को खबर मिलती है कि वह लापता हो गया है और मृत समझा जा रहा है. दिलचस्प बात ये है कि पिता, पत्नी और बहन सबको अलग-अलग ये दुखद खबर मिलती है, लेकिन सब एक-दूसरे से छिपाते हैं ताकि परिवार टूटे नहीं. फिल्म परिवार के इस छिप-छिप कर सहे गए दर्द, प्रेम और बलिदान को दिखाती है. आखिर में सूरज की वापसी होती है और सब कुछ ठीक हो जाता है.

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