दिवाली करीब है, करवाचौथ का व्रत 29 अक्तूबर को धूमधाम से मनाया जाएगा. ऐसे में हर किसी के मन में यही चाह होती है कि वह अपने घर पहुंच जाए. घर से दूर रहने वाले महीने पहले अपने गांव-घर लौटने की तैयारी में जुट जाते हैं. घर परिवार वाले भी इसी सोच में होते हैं कि उनके अपने, बेटे, बेटियां उनके करीब हों. ये दूरी उन शादीशुदा महिलाओं के लिए भी बहुत दुखदायी होती है जिनके पति काम के सिलसिले में बाहर होती है. इनकी इसी तकलीफ पर अवधी-भोजपुरी में एक बेहद प्यारा गाना भी बना है. करीब 14 साल पहले आया ये पति के इंतजार में बैठी महिलाओं के लिए बहुत ही सटीक है. इस गीत में उनकी वेदना साफ नजर आती है. वह पति के विरह से इतनी तंग हो चुकी हैं कि उन्हें शहर तक ले जाने वाली रेल भी दुश्मन लगने लगती है.
इस गाने के बोल हैं "रेलिया बैरन पिया को लिये जाय रे" यह एक बहुत पुराना और मशहूर भारतीय लोकगीत है. यह अवधी और भोजपुरी क्षेत्र के परंपरागत विरह गीतों में से एक है. इस गीत में एक स्त्री की वेदना को बहुत मार्मिक तरीके से जाहिर किया गया है. गाने का भाव यह है कि रेलगाड़ी को “बैरन” यानी दुश्मन कहा गया है क्योंकि वह उसके पिया को लेकर दूर चली जाती है. इस गाने में पत्नी रेलगाड़ी को कोसती है. वह कहती है कि ऐसा पानी बरसे कि उसके पति की टिकट गल जाए. जिस शहर में वह जा रहा है वहां आग लग जाए. अगर वह किसी साहब का नौकर है तो उसे गोली लग जाए, और अगर वह किसी सौत के चक्कर में है तो वह धतूरा खाकर बावली हो जाए.
ये लाइनें सुनने में भले ही थोड़ी कड़वी लगें, लेकिन इनमें एक पत्नी का गहरा प्यार, उसका अकेलापन और अपने प्रिय से बिछड़ने का गम छिपा है. पुराने समय में जब मोबाइल या बातचीत के साधन नहीं थे तो बस एक चिट्ठी का सहारा होता था. यही वजह है कि पति से बिछड़ने पर वह इतनी व्याकुल हो जाती है.
किसने गाया है 'रेलिया बैरन'?
यह गाना अलग अलग सिंगर्स ने अपने-अपने अंदाज में गाया है. कल्पना पटवारी की आवाज में यह गाना 2003 में टी-सीरीज के एलबम Reliya Bairan में जारी हुआ था. उनकी मधुर और मार्मिक आवाज ने इस पारंपरिक गीत को नई जान दी. इसके अलावा मालिनी अवस्थी, क्षमा पांडे, और कई दूसरे लोक गायकों ने भी इसे गाया है. मालिनी अवस्थी ने लाइव परफॉर्मेंस में कई दफा इस गाने को गाया है.
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