ट्रंप सरकार में अमेरिका में भारतीयों पर नस्लीय हिंसा बढ़ी; हिंदू, सिख और मुसलमानों में सबसे अधिक पीड़ित कौन?
विभिन्न सर्वेंक्षण के आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ नस्लीय हिंसा में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इन आंकड़ों से पता चलता है कि डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद इस तरह की हिंसा में तेजी आई है. लेकिन वो इसकी आलोचना करने बच रहे हैं.
अमेरिका की सेकेंड लेडी उषा वेंस अपने भारतीय मूल को लेकर एक बार फिर चर्चा में हैं. उनके पति और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोमवार को मिशिगन से डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेट उम्मीदवार अब्दुल एल सैयद पर जमकर हमला बोला. एक चुनावी रैली में वेंस ने उषा को लेकर सैयद की टिप्पणी पर कहा,''अब्दुल, मेरी पत्नी का नाम अपनी जुबान से दूर रखो, क्योंकि वह तुम्हारी पहुंच से बहुत बाहर है.''
दरअसल, इससे एक हफ्ते पहले एल सैयद ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया था कि अगर उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ऐसा कर सकते, तो क्या वे उषा को 'समय में पीछे ले जाकर पापॉ' से मिलवाते? यहां 'पापॉ' से उनका इशारा जेडी वेंस के दिवंगत दादा की ओर था. उनकी टिप्पणी से ऐसा लगा कि वह यह संकेत दे रहे हैं कि शायद वेंस के दादा ने उनकी अंतरजातीय शादी को स्वीकार नहीं किया होता.
भारतीय-अमेरिकी समुदाय के नेताओं ने एल सैयद की इस टिप्पणी की आलोचना की. हालांकि, विडंबना यह है कि खुद एल सैयद भी जेडी वेंस की रिपब्लिकन पार्टी के कुछ लोगों की ओर से नस्लीय और इस्लाम-विरोधी नफरत का निशाना बन चुके हैं.
नस्लीय हमलों की शिकार हैं उषा वेंस
हिंदू धर्म मानने वाली उषा वेंस अमेरिका में नस्लीय हमलों की सबसे चर्चित पीड़ितों में शामिल हैं. इनमें से ज्यादातर हमले रिपब्लिकन पार्टी के समर्थकों और दक्षिणपंथी कट्टरपंथियों की ओर से हुए हैं. इनमें सबसे प्रमुख नाम निक फ्यूएंटेस का है. वो 27 साल का श्वेत वर्चस्ववादी नेता हैं, जो एडॉल्फ हिटलर के प्रशंसक और होलोकॉस्ट से इनकार करने वाले व्यक्ति हैं.
फ्यूएंटेस लगातार उषा की भारतीय और हिंदू पहचान पर हमला करते रहे हैं. उन्होंने उषा से शादी करने के कारण जेडी वेंस को 'रेस ट्रेटर' यानी अपनी नस्ल के साथ विश्वासघात करने वाला व्यक्ति तक कहा है. ये हमले तब शुरू हुए जब डोनाल्ड ट्रंप ने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए जेडी वेंस को अपना उपराष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया था. फ्यूएंटेस ने एक बार कहा था,''उषा नाम की महिला से आखिर कौन शादी करता है? साफ है कि वह अपनी नस्लीय पहचान को महत्व नहीं देता.''
ऐसी नस्लीय नफरत का शिकार होने वाले दूसरे प्रमुख भारतीय-अमेरिकियों में पूर्व राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार विवेक रामास्वामी, न्यूयॉर्क के मेयर जोहान ममदानी और नागरिक अधिकारों से जुड़े असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल हरमीत ढिल्लों शामिल हैं.
रामास्वामी हिंदू हैं. वो रिपब्लिकन पार्टी की ओर से ओहायो का गवर्नर बनने के लिए चुनाव प्रचार कर रहे हैं. उन्हें लगभग हर दिन ऑनलाइन नस्लीय गालियों का सामना करना पड़ता है. कई बार उन्हें आमने-सामने भी ऐसी बातें सुननी पड़ती हैं. कुछ लोग उनसे कहते हैं कि वे भारत वापस चले जाएं. वहीं कुछ लोग कहते हैं कि वे केवल किसी श्वेत व्यक्ति को ही चुनाव में जीतते देखना चाहते हैं. यह सब तब हो रहा है जब राष्ट्रपति ट्रंप खुद रामास्वामी का समर्थन कर चुके हैं.

अमेरिका में कितना बढ़े हैं नस्लीय हमले
अमेरिकी एफबीआई की पिछले महीने जारी रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में पूरे अमेरिका में एशियाई लोगों के खिलाफ दर्ज नफरत से जुड़े अपराधों में करीब 10 फीसद की कमी आई. लेकिन रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सिखों के खिलाफ ऐसे अपराध 24.6 फीसद बढ़े, जबकि हिंदुओं के खिलाफ 12 फीसद बढ़े. वहीं मुसलमानों के खिलाफ नफरत से जुड़े अपराधों में करीब 10 फीसद की कमी आई.
हालांकि, स्वतंत्र शोधकर्ताओं की रिपोर्ट तस्वीर को और ज्यादा चिंताजनक बताती है. उनका कहना है कि भारतीय समुदाय के खिलाफ नस्लीय गालियों और हमलों के बहुत से मामले दर्ज ही नहीं होते. अमेरिका में केवल नस्लीय गाली देना या नफरत भरी भाषा बोलना अपने आप में अपराध नहीं है. जब तक इससे शारीरिक हिंसा या कोई अन्य अपराध न हो, ऐसे मामलों पर एफबीआई की आपराधिक रिपोर्टिंग व्यवस्था में कार्रवाई नहीं होती.
क्या डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद बढ़ी हैं नस्लीय घटनाएं
Stop AAPI Hate नाम का अमेरिकी संगठन एशियाई और प्रशांत द्वीप समूह के लोगों के खिलाफ नफरत से जुड़ी घटनाओं पर नजर रखता है. इसने गुरुवार को एक नई रिपोर्ट जारी की. इसके मुताबिक अमेरिका में भारतीयों और अन्य दक्षिण एशियाई लोगों के खिलाफ नस्लीय घटनाएं पिछले दो सालों में दोगुनी से भी ज्यादा हो गई हैं. इस रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2023 से दिसंबर 2025 के बीच दक्षिण एशियाई लोगों के खिलाफ इस्तेमाल की जाने वाली नस्लीय गालियों में 109 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. यह रिपोर्ट बाजार अनुसंधान कंपनी Moonshot और शिकागो विश्वविद्यालय के NORC की ओर से किए गए सर्वेक्षणों पर आधारित है.
सिर्फ 2025 में अमेरिका में रहने वाले 48 फीसदी दक्षिण एशियाई वयस्कों ने कहा कि उन्हें अपनी नस्ल, जातीय पहचान या राष्ट्रीयता के कारण नफरत का सामना करना पड़ा. इनमें करीब आधे लोगों को नस्लीय उत्पीड़न का सामना करना पड़ा, जबकि 14 फीसदी लोगों पर शारीरिक हमला हुआ. जनवरी 2023 से दिसंबर 2025 के बीच इंटरनेट पर एशियाई लोगों के खिलाफ इस्तेमाल की गई सभी नस्लीय गालियों में 66 फीसदी दक्षिण एशियाई लोगों के खिलाफ थीं. इनकी संख्या 13 लाख से अधिक बताई गई है.
भारतीयों, खासकर सिखों और हिंदुओं के खिलाफ अमेरिका में इस्तेमाल की जाने वाली प्रमुख नस्लीय गालियों में 'जीट' और 'पजीट' जैसे अपमानजनक शब्द शामिल हैं. फ्यूएंटेस ने जेडी वेंस और उषा वेंस के बच्चों के लिए भी ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया है. रामास्वामी को भी ऐसी गालियों का सामना करना पड़ा है. उनके भारतीय और हिंदू होने को लेकर भी उन पर निशाना साधा जाता है.
न्यूयार्क के भारतीय मूल के मेयर ममदानी भी हैं पीड़ित
चार नवंबर को न्यूयॉर्क के पहले भारतीय-अमेरिकी और मुस्लिम मेयर बनने वाले जोहान ममदानी को चुनाव प्रचार के दौरान और उसके बाद बड़ी संख्या में इस्लाम-विरोधी गालियों का सामना करना पड़ा. Moonshot के आंकड़ों के मुताबिक 1 अक्टूबर से 11 नवंबर 2025 के बीच ममदानी को लेकर मुस्लिम और दक्षिण एशियाई विरोधी गालियों में 238 फीसदी की चिंताजनक बढ़ोतरी हुई.
Stop AAPI Hate अपनी रिपोर्ट में 'दक्षिण एशियाई' शब्द का इस्तेमाल करता है. लेकिन रिपोर्ट में दिए गए उदाहरणों और उपलब्ध आंकड़ों से साफ है कि अमेरिका में नस्लीय नफरत का सामना करने वाले एशियाई लोगों में बड़ी संख्या भारतीयों की है.
अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट (आईसीई) के आंकड़े भी बताते हैं कि एशियाई समुदायों में भारतीय सबसे ज्यादा निशाना बनने वाले समूहों में हैं. पिछले साल अमेरिका के सेंटर फॉर दी स्टडी ऑफ आर्गेनाइज्ड हेट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भारतीयों के खिलाफ नस्लवाद को लेकर एक सर्वे किया. इसमें पाया गया कि 1 जुलाई से 7 सितंबर 2025 के बीच ज्यादा लोगों तक पहुंचने वाली 680 नस्लवादी पोस्ट को 28.12 करोड़ बार देखा गया.
CSOS के संस्थापक और कार्यकारी निदेशक रकीब नाइक ने नवंबर 2025 में टीवी चैनल सीएनएन को बताया था कि अकेले अक्टूबर में उनकी टीम ने भारतीयों और भारतीय-अमेरिकियों के खिलाफ नस्लवाद और विदेशियों के प्रति नफरत फैलाने वाली करीब 2,700 पोस्ट दर्ज की थीं. इसमें एक वजह पिछले साल कई प्रमुख भारतीय-अमेरिकियों द्वारा सोशल मीडिया पर दिवाली की शुभकामनाएं देना भी थी. इनमें निक्की हेली, विवेक रामास्वामी और हरमीत ढिल्लों जैसे नाम शामिल थे. नफरत फैलाने वालों के निशाने पर एफबीआई निदेशक कश पटेल भी आए. उन्होंने 2025 में व्हाइट हाउस में दिवाली कार्यक्रम आयोजित किया था.
भारतीय जितने आगे बढ़ते हैं, नफरत भी उतनी बढ़ती है?
Carnegie Endowment के इस साल किए गए एक सर्वे में 1,000 भारतीय-अमेरिकी वयस्कों को शामिल किया गया. इसमें आधे लोगों ने कहा कि 2025 की शुरुआत से उन्हें व्यक्तिगत रूप से भेदभाव का सामना करना पड़ा. एक अन्य संगठन, Indian American Advocacy Council, ने भी भारतीयों के खिलाफ नफरत में बढ़ोतरी की बात कही है.
इस संगठन को सैन फ्रांसिस्को के एक टेक उद्यमी सिद्धार्थ ने बनाया है. उन्होंने बताया कि जुलाई में भारतीयों के खिलाफ नफरत की घटनाओं पर नजर रखने के लिए ट्रैकर शुरू करने के दो महीने से भी कम समय में उन्हें 30 शिकायतें मिलीं.
सिद्धार्थ खुद भी ऑनलाइन नफरत का निशाना बने हैं. सुरक्षा कारणों से वह अपना पूरा नाम सार्वजनिक नहीं करते. उन्होंने बताया कि उन्होंने 2024 में ट्रंप को वोट दिया था, लेकिन अब वह ट्रंप के सबसे मुखर आलोचकों में शामिल हैं.
Stop AAPI Hate के मुताबिक, पिछले साल न्यूयॉर्क के मेयर पद की दौड़ में ममदानी के उतरने के बाद भारतीयों और दक्षिण एशियाई लोगों के खिलाफ नफरत में तेजी आई. ममदानी की मुस्लिम और भारतीय-अमेरिकी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आई. फ्यूएंटेस ने भी उन पर हमला किया. हालांकि, भारतीय-अमेरिकियों में उसके मुख्य निशाने जेडी वेंस की पत्नी उषा और विवेक रामास्वामी रहे हैं.
फ्यूएंटेस ने ओहायो में रामास्वामी के खिलाफ प्रचार करने की भी बात कही है. उसने यहां तक कहा कि वह रामास्वामी की जगह किसी डेमोक्रेट उम्मीदवार को जीतते देखना पसंद करेगा. भारतीयों के खिलाफ नफरत में बढ़ोतरी उस समय भी देखी गई जब भारतीय मूल की कमला हैरिस 2024 में अमेरिकी राष्ट्रपति पद की दौड़ में उतरीं. इसके बाद जेडी वेंस को ट्रंप ने उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया और उनकी पत्नी उषा भी राष्ट्रीय चर्चा में आ गईं.
क्या H-1B वीजा से भी भारतीयों के खिलाफ बढ़े नस्लीय हमले
लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार भारतीयों के खिलाफ नफरत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह ट्रंप की दोबारा जीत, उनका इमिग्रेशन पर जोर और H-1B वीजा को लेकर विवाद रहा है. H-1B वीजा पाने वालों में 70 फीसद से ज्यादा भारतीय हैं. कई विश्लेषकों और CSOH के सर्वे में पाया गया कि भारतीयों के खिलाफ नाराजगी की एक बड़ी वजह यह आरोप था कि भारतीय अमेरिकी लोगों की नौकरियां छीन रहे हैं.
यह नाराजगी धीरे-धीरे विदेशियों के प्रति नफरत और आर्थिक असुरक्षा से जुड़ गई. इसके बाद भारतीयों के लिए वीजा पर रोक, वीजा न देने, उन्हें देश से निकालने और उनकी नागरिकता रद्द करने जैसी मांगें भी सामने आने लगीं. अगस्त 2025 में फ्लोरिडा में भारतीय मूल के ट्रक ड्राइवर हरजिंदर सिंह की एक मिनीवैन से टक्कर में तीन लोगों की मौत के बाद सिखों और अन्य भारतीयों के खिलाफ नफरत और बढ़ गई.
ट्रंप की ओर से भारत पर लगाए गए टैरिफ ने भी स्थिति को खराब किया. उनके डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने अगस्त 2025 में फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में भारत पर इमिग्रेशन नियमों के मामले में 'बहुत ज्यादा धोखाधड़ी' करने का आरोप लगाया था.
भारतीयों की सफलता से चिढ़ रहे हैं लोग
भारतीयों के खिलाफ नफरत की एक वजह अमेरिका में उनकी आर्थिक और सामाजिक सफलता भी मानी जा रही है.
भारतीय-अमेरिकी अमेरिका में सबसे ज्यादा कमाई करने वाले और सबसे ज्यादा शिक्षित जातीय समूहों में हैं. स्वास्थ्य सेवा, होटल और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में उनकी मजबूत मौजूदगी है. टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारतीयों की सफलता और अब राजनीति में बढ़ते प्रभाव ने भी कुछ लोगों में नाराजगी पैदा की है.
टेक्सास हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए डेमोक्रेट उम्मीदवार संदीप श्रीवास्तव को भी सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना करना पड़ा. एक रूढ़िवादी कार्यकर्ता ने उनके बोलने के लहजे का मजाक उड़ाया. आलोचकों ने इसे नस्लवादी और प्रवासियों के खिलाफ नफरत से भरा बताया.
जेडी वेंस की पत्नी उषा और विवेक रामास्वामी के खिलाफ हुए हमले दिखाते हैं कि रिपब्लिकन पार्टी में एक प्रमुख चेहरा होना भी आपको नस्लवाद से नहीं बचाता. यहां तक कि कश पटेल जैसे ट्रंप के करीबी लोगों को भी इसका सामना करना पड़ा है.
एक अन्य भारतीय-अमेरिकी दिनेश डिसूजा, जो लंबे समय से रूढ़िवादी विचारों के समर्थक और ट्रंप समर्थक रहे हैं. उन्होंने भी विविधता की आलोचना की है और इमिग्रेशन विरोधी नीतियों का समर्थन किया है. लेकिन अब उन्हें भी कुछ लोग 'भारत वापस जाओ' कह रहे हैं.
विडंबना यह है कि इनमें से कई लोगों ने ट्रंप को चुनाव जिताने में मदद की, लेकिन ट्रंप ने अपने समर्थकों की ओर से की जाने वाली नस्लीय गालियों की खुलकर निंदा नहीं की. भारतीयों, अमेरिका के बहुसांस्कृतिक समाज और यहां तक कि ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के लिए शायद सबसे बड़ी चिंता निक फ्यूएंटेस जैसे लोग हैं. उसने नफरत को सामान्य बनाने की कोशिश की है. वह Groyper आंदोलन का नेता है. 'Groyper' इंटरनेट पर इस्तेमाल होने वाले मेढक वाले 'Pepe' मीम का एक नस्लवादी रूप है. Groyper आंदोलन के समर्थक और ट्रंप के 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन'( MAGA) समर्थक भारतीयों और दूसरे अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ नफरत फैलाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं.
डोनाल्ड ट्रंप की चुप्पी से उठते सवाल
फ्यूएंटेस ने यहूदियों के खिलाफ भी बेहद आक्रामक और नफरत भरी बातें कही हैं. इसलिए उसकी बढ़ती लोकप्रियता अमेरिका और इजरायल दोनों के लिए चिंता का विषय हो सकती है. फ्यूएंटेस की रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी कुछ समर्थक आधार बढ़ने की बात कही जा रही है. ट्रंप ने अब तक फ्यूएंटेस की स्पष्ट रूप से निंदा नहीं की है, जबकि वह अश्वेतों, हिंदुओं, मुसलमानों और यहूदियों के खिलाफ लगातार नस्लवादी टिप्पणियां करता रहा है.
2022 में ट्रंप ने फ्लोरिडा स्थित अपने घर में फ्यूएंटेस के लिए डिनर भी आयोजित किया था. पिछले साल जब रूढ़िवादी कमेंटेटर टकर कार्लसन ने फ्यूएंटेस का इंटरव्यू किया, तब भी ट्रंप ने कार्लसन की आलोचना करने से इनकार कर दिया. इससे फ्यूएंटेस को अपने नस्लवादी विचारों को बड़े मंच पर रखने का मौका मिला.
जेडी वेंस खुद को भविष्य में ट्रंप के उत्तराधिकारी के रूप में देखते हैं. इसलिए फ्यूएंटेस का बढ़ता राजनीतिक प्रभाव उनके लिए भी चुनौती बन सकता है. वेंस ने अपनी पत्नी और बच्चों के खिलाफ फ्यूएंटेस की नस्लीय गालियों की कड़ी आलोचना की है. लेकिन उन्होंने फ्यूएंटेस के समर्थकों और दूसरे दक्षिणपंथी कट्टरपंथियों की ओर से फैलाए जा रहे नस्लवाद के खिलाफ उतनी ही मजबूती से आवाज नहीं उठाई है.
(डिस्क्लेमर: लेखक बीबीसी और एसोसिएटेड प्रेस (एपी) के पूर्व संपादक हैं. वो लंदन में रहते हैं. इस लेख में व्यक्त किए गए विचार निजी हैं, उनसे एनडीटीवी का सहमत या असहमत होना जरूरी नहीं है. )
-
Opinion: भारत को बार बार इतने हल्के में क्यों ले रहा है अमेरिका, 'ब्रेकअप' आसान होगा या नहीं?
क्या अमेरिका में लोकल टैलेंट पूरी तरह से भारतीय टैलेंट की जगह ले सकता है? US भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर बनाने में सबसे आगे क्यों है.
-
12 दिन से भूख हड़ताल पर JNU छात्र; जेंडर न्यूट्रल वॉशरूम, ट्रांसजेंडर्स के लिए हॉस्टल सहित NTA से दूरी भी है डिमांड लिस्ट में
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में छात्रों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी है. 3 अक्टूबर से JNUSU प्रेसिडेंट अदिति मिश्रा सहित 17 स्टूडेंट्स 'साबरमती टी पॉइंट' पर कई मांगों के साथ प्रोटेस्ट कर रहे हैं.
-
रनवे भी नहीं, कामचलाऊ प्लेन... जब वायुसेना ने कश्मीर बचाने के लिए हथियारों से नहीं, जिगर से लड़ा था युद्ध
8 अक्टूबर 1932 को भारतीय वायुसेना का गठन हुआ था. आज 94 साल हो गए हैं. ऐसे में जानते हैं वायुसेना के उस ऑपरेशन के बारे में जिसने कश्मीर को बचाया.
-
40 साल पहले जिस जुनून को दुनिया ने कहा 'पागलपन', आज उसी पर फ्रांसिस हैल्जेन को मिला फिजिक्स का नोबेल
फिजिक्स का नोबेल 2026 प्रोफेसर फ्रांसिस हैल्जेन को ब्रह्मांडीय न्यूट्रिनो की खोज और आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जरवेट्री की स्थापना में अहम योगदान के लिए मिला है. इस खोज ने ब्रह्मांड को समझने का नया रास्ता खोला है.
-
AMU में भी 'जंतर-मंतर', 17 दिन से भूख हड़ताल पर क्यों बैठे हैं यासिर, जबरन हटाने की कोशिश पर रात भर हंगामा
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में 21 सितंबर से छात्रों का प्रदर्शन 17वें दिन भी जारी है. उर्दू विभाग के यासिर फहद अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं और 18 छात्रों पर FIR दर्ज हुई है.
-
जब पाकिस्तान में घुसा भारतीय खुफिया जेट, स्पीड ऐसी कि कुछ कर न सकी पाक वायुसेना- पायलट ने पहली बार सुनाई कहानी
भारतीय वायु सेना के मिग 25 की कहानी जिसने पाकिस्तान और चीन की सीमा में घुसकर वहां से तय की गई जगहों की तस्वीरें लेकर आया था. लेकिन पड़ोसी देश उसका बाल भी बांका नहीं कर पाए थे.
-
बिखरा मलबा, अधूरी टूटी बिल्डिंग, छात्र गायब और दुकानदारों का धंधा चौपट... हादसे के एक महीने बाद ऐसा है सत्य निकेतन - ग्राउंड रिपोर्ट
दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला PG इमारत गिरने से हुई 7 मौतों के एक महीने बाद भी मौके पर मलबा पड़ा है, आधी टूटी इमारत से खतरा बरकरार है और 50 फीसदी छात्र इलाका छोड़ चुके हैं.
-
KVS-NVS शिक्षक भर्ती: जाति प्रमाण पत्र पर लगी शर्तों से अधर में लटका सैकड़ों का भविष्य, अभ्यर्थियों ने सुनाई दर्द भरी दास्तां
नवोदय और केंद्रीय विद्यालयों के 15 हजार पदों की शिक्षक भर्ती में OBC-NCL सर्टिफिकेट के लिए जारी की गई शर्त से हजारों अभ्यर्थियों के सामने चुनौती खड़ी हो गई है.
-
अगर चुनाव फिक्स हैं तो कांग्रेस बहिष्कार क्यों नहीं करती? राहुल के 'ध्यान भटकाने' वाले जवाब में कितना लॉजिक
चुनाव बॉयकॉट की जबरदस्त मांग 'कॉकरोच जनता पार्टी' की तरफ से आई है. लेकिन क्या बॉयकॉट से कोई फायदा होता है? रिसर्च, उदाहरण और एक्सपर्ट्स का एनालिसिस हमें इस बारे में क्या बताते हैं, आइए जानते हैं.
-
हवा में टेरर, भारतीय पायलट बना फाइटर… समझिए Flydubai की फ्लाइट में क्या-क्या हुआ था?
Flydubai की फ्लाइट FZ1073 में एक को-पायलट ने भारतीय कैप्टन पर चाकू से हमला कर दिया. वह प्लेन को अपने कब्जे में लेना चाहता था, ताकि उसे क्रैश कर सके.