6.5 लाख सैनिकों की मौत, 16 हजार+ नागरिक मारे गए; रूस-यूक्रेन युद्ध का हिसाब कब मांगेगी दुनिया?
आज आपको आसान शब्दों में बताते हैं कि आखिर रूस और यूक्रेन की जंग शुरू क्यों हुई थी, इस युद्ध में रूस ने क्या गंवाया है, यूक्रेन को कितना नुकसान हुआ है और इस जंग की वजह से दोनों देशों के सामने कौन-कौन सी चुनौतियां खड़ी हुई हैं.
रूस और यूक्रेन की जंग 24 फरवरी 2022 को शुरू हुई थी. यानी अब इस युद्ध को शुरू हुए 1,636 दिन पूरे हो चुके हैं. लेकिन इस युद्ध का अंत कब होगा, किसकी जीत होगी और कौन हारेगा, इन सवालों के जवाब अभी तक नहीं मिले हैं. कुछ जवाब जो मिले हैं, वे सिर्फ तबाही की तस्वीर दिखाते हैं. आंकड़े बताते हैं कि इस एक जंग ने रूस और यूक्रेन, दोनों को भारी नुकसान पहुंचाया है. दुनिया पर भी कई तरह के आर्थिक संकट आए हैं.
पिछले कुछ समय से ईरान-इजरायल जंग और अमेरिका की ईरान के साथ तनातनी के चलते रूस-यूक्रेन युद्ध की चर्चा थोड़ी कम जरूर हुई थी, लेकिन पिछले साढ़े चार साल से जारी यह जंग पिछले कुछ दिनों में एक बार फिर ज्यादा विस्फोटक हो गई है. आम नागरिकों के मारे जाने की संख्या भी बढ़ी है.
आज आपको आसान शब्दों में बताते हैं कि आखिर रूस और यूक्रेन की जंग शुरू क्यों हुई थी, इस युद्ध में रूस ने क्या गंवाया है, यूक्रेन को कितना नुकसान हुआ है और इस जंग की वजह से दोनों देशों के सामने कौन-कौन सी चुनौतियां खड़ी हुई हैं.
रूस ने यूक्रेन पर हमला क्यों किया?
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दो बड़े लक्ष्यों के साथ यूक्रेन पर हमला किया था. उनका पहला लक्ष्य यूक्रेन के बड़े हिस्से पर कब्जा करके उसे रूस में मिलाना था. दूसरा रास्ता यह था कि यूक्रेन की राजधानी कीव में रूस के समर्थन वाली सरकार बनाई जाए.
इसके अलावा रूस चाहता था कि NATO की ताकत और उसकी विश्वसनीयता कमजोर हो, पूर्वी यूरोप में रूस का प्रभाव बढ़े और यूरोपीय संघ कमजोर होता जाए.
पुतिन तो यहां तक मानते हैं कि यूक्रेन रूस के पुराने साम्राज्य का हिस्सा रहा है. वह रूस और यूक्रेन को इतिहास, अर्थव्यवस्था, संस्कृति और धर्म के आधार पर एक-दूसरे से जुड़ा हुआ मानते हैं. अब इसी वजह से रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था.

सोर्स: रूस का यूक्रेन पर हमला, AP
रूस यूक्रेन में कहां-कहां हमला कर रहा है?
CSIS की रिपोर्ट बताती है कि रूस अपनी रणनीति के तहत पिछले कुछ महीनों से उत्तरी सुमी, पूर्वी खारकीव, उत्तर-पश्चिमी डोनेत्स्क, जापोरिज्जिया के उत्तरी हिस्से और खेरसॉन के उत्तरी हिस्से में लगातार हमले कर रहा है.
रूस की एक रणनीति स्पष्ट दिखाई देती है. वह सिर्फ यूक्रेन के सैनिकों पर हमला नहीं कर रहा, बल्कि यूक्रेन के सैन्य और नागरिक ठिकानों पर भी ड्रोन के जरिए ताबड़तोड़ हमले कर रहा है.
इस समय रूस बैलिस्टिक, क्रूज और हाइपरसोनिक मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहा है. रूस जानता है कि यूक्रेन की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी सीमित एयर डिफेंस ताकत है. मिसाइलों को रोकने वाली प्रणालियां उसके पास सीमित हैं और रूस इसी कमजोरी का फायदा उठा रहा है.
पिछले कुछ सालों में रूस ने अपनी ड्रोन क्षमताएं भी बढ़ाई हैं. इस युद्ध में रूस ने Rubikon यूनिट का काफी इस्तेमाल किया है. यह ड्रोन यूनिट सिर्फ यूक्रेनी ड्रोन ऑपरेटरों को निशाना नहीं बनाती, बल्कि पीछे मौजूद सैन्य ठिकानों को भी नष्ट करती है जिससे सप्लाई लाइन प्रभावित होती है.
रूस की रणनीति क्या है?
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि रूस पिछले साढ़े चार साल से एक रणनीति के तहत यूक्रेन पर हमला कर रहा है. वह अपने सैनिकों के छोटे-छोटे दलों को आगे भेजता है. उनके साथ FPV ड्रोन, तोपें, ग्लाइड बम और दूसरे दूर से हमला करने वाले हथियार होते हैं.
रूस सबसे पहले कम ट्रेनिंग वाले अपने छोटे समूहों को आगे भेजता है. ये रूसी सैनिक सबसे पहले यूक्रेन की स्थिति का पता लगाते हैं. कई बार इन सैनिकों का काम यूक्रेन की सेना से गोली चलवाना भी होता है, ताकि यह पता चल सके कि यूक्रेन के सैनिकों के ठिकाने कहां हैं.
जैसे ही यूक्रेनी सैनिकों की जगह के बारे में जानकारी मिलती है, रूस तोपों और ड्रोन से उन पर हमला कर देता है. FPV ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जाता है. जानकार मानते हैं कि रूस की यही रणनीति उसके ज्यादा सैनिकों के मारे जाने की बड़ी वजह बन चुकी है.
रूस के पास यूक्रेन की कितनी जमीन है?
पिछले साढ़े चार साल में रूस ने कई मौकों पर दावा किया है कि उसने यूक्रेन की बड़ी जमीन पर कब्जा कर लिया है. लेकिन CSIS की रिपोर्ट और दूसरे आंकड़ों से पता चलता है कि 2026 आते-आते रूस के कब्जे वाली जमीन अब कम हुई है.

सोर्स: रूस का यूक्रेन पर हमला, AP
एक्सपर्ट्स के मुताबिक रूस करीब 400 वर्ग किलोमीटर जमीन गंवा चुका है. इस समय रूस के पास यूक्रेन की करीब 1.18 लाख वर्ग किलोमीटर जमीन है, जो यूक्रेन के कुल क्षेत्र का करीब 20 फीसदी है.
इनमें से करीब 75,000 वर्ग किलोमीटर जमीन पर रूस ने फरवरी 2022 के हमले के बाद कब्जा किया था. यानी यूक्रेन के करीब 12 फीसदी हिस्से पर रूस ने युद्ध शुरू होने के बाद कब्जा किया. लेकिन 2026 में पहली बार रूस के कब्जे वाला क्षेत्र बढ़ने के बजाय घटा है.

रूस की आगे बढ़ने की रफ्तार कितनी धीमी हुई?
जैसे-जैसे जंग आगे बढ़ी है, रूसी सेना के आगे बढ़ने की रफ्तार काफी धीमी हो चुकी है. मार्च 2022 में रूस के हमले इतने तेज थे कि पांच हफ्ते से भी कम समय में उसने करीब 1.15 लाख वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्जा कर लिया था.
लेकिन यूक्रेन ने अप्रैल 2022 तक 35,000 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा जमीन वापस ले ली थी. वहीं नवंबर 2022 तक यूक्रेन करीब 75,000 वर्ग किलोमीटर जमीन वापस ले चुका था.
रूस को इस युद्ध से अब तक कितना नुकसान हुआ?
इस युद्ध में रूस को कितना नुकसान उठाना पड़ा है, इसे लेकर कोई एक स्पष्ट आंकड़ा मौजूद नहीं है. रूस की सरकार लगातार अपने आंकड़ों को सार्वजनिक करने से बचती रही है. इस बीच CSIS की ताजा रिपोर्ट कुछ आंकड़े जरूर पेश करती है.
रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2022 से जून 2026 के बीच रूस की करीब 14 लाख सैनिक casualties हुई हैं. Casualties में मारे गए, घायल और लापता सैनिक शामिल होते हैं. अगर सिर्फ मारे गए सैनिकों की बात करें तो यह आंकड़ा करीब 4 लाख से 4.5 लाख के बीच है.
रूस को लेकर एक और ट्रेंड काफी चिंताजनक है. रूस में हर महीने करीब 30,000 से 34,000 casualties हो रही हैं. लेकिन अगर नए सैनिकों की भर्ती का आंकड़ा देखें तो वह प्रति महीने करीब 27,000 है. इसका मतलब है कि जितने रूसी सैनिक हर महीने भर्ती हो रहे हैं, उससे ज्यादा सैनिक हर महीने युद्ध में हताहत हो रहे हैं.
रूस के लिए यह नुकसान कितना बड़ा है?
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए चिंता की बात यह भी है कि रूस ने अब तक जितनी भी बड़ी जंग लड़ी हैं, उनकी तुलना में इस बार उसे बहुत ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है.
1980 के दशक में अफगानिस्तान युद्ध के दौरान जितने सोवियत सैनिक मारे गए थे, मौजूदा युद्ध में रूसी सैनिकों की मौत उससे 28 गुना से ज्यादा है. इसी तरह रूस के पहले और दूसरे चेचन युद्ध में जितने सैनिक मारे गए थे, उनकी तुलना में वर्तमान युद्ध में करीब 18 गुना ज्यादा सैनिक मारे गए हैं.
अगर द्वितीय विश्व युद्ध के बाद रूस और सोवियत संघ के सभी युद्धों को मिलाकर देखें तो भी मौजूदा युद्ध में सैनिकों की मौत करीब 9 गुना ज्यादा है.
रूस को कितना आर्थिक नुकसान हो रहा है?
रूस को इस युद्ध की भारी आर्थिक कीमत भी चुकानी पड़ रही है. रूस के सेंट्रल बैंक के आंकड़े बताते हैं कि 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से रूस में महंगाई औसतन 8.6 फीसदी रही है. 2021 में यह 8.4 फीसदी थी.
पहली नजर में महंगाई में बहुत बड़ा अंतर नहीं दिखता. लेकिन सेंट्रल बैंक का अनुमान है कि 2026 में रूस में महंगाई 6.2 फीसदी और 2027 में 4.6 फीसदी रह सकती है.
रूस के लिए चिंता की बात यह है कि उसकी आर्थिक ग्रोथ रेट अब काफी धीमी हो चुकी है. 2021 में रूस की अर्थव्यवस्था 5.9 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रही थी. लेकिन 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से औसत आर्थिक ग्रोथ सिर्फ 2.2 फीसदी रही है. 2026 में ग्रोथ सिर्फ 0.6 फीसदी और 2027 में 1.3 फीसदी रहने का अनुमान है.
रूस में बेरोजगारी कम क्यों है?
रूस में फिलहाल बेरोजगारी ज्यादा नहीं है. 2026 में इसके 2.2 फीसदी और 2027 में 2.5 फीसदी रहने का अनुमान है. लेकिन जानकार बताते हैं कि बेरोजगारी की यह कम दर पूरी तरह अच्छी खबर नहीं है.
युद्ध शुरू होने के बाद रूस में काम करने वाली आबादी कम हो गई है. लाखों कामकाजी उम्र के पुरुष सेना में शामिल हो गए हैं और कुछ लोग देश छोड़कर चले गए हैं. यानी रूस में बेरोजगारी कम होने की एक बड़ी वजह यह भी है कि वहां कामगारों की कमी हो गई है.
रूस का व्यापार मुनाफा भी घटा
आंकड़े बताते हैं कि रूस का व्यापार अधिशेष यानी दूसरे देशों को बेचने से होने वाला अतिरिक्त पैसा भी काफी कम हो चुका है. 2021 में रूस का व्यापार अधिशेष 173 अरब डॉलर था. 2025 में यह घटकर 68 अरब डॉलर रह गया. 2027 में इसके और घटकर करीब 53 अरब डॉलर रहने का अनुमान है.
रूस में ब्याज दर क्यों बढ़ी?
इस युद्ध की वजह से रूस के आम लोगों के लिए कर्ज लेना भी महंगा हुआ है. रूस के सेंट्रल बैंक ने महंगाई को काबू में करने के लिए ब्याज दर काफी बढ़ा दी. 2021 में रूस की मुख्य ब्याज दर 5.7 फीसदी थी. 2025 में यह बढ़कर 19.2 फीसदी हो गई. इसका सीधा मतलब है कि लोगों और कंपनियों के लिए कर्ज लेना महंगा हो गया. इससे महंगाई को कुछ हद तक रोकने में मदद मिल सकती है, लेकिन अर्थव्यवस्था की रफ्तार भी धीमी पड़ती है.
रूस का सुरक्षित पैसा भी कम हो रहा है
रूस की अर्थव्यवस्था को लेकर Kiel Institute की रिपोर्ट भी चौंकाने वाले आंकड़े देती है. रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के समय रूस के Sovereign Wealth Fund में आसानी से इस्तेमाल किए जा सकने वाले पैसे की मात्रा GDP की 6.5 फीसदी थी. अप्रैल 2026 तक यह घटकर सिर्फ 1.8 फीसदी रह गई.
इसका मतलब है कि युद्ध और दूसरे खर्चों के लिए रूस जिन सुरक्षित पैसों का इस्तेमाल करता है, वह तेजी से कम होता जा रहा है.
रूस के लिए चिंता की बात यह भी है कि 2026 के शुरुआती तीन महीनों में ही उसका बजट घाटा पूरे साल के लिए तय लक्ष्य से ज्यादा हो चुका है.
यूक्रेन को कितना नुकसान हुआ?
रूस को कितना नुकसान हुआ, कितनी मौतें हुईं और उसे कौन-कौन सी आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, यह हम जान चुके हैं. अब आपको बताते हैं कि इस जंग की वजह से यूक्रेन को कितना नुकसान हुआ है और उसकी वर्तमान स्थिति क्या है.
यूक्रेन को लेकर इस जंग की शुरुआत में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दावा किया था कि वह 72 घंटे के अंदर यूक्रेन को घुटनों पर ला देंगे. लेकिन साढ़े चार साल से ज्यादा समय हो चुका है और यूक्रेन अभी भी रूस के खिलाफ युद्ध लड़ रहा है. कई मोर्चों पर वह रूस को भारी नुकसान भी दे रहा है.
यूक्रेन रूस के अंदर तक हमला कर रहा है
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यूक्रेन रूस के काफी अंदर तक जाकर हमले कर रहा है. उसने सेंट पीटर्सबर्ग और मॉस्को जैसे शहरों तक हमले किए हैं. कुछ रिपोर्ट्स तो यहां तक दावा करती हैं कि यूक्रेन ने Ukrainka Air Base जैसे ठिकानों को भी निशाना बनाया है. यह जगह कीव से 6,000 किलोमीटर से भी ज्यादा दूर है.
इसी तरह यूक्रेन के निशाने पर कालुगा जैसे इलाके भी हैं, जो यूक्रेन से 30 से 300 किलोमीटर की दूरी वाले क्षेत्र में आते हैं. पिछले कुछ समय से यूक्रेन रूस के कब्जे वाले क्रीमिया में भी लगातार हमले कर रहा है.
इस वजह से रूस को काफी नुकसान हुआ है. कुछ इलाकों में पेट्रोल की कमी हुई है, रूस की नौसेना की युद्ध क्षमता कम हुई है और उसकी सप्लाई व्यवस्था को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

यूक्रेन का रूस पर हमला, AP
यूक्रेन के लिए AI ड्रोन भी मददगार
यूक्रेन को इस युद्ध में अमेरिका से जुड़े ड्रोन प्रोजेक्ट से भी मदद मिल रही है. एक उदाहरण Hornet ड्रोन है. इसकी कीमत करीब 6,000 डॉलर है और यह करीब 150 किलोमीटर तक हमला कर सकता है. यह दिन और रात में लाइव वीडियो देख सकता है और AI की मदद से रूसी लक्ष्यों की पहचान कर सकता है. इसकी खास बात यह है कि इसे हर समय सैटेलाइट कनेक्शन की जरूरत नहीं पड़ती.
यूक्रेन को कितना नुकसान हुआ है?
फरवरी 2022 से जून 2026 तक के CSIS के आंकड़ों के मुताबिक, यूक्रेन में रूस के साथ जंग की वजह से 5.25 लाख से 6.25 लाख casualties हुई हैं. इनमें करीब 1.25 लाख से 1.5 लाख सैनिकों की मौत का अनुमान है.
कुछ रिपोर्ट्स में यह संख्या ज्यादा होने की बात भी कही गई है, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि रूस को जो नुकसान हो रहा है, उसकी तुलना में यूक्रेन का नुकसान कम है.
रूस और यूक्रेन की casualties का अनुपात युद्ध के ज्यादातर समय *2:1 से 3:1* रहा है. इसका सीधा मतलब है कि हर एक यूक्रेनी casualty के बदले करीब 2 से 3 रूसी casualties हुई हैं. लेकिन 2026 की पहली छमाही में यह अंतर बढ़कर करीब 8:1 हो गया.

यूक्रेन की रक्षा रणनीति क्या है?
इस युद्ध में यूक्रेन अब तक काफी हद तक टिका हुआ है, क्योंकि उसने एक मजबूत सुरक्षा व्यवस्था खड़ी की है. वह कई जगहों पर बारूदी सुरंगों,तोपों,ड्रोन,खाइयों, दूसरे सुरक्षा अवरोधों का इस्तेमाल कर रहा है.
पूर्वी मोर्चे पर उसने ड्रोन की संख्या भी काफी बढ़ा दी है.जानकारों के मुताबिक करीब 20 से 40 किलोमीटर का पूरा इलाका रूसी सैनिकों के लिए बेहद खतरनाक यानी Kill Zone बन चुका है. इस इलाके में रूसी सैनिकों का आगे बढ़ना बेहद मुश्किल है.
यूक्रेन ने जवाबी हमला भी किया
इस साल यूक्रेन ने कई मोर्चों पर बड़ी जवाबी कार्रवाई की है. 2026 की पहली छमाही में यूक्रेन ने कई इलाकों में हमला किया. इनमें सबसे बड़ा हमला Oleksandrivka इलाके में हुआ. यह इलाका Dnipropetrovsk और Zaporizhzhia की सीमा के पास पड़ता है.

यूक्रेन ने रूस से कितनी जमीन वापस ली?
CSIS की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन ने Oleksandrivka और Huliaipole के पास करीब 400 वर्ग किलोमीटर जमीन वापस ली है. इसी तरह अप्रैल और मई में भी यूक्रेन ने कई इलाकों में जवाबी हमले किए. लेकिन जानकार मानते हैं कि क्रीमिया और डोनबास के इलाकों को वापस लेना यूक्रेन के लिए बड़ी चुनौती रहने वाला है.
यूक्रेन को कितना नुकसान हो चुका है?
रूस के साथ जारी साढ़े चार साल से ज्यादा लंबे युद्ध की वजह से यूक्रेन को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है.
वर्ल्ड बैंक, यूरोपीय संघ और यूएन की 2022 से 2025 तक के नुकसान पर आधारित रिपोर्ट बताती है कि यूक्रेन को सीधे तौर पर 195 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान हो चुका है.
पिछली रिपोर्ट में यह आंकड़ा 176 अरब डॉलर था. यानी सिर्फ एक साल में सीधे नुकसान का आंकड़ा करीब 19 अरब डॉलर बढ़ गया. रिपोर्ट के मुताबिक, अगर यूक्रेन को दोबारा अपने पैरों पर खड़ा होना है तो उसे परिवहन, ऊर्जा, घर, व्यापार और उद्योग, कृषि जैसे क्षेत्रों में भारी आर्थिक मदद की जरूरत पड़ेगी.
उदाहरण के लिए अगर उसे अपने परिवहन सिस्टम को दोबारा दुरुस्त करना है तो 96 अरब डॉलर से ज्यादा की जरूरत होगी. ऊर्जा क्षेत्र को फिर से दुरुस्त करने के लिए करीब 91 अरब डॉलर चाहिए. व्यापार और उद्योग को सामान्य करने के लिए करीब 63 अरब डॉलर और कृषि को पटरी पर लाने के लिए 55 अरब डॉलर से ज्यादा की जरूरत होगी.
इसके अलावा बम, बारूदी सुरंग और युद्ध का मलबा हटाने में भी काफी खर्च होने का अनुमान है. यूक्रेन के लिए चिंता की बात यह भी है कि उसके करीब 14 फीसदी घर क्षतिग्रस्त या पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं, जिससे 30 लाख से ज्यादा परिवार प्रभावित हुए हैं.
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