मुनीर की मेहरबानी से फंस गया पाकिस्तान, न उगलते बन रहा न निगलते बन रहा अब्राहम समझौता
Pakistan on Abraham Accords: ये पाकिस्तानी फील्ड मार्शल असीम मुनीर की ही देन है कि पाकिस्तान खुद के घरेलू मोर्चे पर स्थिति सुधारने की इस वैश्चिक चक्रव्यूह में फंस गया है. अब्राहम अकॉर्ड्स पर पाकिस्तान का स्टैंड हमेशा एक जैसा रहा है.
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'सतलुज' की रियल कहानी: जसवंत सिंह खालड़ा केस और एक पत्नी की दशकों लंबी लड़ाई
दिलजीत दोसांझ की सतलुज फिल्म से जुड़े विवाद ने एक बार फिर मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा और उनकी पत्नी की दशकों लंबी लड़ाई की याद दिला दी... कैसे पंजाब पुलिस ने उनका अपहरण किया और फिर वे कभी नहीं दिखे.
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Opinion: भारत-नेपाल कभी एक दूसरे के विरोधी नहीं रहे... अब सोचना चाहिए आखिर गलती कहां हो रही थी
पोखरा और भैरहवा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों की माली हालत गवाह है कि भारत के सहयोग के बिना नेपाल के बड़े पूंजी निवेश अधूरे रहेंगे. इस मामले में नई दिल्ली को और अधिक उदारता और लचीलापन दिखाने की जरूरत है.
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Opinion: मामूली कार्यकर्ता से CM की कुर्सी तक...20 साल के उतार-चढ़ाव के बाद क्यों सियासी 'मायके' लौटे रेवंत रेड्डी
रेवंत विरोधियों और पत्रकारों पर उनके तीखे हमले हमेशा चर्चा में रहते हैं. लेकिन आने वाले दिन उनके लिए मुश्किल भरे होंगे.
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Opinion: सिंधु जल संधि को लेकर मुनीर-शहबाज बेचैन, पाकिस्तान को मान लेना चाहिए कि दाल अब गलने वाली नहीं
पाकिस्तान के गुस्से और बौखलाहट से भारत पर कोई असर नहीं पड़ा है और न ही संधि पर अपने स्टैंड पर दोबारा सोचा है. अगर इस्लामाबाद पानी पाने के लिए धमकी देने की कोशिश कर रहा है, तो वह पहले ही फेल हो चुका है.
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AI का सटीक लेखन क्यों उतना सटीक नहीं? सबमें एक जैसा असर, सब एक से आते नजर
दरअसल AI लेखन खराब नहीं है, बल्कि यह जरूरत से ज्यादा परफेक्ट है. AI लेखन सपाट है, कोई फंबल नहीं, इसमें कोई अहसास नहीं. जब कोई शख्स खुद से सोच विचार कर लिखता है तो अपनी तमाम कमियों खूबियों के साथ ये मानवीय बन जाता है.
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ग्राउंड रिपोर्ट: बाइक टैक्सी के हेलमेट का रियलिटी चेक, ऐप पर सेफ्टी के दावे, सिर पर 'प्लास्टिक का कटोरा'
Ola Uber Bike Taxi Safety Check: सड़कों पर दौड़ने वाली ओला उबर बाइक टैक्सियों में यात्रियों को सुरक्षा कवच के नाम पर बेहद घटिया और जानलेवा प्लास्टिक-थर्माकॉल का हेलमेट थमाया जा रहा है.
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कैसे आग के गोले पर बैठे हुए हैं दिल्ली के कुछ पॉपुलर मार्केट, कैसे की जाती है नियमों की अनदेखी
दिल्ली में आग लगने की घटनाएं अब आम होती जा रही है. इनमें अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है. साल 2019 से तीन जून 2026 तक इन घटनाओं में 543 लोगों की मौत हो चुकी है. दिल्ली के कुछ बजारों और वहां आग से निपटने की तैयारी के बारे में बता रही हैं शताब्दी चौधरी.
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Opinion| ईरान के सामने ट्रंप का सरेंडर? 50 बरस में अमेरिका के लिए क्यों है ये सबसे बड़ी बेइज्जती
हाल के US इतिहास में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है कि किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान डील जैसी अपमानजनक शर्तें मानी हों.
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NCR में घर का सपना? दिल्ली-नोएडा से अलग मेरठ, रेवाड़ी, रोहतक, पलवल... सस्ते में शानदार मकान, सफर भी आसान
Delhi-NCR Plan and Your Dream Home: कहां आप दिल्ली-नोएडा-गुरुग्राम के चक्कर में पड़े हैं. कई सालों से अपना घर लेने का सपना देख रहे हैं... फ्लैट्स, मकान, सब बजट से बाहर जा रहे हैं तो थोड़ा आसपास के शहर घूम आइए. नहीं समझे? ये स्टोरी पढ़िए, सबकुछ समझ आ जाएगा.
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गाय 'वोट' देती है! मनुष्य सामाजिक प्राणी है, गाय राजनीतिक प्राणी कैसे बन गई?
भारत में सदियों से गाय का सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक महत्व रहा है. 19वीं सदी में गोरक्षा आंदोलनों से लेकर आज गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग तक, यह मुद्दा लगातार भारतीय राजनीति और समाज के केंद्र में बना हुआ है.