प्राइम टाइम: क्या मोदी सरकार ने अपनी ज़िम्मेदारियां निभाईं?

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  • प्रकाशित: मार्च 11, 2019
इन पांच सालों में काफी कुछ बदल गया. जो सबसे ज़्यादा बदला वो सवाल पूछने की व्यवस्था. इस व्यवस्था की बुनियाद जाने अनजाने में 1975 में दीवार फिल्म में सलीम जावेद ने डाली थी. जब अमिताभ अपने दारोगा भाई शशि कपूर को कहते हैं कि जाओ पहले उस आदमी का साइन लेकर आओ. मेरी राय में यही लाइन अब लाइन में बदल गई है कि जाओ पहले यह पूछ कर आओ कि 70 सालों में क्यों नहीं हुआ. यह संवाद इस बात पर खत्म होता है कि उसके बाद मेरे भाई तुम जिस कागज पर कहोगे साइन कर दूंगा, लेकिन दारोगा भाई ने साफ साफ कह दिया कि दूसरों के जुर्म साबित करने से यह सच्चाई नहीं बदल सकती है कि तुम भी एक मुजरिम है. यह सच्चाई तुम्हारे और मेरे बीच एक दीवार है भाई. अच्छी बात है कि अभी तक किसी ने नहीं कहा कि स्मार्ट फोन 70 साल पहले क्यों नहीं आया. एनि वे. हर दौर की कुछ पहचान होती है. इसमें एक और नगीना जोड़ा है हमारे प्रधानमंत्री मोदी ने. गुजराती में उनके भाषण के इस अंश का पहले अनुवाद पढूगा और फिर उनका बयान सुनाऊंगा.

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