"गयाजी की मोक्ष भूमि पर रूस से आई पाँच विदेशी महिलाओं ने सनातनी परंपरा के अनुसार साड़ी पहनकर अपने पूर्वजों का पिंडदान किया। इस्कॉन मंदिर से प्रेरित होकर भारत पहुंचीं इन महिलाओं की अटूट श्रद्धा देखकर देवघाट पर मौजूद हर आंख नम हो गई।"