टीवी सीरियल में क्यों दिखाया जाता था एक ही सीन 3 बार? एकता कपूर ने आखिर कर ही दिया खुलासा, ड्रामा नहीं ये थी वजह

अगर आपने कभी पुराने टीवी सीरियल्स गौर से देखे हैं, तो एक बात जरूर नोटिस की होगी. कोई शॉकिंग डायलॉग आया नहीं कि वही सीन बार-बार रिपीट होने लगता था. कभी क्लोजअप, कभी रिएक्शन, कभी बैकग्राउंड म्यूजिक…और ये सिलसिला तीन बार तक चलता था. ऐसा क्यों होता था अब इसका राज खुल चुका है.

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एकता कपूर ने किया खुलासा

अगर आपने कभी पुराने टीवी सीरियल्स गौर से देखे हैं, तो एक बात जरूर नोटिस की होगी. कोई शॉकिंग डायलॉग आया नहीं कि वही सीन बार-बार रिपीट होने लगता था. कभी क्लोजअप, कभी रिएक्शन, कभी बैकग्राउंड म्यूजिक…और ये सिलसिला तीन बार तक चलता था. सालों तक लोग इसका मजाक उड़ाते रहे, लेकिन अब जाकर एकता कपूर ने इस 'तीन बार वाले ड्रामा' के पीछे की सोच को खुद समझाया है. उनके मुताबिक, यह सिर्फ स्टाइल नहीं था, बल्कि मजबूरी और रणनीति दोनों का मिश्रण था.

कम बजट, बड़ा इफेक्ट

टीवी की दुनिया में लंबे समय से राज करने वाली एकता कपूर बताती हैं कि उस दौर में टीवी शोज का बजट काफी सीमित होता था. हाई-एंड विजुअल इफेक्ट्स या बड़े सेटअप हर सीन में इस्तेमाल करना संभव नहीं था. ऐसे में मेकर्स के पास ड्रामा बढ़ाने के लिए कुछ ही टूल्स थे. आमतौर पर सीरियल में रिपीट शॉट्स, तेज बैकग्राउंड म्यूजिक और जूम-इन/जूम-आउट के जरिए ही ड्रामा क्रिएट किया जाता था. यानी, जो चीज दर्शकों को ओवर लगती थी, वही उस समय कहानी को असरदार बनाने का सबसे आसान तरीका थी.

‘किचन ऑडियंस' के लिए बनाया गया फॉर्मूला

इस स्टाइल के पीछे एक और दिलचस्प वजह थी. एकता कपूर के मुताबिक, डेली सोप्स की बड़ी ऑडियंस घर की महिलाएं होती थीं, जो टीवी देखते वक्त अक्सर किचन या दूसरे कामों में व्यस्त रहती थीं. ऐसे में जब भी कोई बड़ा ट्विस्ट आता था, तो तेज म्यूजिक और रिपीट शॉट्स के जरिए यह संकेत दिया जाता था कि कुछ बड़ा हुआ है. ऐसी स्थिति में महिलाएं किचन या किसी दूसरे कमरे में भी हो तो जल्दी से टीवी के सामने आ जाती थी.

ड्रामा ही था असली TRP गेम

रिपीट सीन सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि TRP का खेल भी था. जब एक ही सीन अलग-अलग एंगल से दिखता था, तो उसमें सस्पेंस और ड्रामा दोनों बढ़ जाते थे. यही वजह थी कि दर्शक उस पल से ज्यादा जुड़ते थे और शो की पकड़ मजबूत होती थी. आज भले ही टीवी कंटेंट का फॉर्मेट बदल गया हो और ऐसे रिपीट सीन कम दिखते हों, लेकिन एक दौर था जब यही ओवरड्रामैटिक स्टाइल टीवी सीरियल्स की पहचान बन चुका था. और इसके पीछे सिर्फ क्रिएटिविटी नहीं, बल्कि लो बजट के कारण एक सोची-समझी रणनीति काम करती थी.

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