रामानंद सागर ने यूं ढूंढे थे रामायण के रावण, शूटिंग से पहले राम की आरती करते थे अरविंद त्रिवेदी, फिर भी खलनायक मानते थे लोग  

रामानंद सागर की रामायण में रावण का किरदार निभाकर फेमस हुए अरविंद त्रिवेदी शूटिंग से पहले राम की आरती करते थे. 

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रामानंद सागर की रामायण में ऐसे बने थे अरविंद त्रिवेदी रावण, शूटिंग से पहले करते थे राम की पूजा

रामानंद सागर का 1987 में आया सीरियल 'रामायण' उस दौर में लोगों के लिए न सिर्फ मनोरंजन का साधन था, बल्कि आस्था का एक हिस्सा भी बन गया था. दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले इस सीरियल के हर एक पात्र ने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई थी. लेकिन एक ऐसा चेहरा था, जिसने लोगों को डराया भी और अपनी एक्टिंग से प्रभावित किया और वो थे रामानंद सागर की रामायण के रावण यानी एक्टर अरविंद त्रिवेदी. लेकिन रामानंद सागर को रावण के मिलने का किस्सा अलग है, जो कोई ऑडिशन नहीं था. बल्कि अरविंद त्रिवेदी की चाल को देखकर फैसला लिया गया था. 

रामानंद सागर की रामायण के रावण बने अरविंद त्रिवेदी

अरविंद त्रिवेदी ने रावण के किरदार को अपने अभिनय से इतना प्रभावशाली बनाया कि लोग उन्हें असल में रावण ही समझ बैठते थे. वह जहां भी जाते, लोग उन्हें 'रावण' कहकर ही बुलाते थे. 8 नवंबर 1938 को मध्य प्रदेश के इंदौर में जन्मे अरविंद त्रिवेदी बचपन से ही अभिनय में रुचि रखते थे. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने थिएटर से अभिनय की शुरुआत की. 1987 में रामानंद सागर की 'रामायण' के लिए अरविंद त्रिवेदी एक साधु केवट का किरदार निभाने की उम्मीद लेकर ऑडिशन देने गए थे. लेकिन जैसे ही उन्होंने डायलॉग बोले, उनकी आवाज, चेहरा, हावभाव और चाल देखकर रामानंद सागर ने उन्हें रावण का रोल ऑफर कर दिया. यही वो पल था, जिसने अरविंद त्रिवेदी के जीवन को बदल दिया. 

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राम की पूजा करते थे रावण

'रामायण' में काम करने से जहां एक तरफ वह सफलता की सीढ़ियां चढ़ रहे थे, वहीं दूसरी ओर घर-घर में रावण के किरदार से पहचाने जाने के कारण लोग उन्हें अलग निगाहों से देख रहे थे. लोगों ने उन्हें असली का रावण समझ लिया था. कई तो उन्हें अपने घर बुलाने से भी कतराते थे. ये बात खुद अरविंद ने एक इंटरव्यू में बताई थी. उन्होंने हंसते हुए कहा था, "लोग मुझे खलनायक समझते हैं, लेकिन मैं असल जिंदगी में बहुत धार्मिक इंसान हूं." हालांकि बेहद कम लोग जानते हैं कि शूटिंग से पहले अरविंद त्रिवेदी श्रीराम की पूजा करते थे. 

83 की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा

रामायण की अपार सफलता के बाद अरविंद त्रिवेदी ने राजनीति में कदम रखा और कई पुरुस्कार भी जीते. लेकिन 6 अक्टूबर 2021 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया. उनके निधन की खबर सुनकर रामायण के उनके सह-कलाकार, राम बने अरुण गोविल और सीता बनी दीपिका चिखलिया ने भावुक श्रद्धांजलि दी. अरविंद त्रिवेदी ने लगभग 300 फिल्मों में अभिनय किया, जिनमें हिंदी और गुजराती दोनों भाषाओं की फिल्में शामिल थीं. 'जेसल तोरल', 'कुंवरबाई नु मामेरू', 'वीर मंगदा वाला', और 'देश रे जोया दादा परदेश जोया' जैसी गुजराती फिल्मों में उनके किरदार दर्शकों को आज भी याद हैं. 

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