सलमान खान के शो का हिस्सा कभी नहीं बनेंगे करण पटेल, बताया कर सकते हैं होस्ट, बोले- बिग बॉस मुझे पसंद नहीं आता 

टीवी एक्टर करण पटेल जल्द ही कलर्स के रियलिटी शो द 50 में नजर आने वाले हैं, जिसके चलते वह चर्चा में हैं.  

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बिग बॉस पर करण पटेल ने दिया रिएक्शन
नई दिल्ली:

ये है मोहब्बतें फेम एक्टर करण पटेल इन दिनों चर्चा में हैं. वह 'कस्तूरी', 'ये है मोहब्बतें' और 'कसौटी जिंदगी की' जैसे हिट शो में नजर आने के बाद अब कलर्स टीवी और जियो हॉटस्टार पर आने वाले अपकमिंग शो द 50 में नजर आने वाले हैं. हालांकि पिछले कई सीजन में सलमान खान के रियलिटी शो बिग बॉस 19 में करण पटेल का नाम सामने आया. लेकिन वह शो का हिस्सा नहीं बनें. इसी बीच हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में करण पटेल ने कहा, कि बिग बॉस उनका शो नहीं है. 

करण पटेल ने कहा, मैं नो रियलिटी शो में विश्वास रखता हूं. खासकर बिग बॉस में. यह अपने आप करियर बदल देता है क्योंकि आप शो में जैसा बर्ताव करते हैं, उससे आपका करियर बदल जाता है. जब लोग सिर्फ लोगों का ध्यान खींचने के लिए हद से ज्यादा चीजें करने लगते हैं, तो यह दर्शकों के लिए बोरिंग और घटिया हो जाता है.”

बिग बॉस के कल्चर पर बात करते हुए करण पटेल ने कहा, "फिर यह रवैया घर के अंदर रहने वाले लोगों के लिए जिंदगी का एक पैटर्न बन जाता है. मैं खास तौर पर बिग बॉस की बात कर रहा हूं. कुछ समय बाद, यह असली भी नहीं लगता और यह दिखावटी गुस्सा और जबरदस्ती का झगड़ा हो जाता है. यही वजह है कि यह शो मुझे पसंद नहीं आता. शायद आने वाले 5 से 7 साल में जब मैं रिटायर हो जाऊं. मैं बिग बॉस होस्ट कर सकता है. यही एक रास्ता है मेरे शो का हिस्सा बनने का. "

इसके अलावा आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में  'द 50' को लेकर उनसे सवाल पूछे गए सवाल  कि क्या वह इसे अभिनय से दूरी के तौर पर देखते हैं, तो उन्होंने कहा, ''यह मेरे करियर का रीइन्वेंशन फेज है. मैं रुका नहीं हूं, बल्कि मैं खुद को नया बना रहा हूं. नए फॉर्मेट्स में काम करना खुद को चुनौती देने जैसा है. कुछ अलग करने की चाह मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। मेरे लिए 'द 50' किसी रास्ते से भटकना नहीं, बल्कि उसी सफर का हिस्सा है, जो मुझे आगे ले जा रहा है.''

रियलिटी शो में खेलने के अंदाज की बात करते हुए करण ने कहा, ''मैं खुद को बेहद सहज और स्वाभाविक खिलाड़ी मानता हूं. मेरा खेल ज्यादा सोचा-समझा या गणनाओं पर आधारित नहीं होता. मैं चीजों को ध्यान से देखता हूं, माहौल को समझता हूं, लेकिन जब फैसला लेने की बात आती है तो मैं केवल दिल की ही सुनता हूं. मेरे मन में जो आया, मैं वही करता हूं. कभी-कभी मुझे बाद में पछतावा होता है, लेकिन अगर मैं कोई कदम न उठाऊं, तो उसका पछतावा और ज्यादा होता है. मेरे लिए रणनीति का मतलब किसी को बहकाना या चालबाजी करना नहीं है. मैं न तो जानबूझकर लोगों को पढ़ने की कोशिश करता हूं और न ही यह तय करता हूं कि कब और कैसे बोलना है और कब चुप रहना है. हर परिस्थिति में सामने मौजूद टास्क सबसे ज्यादा अहम होता है। उसे जीतना ही मेरा मुख्य लक्ष्य रहता है, चाहे तरीका कोई भी क्यों न हो." 

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