दूरदर्शन का 38 साल पुराना शो, रामायण के दौर में इससे लॉन्च हुए 350 एक्टर्स, पीएम के आइडिया ने बदली टीवी की तस्वीर 

दूरदर्शन पर रामायण 1987 में आई. लेकिन इसके बाद 1988 में एक ऐसा शो आया, जिसने ना सिर्फ भारतीय दर्शकों को इतिहास से जोड़ा. बल्कि बॉलीवुड के कई चेहरों को पहचान दी. 

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रामायण के दौर में आया दूरदर्शन का ये पॉपुलर शो
नई दिल्ली:

दूरदर्शन की बात जब होती है तो इन दिनों रामायण का नाम जरुर आता है, जो 1987 में आई. लेकिन 90 के दशक से लेकर आज तक लोगों की जुबां पर रही. लेकिन इस शो के एक साल बाद एक ऐसे शो ने दस्तक दी, जिसने ना सिर्फ भारतीय दर्शकों को इतिहास से जोड़ा बल्कि एक्टिंग की दुनिया में नए चेहरों को भी एंट्री दी. वहीं इसकी खास बात यह है कि पॉपुलर निर्देशक श्याम बेनेगल ने बनाया था. वहीं पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की प्रसिद्ध किताब द डिस्कवरी ऑफ इंडिया पर आधारित थी. 

प्रधानमंत्री के आइडिया ने जन्मा दूरदर्शन का पॉपुलर शो

हम बात कर रहे हैं दूरदर्शन सीरियल के भारत एक खोज सीरियल की, जिसकी शुरुआत भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के श्याम बेनेगल को दिए आइडिए से हुई थी. दरअसल, उनका कहना था कि जैसे रामायण और महाभारत लोकप्रिय हुए. वैसे ही भारत के वास्तविक इतिहास को दिखाने के लिए एक सीरियल बनाया जाए. इसे श्याम बेनेगल ने स्वीकार किया और फिर इसके लिए गहरी रिसर्च की. 

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25 लेखकों और 35 इतिहासकारों ने दिया योगदान

श्याम बेनेगल के शो की स्क्रिप्टिंग में करीब 25 लेखकों और 35 इतिहासकारों की टीम ने काम किया. ताकि तथ्यों में कोई गलती ना हो. वहीं इसका लेखन शमा जैदी ने किया, जिसके चलते शो को बनाने में 11 महीने 17 दिन का समय लगा. इसके कुल 53 एपिसोड थे, जिसमें इतिहास के कुछ खास जानकारी को दिखाया गया. 

350 एक्टर्स का डेब्यू 

खास बात यह है कि भारत एक खोज से 1000 से ज्यादा कलाकार जुड़े, जिसमें से करीबन 350 एक्टर्स को डेब्यू करने का मौका मिला. इसमें कुछ जाने माने चेहरे भी थे. एक्टर रोशन सेठ ने पंडित नेहरू और सूत्रधार की जिम्मेदारी संभाली. जबकि ओम पुरी ने एक से ज्यादा रोल किए. सलीम घोष, नसीरुद्दीन शाह, अमरीश पुरी, शबाना आजमी, मीता वशिष्ठ, पल्लवी जोशी, लकी अली, ईला अरुण, पीयूष मिश्रा और इरफान खान जैसे दिग्गज कलाकार इस शो में नजर आए. 

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रविवार को सुबह 11 बजे आता था शो 

रविवार का दिन दूरदर्शन प्रेमियों के लिए खास होता था. यह शो हर रविवार सुबह 11 बजे प्रसारित होता था और दर्शक टीवी के सामने बैठ जाते थे. इस शो में 5000 साल पुराने इतिहास को दिखाया गया. जबकि अनेकता में एकता कां संदेश भी पेश किया गया. इसकी शूटिंग मुंबई के गोरेगांव फिल्मसिटी में हुई थी. वहीं ताज महल, वेस्टर्न घाट जैसी जगहों पर जरुरी सीन को फिल्माया गया था. 

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