दूरदर्शन वाली रामायण के फैन्स आज भी मां सीता के किरदार में दीपिका चिखलिया को ही याद करते हैं. 39 साल पहले रामानंद सागर की महाकाव्य सीरीज में उन्होंने जो किरदार निभाया, वह आज तक कोई भुला नहीं पाया है. लोग आज भी उन्हें उसी रूप पसंद करते हैं. एक वो दौर था जब लोग उनसे आशीर्वाद लेते थे और आज भी उनका सम्मान वैसा ही बना हुआ है. लेकिन इस दिव्य किरदार तक पहुंचने के लिए दीपिका को कितनी मेहनत और चुनौतियों का सामना करना पड़ा था
आउटडोर शूटिंग थी सबसे बड़ा चैलेंज
उस दौर में आउटडोर शूटिंग बहुत चुनौती भरी होती थी. बेसिक सुविधाओं की कमी के चलते महिला कलाकारों को लोकल लोगों के घरों में वॉशरूम का इस्तेमाल करना पड़ता था. कपड़े बदलने के लिए खुले मैदान में ही टेंट के जरिए चेंजिंग रूम बनाए जाते थे. कई बार तो कार में बैठकर साड़ी बदलनी पड़ती थी. क्रू मेंबर्स शीशों पर कपड़े लटका देते थे ताकि कोई बाहर से न देख सके. धूप से बचने के लिए भी यही टेंट काम आता था.
सीता बनने के लिए दीपिका चिखलिया ने की थी खास तैयारी
रामानंद सागर ने दीपिका को सीता का एक रफ स्कैच देकर बताया था कि वह किरदार कैसा होना चाहिए. दीपिका ने इसे खुद में यूं उतार लिया कि आज तक कोई उनकी छवि को मिटा नहीं पाया है. किरदार की तैयारी की बात करें तो दीपिका ने खुद एक बार एक इंटरव्यू में बताया था वे रोज रामायण पढ़ती थीं, किरदार की गरिमा को समझने पर पूरा ध्यान देती थीं. सीता का स्वभाव गंभीर और मर्यादापूर्ण था, इसलिए उन्होंने अपनी बोली, अभिव्यक्ति और डायलेक्ट पर खास काम किया. तीन साल तक इस किरदार को उन्होंने पूरी निष्ठा से निभाया.
क्यों कोई और एक्ट्रेस नहीं बन सकी उनकी जैसी सीता?
दीपिका चिखलिया का मानना है कि उनका चेहरा ही भक्ति और आध्यात्मिकता से भरा था. वे माला जपती थीं और राम नाम का जाप करती थीं. उनके लिए सीता का किरदार सिर्फ एक्टिंग नहीं, बल्कि भक्ति का हिस्सा था. वे खुद को सीता मानकर जीती थीं राम का युग, उनके संघर्ष, सब कुछ वास्तविक लगता था. दीपिका का कहना था कि आज की ज्यादातर एक्ट्रेसेज में इसी भक्ति भाव की कमी है. वे इसे केवल एक्टिंग मानकर करती हैं, जबकि दीपिका के लिए यह जीने वाली सच्चाई थी. इसी वजह से उनका किरदार आज भी बेजोड़ बना हुआ है.
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