42 साल पहले दूरदर्शन पर आया था इंडियन टेलीविजन का पहला धारावाहिक, 17 महीने में 156 एपिसोड, गलियों में पसर जाता था सन्नाटा

Doordarshan First Serial: आप जानते हैं भारतीय टेलीविजन का पहला धारावाहिक कौन सा है? अगर नहीं तो हम आपको कुछ हिंट देते हैं, ये 42 साल पहले आया था और इसके 156 एपिसोड दूरदर्शन पर आए थे, ये फैमिली ड्रामा था, कुछ ध्यान आया.

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Doordarshan First Serial: दूरदर्शन पर 42 साल पहले आया था ये फैमिली ड्रामा
नई दिल्ली:

India's First TV Serial: जब हम 1980 के दशक के टीवी की बात करते हैं, तो जेहन में सबसे पहले ‘हम लोग (Hum Log)' का नाम आता है. यह वह धारावाहिक था जिसने भारत में टीवी सीरियल की नींव रखी और पूरे देश को हर शाम एक ही समय पर टीवी स्क्रीन के सामने ला खड़ा किया. 7 जुलाई 1984 को दूरदर्शन (Doordarshan) पर पहला एपिसोड प्रसारित होने के साथ ही भारतीय टेलीविजन में एक नया युग शुरू हो गया. ‘हम लोग' को हिंदी टेलीविजन का पहला सोप ओपेरा (Doordarshan First Soap Opera) माना जाता है. इसे प्रसिद्ध लेखक मनोहर श्याम जोशी ने लिखा था, जबकि निर्देशन पी. कुमार वासुदेव ने किया.

कैसे बना हम लोग

बताया जाता है कि ‘हम लोग' की रचना मैक्सिकन टीवी सीरीज ‘Ven Conmigo' (1975) की तर्ज पर की गई थी, जिसमें शिक्षा-मनोरंजन के फॉर्मूले को अपनाया गया. उस समय के सूचना एवं प्रसारण मंत्री वासंत साठे को 1982 में मैक्सिको यात्रा के दौरान यह विचार आया. इसके बाद लेखक मनोहर श्याम जोशी के साथ मिलकर पटकथा तैयार की गई, जिन्होंने पूरी सीरीज की स्क्रिप्ट लिखी. निर्देशन पी. कुमार वासुदेव ने किया. सीरीज का टाइटल स्कोर संगीतकार अनिल बिस्वास ने रचा. इस तरह ‘हम लोग' ने भारतीय टीवी पर सामाजिक मुद्दों को मनोरंजक ढंग से पेश करने की नई शुरुआत की.

हम लोग के कितने एपिसोड

विकिपीडिया के मुताबिक, इस धारावाहिक में कुल 156 एपिसोड दिखाए गए और इसका आखिरी एपिसोड 17 दिसंबर 1985 को प्रसारित हुआ. हर एपिसोड के अंत में एक्टर अशोक कुमार सूत्रधार के तौर पर आते थे और किसी ना किसी सामाजिक मुद्दे पर बात करके जाते थे. 

कहानी एक साधारण मध्यमवर्गीय भारतीय परिवार की थी. यह परिवार गरीबी, शिक्षा, शादी, नौकरी, दहेज जैसी समस्याओं से जूझता दिखाया गया. उस समय दूरदर्शन देश का एकमात्र चैनल था और टीवी सेट भी ज्यादातर घरों में लग्जरी माना जाता था. फिर भी ‘हम लोग' इतना लोकप्रिय हुआ कि लोग पड़ोसियों के घर जाकर इसे देखते थे.

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मनोरंजन के साथ जागरुकता

‘हम लोग' सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं था, बल्कि सामाजिक जागरूकता का माध्यम भी था. परिवार नियोजन, लड़कियों की शिक्षा, दहेज प्रथा जैसी संवेदनशील मुद्दों को बहुत संजीदगी से उठाया गया. आज जब ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर सैकड़ों वेब सीरीज उपलब्ध हैं, तब भी ‘हम लोग' को याद किया जाता है. इसने साबित किया कि आम आदमी की कहानी अगर ईमानदारी से दिखाई जाए तो वह पूरे देश को छू सकती है. आज 42 साल बाद भी ‘हम लोग' की प्रासंगिकता कम नहीं हुई है. 

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