उपन्यास पर था दूरदर्शन का 38 साल पुराना सुपरहिट शो, अमरीश पुरी, एके हंगल, ओम पुरी ने दिखाया 1947 बंटवारे का दर्द, IMDb रेटिंग 8.9

एक मशहूर उपन्यास पर बने इस दूरदर्शन शो में बंटवारे के दर्द को ऐसे दिखाया गया कि दर्शक सिहर उठे थे. 38 साल बाद भी इसकी दमदार कहानी और दिग्गज स्टारकास्ट इसे खास बनाती है.

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नॉवेल पर बना था दूरदर्शन का शो तमस

अस्सी और नब्बे के दशक का दौर दूरदर्शन के बेहतरीन सीरियल्स के लिए जाना जाता है. उस समय छोटे पर्दे पर ऐसी कहानियां दिखाई जाती थीं, जिनमें मनोरंजन के साथ-साथ समाज और इतिहास की सच्चाई भी नजर आती थी. इन्हीं यादगार शोज में से एक था ‘तमस', जिसने 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन की भयावह तस्वीर को बेहद संवेदनशील तरीके से पर्दे पर उतारा. अमरीश पुरी, ओम पुरी, एके हंगल, पंकज कपूर, सुरेखा सीकरी और सईद जाफरी जैसे दिग्गज कलाकारों से सजे इस शो ने बंटवारे के दौरान आम लोगों की जिंदगी में आए अंधेरे और दर्द को दिखाया था. यही वजह है कि दशकों बाद भी यह सीरियल दर्शकों के बीच याद किया जाता है और IMDb पर इसकी रेटिंग 8.9 बताई जाती है.

1988 में दूरदर्शन पर टेलीकास्ट हुआ था ‘तमस'

‘तमस' का प्रसारण साल 1988 में दूरदर्शन पर हुआ था. इस शो का निर्देशन और पटकथा लेखन मशहूर फिल्ममेकर गोविंद निहलानी ने किया था. सीरियल में ओम पुरी, अमरीश पुरी, पंकज कपूर, दीपा साही, सईद जाफरी, सुरेखा सीकरी और एके हंगल जैसे शानदार कलाकारों ने अहम भूमिकाएं निभाईं. कलाकारों की दमदार अदाकारी ने कहानी के दर्द और उस दौर की बेचैनी को पर्दे पर बेहद प्रभावी ढंग से पेश किया.

‘तमस' को अपने समय में खूब सराहना मिली. इसे 1988 के नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में नरगिस दत्त अवॉर्ड फॉर बेस्ट फीचर फिल्म ऑन नेशनल इंटीग्रेशन से सम्मानित किया गया. सुरेखा सीकरी को बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस और वनराज भाटिया को बेस्ट म्यूजिक डायरेक्शन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला. साल 2013 में इस सीरियल को दोबारा हिस्ट्री चैनल पर भी प्रसारित किया गया था.

भीष्म साहनी के उपन्यास पर बनी थी कहानी

‘तमस' की कहानी हिंदी के मशहूर लेखक भीष्म साहनी के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित थी. भीष्म साहनी ने यह उपन्यास 1974 में लिखा था और साल 1975 में इसे साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया. उपन्यास में भारत के विभाजन के दौरान फैली सांप्रदायिक हिंसा और उसके बीच पिसते आम लोगों की जिंदगी को बेहद करीब से दिखाया गया था.

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‘तमस' शब्द का अर्थ ही अंधकार होता है और कहानी के संदर्भ में यह नाम बेहद सटीक बैठता है. यह सिर्फ देश के बंटवारे की कहानी नहीं थी, बल्कि उस दौर में इंसान के भीतर और समाज के चारों तरफ फैलते अंधेरे की कहानी थी. धार्मिक तनाव, हिंसा, डर और अपने घर-परिवार से बिछड़ने का दर्द कहानी के केंद्र में था.

बंटवारे के दर्द को पर्दे पर उतारा

‘तमस' की सबसे खास बात यह थी कि इसने विभाजन को सिर्फ इतिहास की एक घटना की तरह नहीं दिखाया, बल्कि आम इंसान की नजर से उसकी भयावहता को सामने रखा. घर उजड़ने, रिश्ते टूटने और अचानक बदल गए सामाजिक माहौल के बीच लोगों ने किस तरह मुश्किलें झेलीं, सीरियल ने उसे प्रभावशाली तरीके से दिखाया.

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आज जब उस दौर के कई टीवी शोज सिर्फ यादों का हिस्सा बन चुके हैं, ‘तमस' का नाम अब भी गंभीर और मजबूत कहानी कहने वाले धारावाहिकों में लिया जाता है. यही वजह है कि 38 साल बाद भी यह शो अपनी कहानी, कलाकारों और विषय की वजह से दर्शकों के बीच चर्चा में बना हुआ है.

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