उसेन बोल्ट से तेज निकला चीनी रोबोट! रोबोटिक्स की दुनिया में चीन के मुकाबले कहां खड़ा भारत
अब चीन रोबोट की इस दुनिया में बादशाह इसलिए बना हुआ है क्योंकि उसकी जरूरतों को पूरा करने के लिए उसके पास ऐसे ग्राहक हैं जो लगातार रोबोट्स की मांग करते हैं.
चीन रोबोटिक्स की दुनिया में किस तेजी से पैर पसार रहा है, इसका एक उदाहरण कुछ दिन पहले बीजिंग में आयोजित दूसरे World Humanoid Robot Games की शुरुआती दौड़ में ही देखने को मिल गया. Tianzhuo की ओर से तैयार किए गए ह्यूमनॉइड रोबोट ने एथलीट उसेन बोल्ट का रिकॉर्ड तोड़ डाला. उसेन बोल्ट ने 2009 में बर्लिन में World Athletics Championships के दौरान 100 मीटर की दौड़ सिर्फ 9.58 सेकंड में पूरी की थी. यह एक विश्व रिकॉर्ड था. लेकिन चीन के एक रोबोट ने इस रिकॉड को ध्वस्त कर दिया है, सिर्फ 9.39 सेकंड में 100 मीटर की दौड़ पूरी की.
अब चीनी रोबोट सिर्फ रेस नहीं लगा रहे हैं, उनके कई और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं. कभी सीढ़ियों पर चढ़ना, कभी सामान उठाना तो कभी फैक्ट्री में सक्रियता से काम करना, जो काम इंसान करते हैं, अब सबकुछ चीनी रोबोट भी कर रहे हैं.
चीन में रोबोट का बाजार कितना बड़ा है?
चीन की रोबोट इंडस्ट्री कितनी बड़ी है, इसका एक अनुमान Robotics Center of Silicon Valley की विस्तृत रिपोर्ट से मिलता है. इस रिपोर्ट में कई पहलुओं पर चर्चा की गई है. चीन में आखिर रोबोटिक इंडस्ट्री कैसे इतनी बड़ी बन गई, कौन से अवसर चीन में पैदा हुए, किस तरह से सरकार ने मदद की, हर सवाल के जवाब मिलते हैं.
चीन में इस साल रोबोटिक्स का बाजार 14.2 अरब डॉलर का रहा है. यहां भी सिर्फ एक साल के भीतर ही 47 फीसदी की अप्रत्याशित बढ़ोतरी देखने को मिली है. यहां समझे वाली बात यह भी है कि चीन सिर्फ रोबोट बनाने के मामले में आगे नहीं है, उस रोबोट को बनाने के लिए जिन कंपोनेंट्स की जरूरत है, उस मामले में भी वो अपने प्रतिद्वंदियों से काफी आगे है.
औद्योगिक रोबोट में चीन कहां खड़ा?
आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल दुनिया में जितने औद्योगिक रोबोट लगाए थे, उसमें से 70 फीसदी से ज्यादा अकेले चीन में लगे. यहां भी 2.76 लाख औद्योगिक रोबोट तो चीन में सिर्फ एक साल के अंदर ही लगा दिए गए. अब चीन औद्योगिक रोबोट लगाने के मामले में कितना आगे है, इसे ऐसे समझा सकता है कि इसी दौरान जापान ने 46 हजार औद्योगिक रोबोट लगाए थे और अमेरिका ने 35 हजार. यानी कि जितने जापान और अमेरिका मिलकर औद्योगिक रोबोट नहीं लगा रहे, उससे कही ज्यादा चीन अपने दम पर लगा रहा है.

Humanoid Robot में चीन की ताकत
रोबोटिक की दुनिया का एक अहम हिस्सा है- Humanoid Robot. हाल ही में जो 100 मीटर की दौड़ में रोबोट जीता था, वो भी Humanoid Robot ही था. ह्यूमनॉइड रोबोट का मतलब है एक ऐसा रोबोट जो इंसानों की तरह ही काम करता है, उसके दो पैर, दो हाथ और इंसानों की तरह चलने या काम करने की क्षमता रहती है.
ह्यूमनॉइड रोबोट के मामले में भी चीन इस समय दूसरे देशों की तुलना में काफी आगे चल रहा है. RCSV की रिपोर्ट के अनुसार ह्यूमनॉइड रोबोट के मार्केट में चीनी कंपनियों की हिस्सेदारी 80 फीसदी के करीब है. चीन की दो कंपनियां Unitree और AgiBot अकेले एक साल में 75,000 से भी ज्यादा ह्यूमनॉइड रोबोट बनाने का लक्ष्य रखे हैं. पश्चिमी देशों की जो पूरी सप्लाई रहती है, उससे कही अधिक चीन में ह्यूमनॉइड रोबोट बन रहे हैं.
बड़ी बात यह है कि चीन यहां पर रुकने नहीं वाला है. पिछले साल ही चीन ने ह्यूमनॉइड रोबोट्स को लेकर 10 साल की योजना तैयार कर ली है. बकायदा एक Humanoid Robot Action Plan बनाया गया है जिसके तहत 2027 तक 1 लाख ह्यूमनॉइड रोबोट तैनात करने की तैयारी है.
चीन में रोबोट का मार्केट क्यों सफल?
अब चीन रोबोट की इस दुनिया में बादशाह इसलिए बना हुआ है क्योंकि उसकी जरूरतों को पूरा करने के लिए उसके पास ऐसे ग्राहक हैं जो लगातार रोबोट्स की मांग करते हैं. चीन में इस समय तीन ऐसी कंपनियां हैं जिन्हें अपने कामकाज में रोबोट्स की काफी जरूरत पड़ रही है. एक कंपनी तो है Build Your Dreams (BYD), दूसरी है Contemporary Amperex Technology Co., Limited (CATL) और तीसरी कंपनी है Foxconn.
अब BYD ईवी दुनिया में बड़ा नाम है, CATL एक चर्चित बैटरी मैन्युफैक्चरर कंपनी है, वहीं Foxconn एक बड़ी इलेक्ट्रोनिक मैन्युफैक्चरर कंपनी है. अब तीनों ही कंपनियों में एक चीज समान है, सभी को हजारों-लाखों मशीन और ओटोमेशन सिस्टम की दरकार है. इसी वजह से ये कंपनियां रोबोट बनाने वाली दूसरी कंपनियों से संपर्क साधती हैं और बड़े से बड़े आर्डर दिए जाते हैं.
आत्मनिर्भर चीन, रोबोटिक इंडस्ट्री की सफलता
चीन के लिए एक और पहलू काफी मुफीद साबित हुआ है. उसे रोबोट बनाने के लिए किसी दूसरे देश का मुंह नहीं ताकना पड़ता है. ज्यादातर कंपोनेट उसके अपने देश में बन रहे हैं. बात चाहे मोटर की हो, सेंसर की हो, बैटरी की हो या फिर चिप, गीयर और सॉफ्टवेयर ही, सबकुछ आसानी से चीन में बन रहा है. यहां भी चीन का शहर Shenzhen रोबोटिक्स इंडस्ट्री की वजह से काफी फल-फूल रहा है. सभी पार्ट्स का पास में मिल जाना ही इस शहर की तकदीर बदल गया है. इसे ऐसे समझ सकते हैं कि जिस रोबोट के प्रोटोटाइप को बनने में अमेरिका या जर्मनी में 12 हफ्ते लग जाएंगे, वही प्रोटोटाइप Shenzhen में सिर्फ 10-14 दिन में बनकर तैयार हो जाता है.

चीन का वो सीक्रेट जिसने सबकुछ बदला
चीन रोबोटिक्स की दुनिया में तो कदम रखी ही चुका है, लेकिन इसकी नींव रखने में एक भूमिका यहां की ईवी और ओटोमोबाइल इंडस्ट्री की है. असल में ईवी में मोटर, गीयर, बैटरी, सेंसर जैसे पार्ट्स का काफी इस्तेमाल होता है. अब यही सारी चीजें रोबोट बनाने में भी लग जाती हैं. ऐसे में कई साल पहले चीन ने जो सप्लाई चेन ईवी और ओटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए तैयार की थी, उसका फायदा उसे अब रोबोटिक्स की इंडस्ट्री में मिल रहा है.
चीन में रोबोट डेनसिटी कितनी है?
रोबोट डेनसिटी का मतलब है कि इंसानी कामगारों की संख्या के मुकाबले काम कर रहे इंडस्ट्रियल रोबोट की संख्या कितनी है. इसे आमतौर पर मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में हर 10,000 कर्मचारियों पर मापा जाता है. चीन में तो 2024 में 10 हजार कर्मचारियों के मुकाबले 392 रोबोट थे. 2019 में चीन में यही आंकड़ा सिर्फ 187 था. इसका मतलब है कि पांच साल से भी कम समय में रोबोट की संख्या दोगुना से भी ज्यादा हो गई. वैसे इस मामले में चीन कई देशों से आगे है, लेकिन दक्षिण कोरिया से काफी पीछे है. दक्षिण कोरिया में तो 10 हजार कर्मचारियों की तुलना में 1012 रोबोट काम करते हैं.
वैसा ऐसा नहीं है कि चीन हमेशा से ही रोबोटिक्स की दुनिया में इतना मजबूत था. 16 साल पहले 2010 में चीन में आने वाले ज्यादातर रोबोट विदेशी कंपनियों के होते थे. लेकिन 2025 में चीन में जितने औद्योगिक रोबोट बिकते थे, उसके 40 फीसदी चीन में ही बन रहे थे.
रोबोटिक्स के मामले में भारत कहां खड़ा?
भारत रोबोटिक्स की दुनिया में काफी तेजी से कदम बढ़ा रहा है, लेकिन अगर चीन से तुलना की जाएगी तो काफी पीछे दिखाई देगा. भारत के पास अभी Unitree या Boston Dynamics जैसी बड़ी कंपनियां मौजूद नहीं है जो ह्यूमनॉइड रोबोट बनाती हों. वर्तमान में भारत का रोबोटिक बाजार 2.14 अरब डॉलर का है. वहीं इस इंडस्ट्री की ग्रोथ रेट 17 फीसदी से 34 फीसदी के बीच बताई जाती है.
चीन की तुलना में कहां है भारत?
अगर बात औद्योगिक रोबोट की करें तो 2024 में यह संख्या 9100 की थी, चीन में इस तुलना में 2.76 लाख औद्योगिक रोबोट थे. रोबोट डेनसिटी की बात करें तो यहां भी भारत अभी पिछड़ रहा है. 10 हजार कर्मचारियों की तुलना में भारत में अभी मात्र 10 से 67 के करीब रोबोट होते हैं. दुनिया का औसत इस मामले में 132 दर्ज किया गया है, वहीं चीन में तो यह संख्या 392 चल रही है.
रोबोटिक की दुनिया में कौन सी कंपनियां सक्रिय?
बात अगर भारत की उन कंपनियों की करें जो इस इंडस्ट्री में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं तो Addverb, Genrobotics, iHub Robotics जैसे कंपनियों के नाम आगे रहते हैं. जानकार मानते हैं कि भारत की अभी बड़ी ताकत हार्डवेयर या सोफ्टवेयर नहीं है, बल्कि टैलेंट हैं. दुनिया के पास जिसकी कमी है, भारत के पास उसकी भरमार है.
भारत के लिए क्या अवसर है?
भारत के पास बड़ी संख्या में एआई इंजीनियर, सॉफ्टवेयर डेवलपर्स, कंप्यूटर विजन एक्पर्ट्स, रोबोटिक रिसर्चर मौजूद हैं. ऐसे में भारत की असल ताकत रोबोट से ज्यादा रोबोट का दिमाग बनाने में दिखाई देती है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक भारत आगे चलकर दुनिया के दूसरे रोबोट्स को भी ट्रेन करने में एक बड़ी भूमिका अदा कर सकता है.

वहीं बात अगर समस्याओं की आए तो भारत की दूसरे देशों पर निर्भरता अभी भी एक चुनौती बनी हुई है. रोबोट के जो कंपोनेंट हैं, बात चाहे फिर actuators की हो या फिर बैटरी सैल की या फिर सेंसर की, दूसरे देशों में बड़ी संख्या में आयात करना पड़ता है और इसी वजह से लागत बढ़ जाती है.
रोबोटिक इंडस्ट्री को लेकर भारत सरकार की नीति
भारत सरकार ने भी नेशनल रोबोटिक्स स्ट्रैटेजी तैयार की है. इसके तहत 2030 तक भारत को रोबोटिक्स की दुनिया में आगे लेकर जाना है. सरकार रोबोटिक इंडस्ट्री के पूरे ईकोसिस्टम को ही मजबूत करने पर जोर दे रही है. इसका मतलब है कि रिसर्च पर खर्च किया जाएगा, रोबोट बनाने पर खर्च होगा और टेस्टिंग, प्रोडक्शन और मार्केट में भी निवेश होगा. सरकार अभी मेक इन इंडिया मुहिम को भी रोबोटिक इंडस्ट्री के साथ जोड़ना चाहती है. सरकार चाहती है कि रोबोट बनाने में जो पार्ट इस्तेमाल होते हैं, वो भारत में ही बनना शुरू हो जाएं.
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