- 31वें ओलिंपिक खेलों का समापन हो गया
- भारत के 108 खिलाड़ियों में सिर्फ दो पदकों की कामयाबी हासिल हुई.
- पढ़ें एक विश्लेषण
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रियो डी जिनेरियो:
ओब्रिगादो. शुक्रिया. दुनिया के सबसे रंगीन शहरों में से एक रियो ने मैराकना स्टेडियम में करीब डेढ़ घंटे चले शानदार समापन समारोह के साथ 31वें ओलिंपिक खेलों पर पर्दा गिरा दिया. रियो ओलिंपिक्स में उसेन बोल्ट, जिमनास्ट सिमोन बाइज, सुपरस्टार तैराक माइकल फेल्प्स और ब्राजील की फुटबॉल टीम को इतिहास बनाते देखा, तो आईओसी के एक सदस्य की गिरफ्तारी के अलावा कई सुपरस्टार खिलाड़़ियों का फ्लॉप शो भी देखा.
भारतीय प्रशंसकों के लिए भारतीय खिलाड़ियों की नाकामी की कहानी एक आम बात ही साबित हुई. इन सबके ऊपर विवादों ने भारतीय खेल के माहौल को जरूर कड़वा कर दिया.
108 खिलाड़ियों में सिर्फ दो पदकों की कामयाबी हासिल हुई. जबकि दुनिया के कई छोटे देश जैसे कजाकिस्तान, सिंगापुर, फिजी, ब्रुनई, थाइलैंड जैसे देश भी भारत से बेहद आगे नजर आए. बीजिंग ओलिंपिक में भारत एक गोल्ड और 2 ब्रॉन्ज के साथ 50वें नंबर पर रहा था. इस बार एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज के साथ 67वें नंबर पर रहा.
रियो ओलिंपिक में भारत के लिए पहले 12 दिन पदकों का सूखा पड़ा रहा. सिर्फ दो लड़कियों ने कुश्ती और बैडमिंटन में पदक जीतकर किसी तरह देश की लाज बचाई. भारतीय शूटर बुरी तरह फ्लॉप रहे. अभिनव बिंद्रा चौथे नंबर पर जरूर आए, लेकिन जीतू राय, हिना सिद्धू, गगन नारंग, गुरप्रीत सिंह जैसे खिलाड़ी पोडियम पर पहुंचने में नाकाम रहे.
जिमनास्ट दीपा कर्माकर ने दुनियाभर के एथलीटों के बीच प्रोदुनोवा वॉल्ट के जरिए अपनी अलग पहचान जरूर बनाई, लेकिन वह भी चौथे नंबर पर रहीं. तीरंदाजी में यही हाल अतानू दास का रहा. तीरंदाज दीपिका, भारतीय हॉकी टीम, तमाम मुक्केबाज, बैडमिंटन में साइना नेहवाल और लंदन के पदक विजेता योगेश्वर दत्त जैसे खिलाड़ी पदक व पोडियम से दूर-दूर ही रहे. इन सबके बीच कभी खेलमंत्री तो कभी नरसिंह विवाद का तड़का लगता रहा. दुनियाभर में भद्द पिटने की हमने कई वजहें पेश कीं.
रियो के शर्मनाक प्रदर्शन के बाद यह आत्म मंथन का वक्त है. लेकिन अधिकारी और खिलाड़ी इसे कितनी इमानदारी और सही तरीके से करेंगे यह सवाल भी बना रहेगा और इस पर नजर भी बनी रहेगी.
एक नजर, मेडल टेली पर :
1. संयुक्त राज्य अमेरिका
2. ग्रेट ब्रिटेन
3. चीन
4. रूस
5. जर्मनी
13. ब्राजील
67. भारत
भारतीय प्रशंसकों के लिए भारतीय खिलाड़ियों की नाकामी की कहानी एक आम बात ही साबित हुई. इन सबके ऊपर विवादों ने भारतीय खेल के माहौल को जरूर कड़वा कर दिया.
108 खिलाड़ियों में सिर्फ दो पदकों की कामयाबी हासिल हुई. जबकि दुनिया के कई छोटे देश जैसे कजाकिस्तान, सिंगापुर, फिजी, ब्रुनई, थाइलैंड जैसे देश भी भारत से बेहद आगे नजर आए. बीजिंग ओलिंपिक में भारत एक गोल्ड और 2 ब्रॉन्ज के साथ 50वें नंबर पर रहा था. इस बार एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज के साथ 67वें नंबर पर रहा.
रियो ओलिंपिक में भारत के लिए पहले 12 दिन पदकों का सूखा पड़ा रहा. सिर्फ दो लड़कियों ने कुश्ती और बैडमिंटन में पदक जीतकर किसी तरह देश की लाज बचाई. भारतीय शूटर बुरी तरह फ्लॉप रहे. अभिनव बिंद्रा चौथे नंबर पर जरूर आए, लेकिन जीतू राय, हिना सिद्धू, गगन नारंग, गुरप्रीत सिंह जैसे खिलाड़ी पोडियम पर पहुंचने में नाकाम रहे.
जिमनास्ट दीपा कर्माकर ने दुनियाभर के एथलीटों के बीच प्रोदुनोवा वॉल्ट के जरिए अपनी अलग पहचान जरूर बनाई, लेकिन वह भी चौथे नंबर पर रहीं. तीरंदाजी में यही हाल अतानू दास का रहा. तीरंदाज दीपिका, भारतीय हॉकी टीम, तमाम मुक्केबाज, बैडमिंटन में साइना नेहवाल और लंदन के पदक विजेता योगेश्वर दत्त जैसे खिलाड़ी पदक व पोडियम से दूर-दूर ही रहे. इन सबके बीच कभी खेलमंत्री तो कभी नरसिंह विवाद का तड़का लगता रहा. दुनियाभर में भद्द पिटने की हमने कई वजहें पेश कीं.
रियो के शर्मनाक प्रदर्शन के बाद यह आत्म मंथन का वक्त है. लेकिन अधिकारी और खिलाड़ी इसे कितनी इमानदारी और सही तरीके से करेंगे यह सवाल भी बना रहेगा और इस पर नजर भी बनी रहेगी.
एक नजर, मेडल टेली पर :
1. संयुक्त राज्य अमेरिका
| गोल्ड | सिल्वर | ब्रॉन्ज | टोटल |
| 46 | 37 | 38 | 121 |
2. ग्रेट ब्रिटेन
| गोल्ड | सिल्वर | ब्रॉन्ज | टोटल |
| 27 | 23 | 17 | 67 |
3. चीन
| गोल्ड | सिल्वर | ब्रॉन्ज | टोटल |
| 26 | 18 | 26 | 70 |
4. रूस
| गोल्ड | सिल्वर | ब्रॉन्ज | टोटल |
| 19 | 18 | 19 | 56 |
5. जर्मनी
| गोल्ड | सिल्वर | ब्रॉन्ज | टोटल |
| 17 | 10 | 15 | 42 |
13. ब्राजील
| गोल्ड | सिल्वर | ब्रॉन्ज | टोटल |
| 7 | 6 | 6 | 19 |
67. भारत
| गोल्ड | सिल्वर | ब्रॉन्ज | टोटल |
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