टीम इंडिया क्वार्टरफाइनल में पहुंच चुकी है। लेकिन क्या वह अगले दौर की कठिन चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है।
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नई दिल्ली:
आईसीसी विश्व कप-2011 के लीग मुकाबले समाप्त हो चुके हैं। टीम इंडिया क्वार्टरफाइनल में पहुंच चुकी है। लेकिन क्या वह अगले दौर की कठिन चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है। यह सवाल इस टीम को इतिहास रचता देखने का सपना पालने वाले हर एक देशवासी को परेशान कर रहा है। इसी के मद्देनजर लीग मैचों में टीम इंडिया के प्रदर्शन पर गौर करते हुए उसके आधार पर यह निष्कर्ष निकालने का प्रयास किया है कि महेंद्र सिंह धोनी की टीम की खिताबी जीत की दावेदारी में आखिर कितना दम है?अंक तालिका : भारत ने ग्रुप 'बी' में नौ अंकों के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। उसके खाते में चार जीत, एक हार और एक टाई रहा। जीते गए मुकाबलों से उसे दो-दो अंक मिले जबकि टाई मुकाबले से उसे एक अंक मिला। इस तरह वह द. अफ्रीका (10 अंक) के बाद दूसरे स्थान पर रही। द. अफ्रीका के खिलाफ ही भारत को इस विश्व कप में अपनी अब तक एकमात्र हार का सामना करना पड़ा है। इस ग्रुप की तालिका में इंग्लैंड सात अंकों के साथ तीसरे और वेस्टइंडीज छह अंकों के साथ चौथे स्थान पर रहा। बांग्लादेश ने भी तीन जीत के साथ छह अंक जुटाए लेकिन कम नेट रन रेट के कारण उसे बाहर का रास्ता देखना पड़ा। इस ग्रुप से आयरलैंड और नीदरलैंड्स को भी बाहर का रास्ता देखना पड़ा। नीदरलैंड्स को एक भी जीत नहीं नसीब हुई जबकि आयरलैंड ने इंग्लैंड और नीदरलैंड्स को हराकर अपने लिए इस विश्व कप को यादगार बना दिया।लीग मैचों का दौर : बांग्लादेश के खिलाफ : उद्घाटन मुकाबले में भारत ने बांग्लादेश को हराया था। उस मैच में उसकी बल्लेबाजी काफी स्तरीय रही थी लेकिन गेंदबाजों ने निराश किया था। इसी का नतीजा था कि 370 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रही बांग्लादेश की टीम 283 रनों तक पहुंचने में सफल रही थी। गेंदबाजी शुरू से ही भारतीय टीम की कमजोर कड़ी रही है। इस कारण गेंदबाजों के स्तरीय प्रदर्शन से उतनी हैरानी नहीं हुई, जितनी हो सकती थी। इसका कारण सिर्फ बल्लेबाजों का बेहतरीन प्रदर्शन रहा। इस मैच से भारत को दो अंक मिले। इंग्लैंड के खिलाफ : बांग्लादेश से भिड़ने के आठ दिनों बाद भारतीय टीम ने इंग्लैंड क सामना किया। इस मैच में बल्लेबाजों ने सचिन तेंदुलकर के नेतृत्व में एक बार फिर अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन गेंदबाजों के खराब प्रदर्शन और खराब क्षेत्ररक्षण के कारण भारत 338 रनों के बड़े लक्ष्य को भी नहीं बचा लाया। गनीमत यह रही कि उसे हार नहीं मिली और यह मैच टाई हो गया। इस मैच से भारत ने एक अंक जुटाए। आयरलैंड के खिलाफ : भारत से भिड़ने से पहले आयरलैंड की टीम इंग्लैंड को पटखनी दे चुकी थी। इस कारण मीडिया ने आयरलैंड का इतना जबर्दस्त हौवा कायम किया कि टीम इंडिया को अपनी तैयारियों पर फिर से गौर करना पड़ा। हार के डर ने खिलाड़ियों को अधिक समय तक नेट पर बिताने को मजबूर किया। मैच के दिन भारत ने आयरलैंड को अपेक्षाकृत कम स्कोर पर खड़ा किया लेकिन बल्लेबाजी के दौरान वह संघर्ष करती नजर आई। एक समय उसने अपने चार विकेट 100 रन के कुल योग पर गंवा दिए थे। युवराज सिंह की नाबाद अर्द्धशतकीय पारी की बदौलत भारत बेशक यह मैच जीतने में सफल रहा लेकिन इस जीत को प्रभावशाली हरगिज नहीं कहा जा सकता। नीदरलैंड्स के खिलाफ : आयरलैंड के बाद भारत का सामना नीदरलैंड्स से हुआ। ऐसा लगा था कि भारत यह मैच बड़े अंतर से जीतकर नेट रन रेट को बेहतर करेगा लेकिन मैदान में हुआ इसके उलट। ग्रुप की सबसे कमजोर टीम के खिलाफ भारत को पांच विकेट से जीत मिली, वह भी अपने शुरुआती बड़े बल्लेबाजों के विकेट गंवाने के बाद। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ : नीदरलैंड्स पर मिली जीत ने भारत के खाते में सात अंक डाल दिए थे। इन अंकों के बूते ही भारतीय कप्तान ने 11 मार्च के संवाददाता सम्मेलन के शुरुआत मे ही ऐलान कर दिया कि उनकी टीम क्वार्टरफाइनल में पहुंच चुकी है। ग्रुप में अंकों के समीकरण और आगे आने वाली हार से बेखबर धोनी आत्मविश्वास से भरपूर नजर आए लेकिन उनका आत्मविश्वास अगले दिन ही काफूर हो गया, जब द. अफ्रीका के खिलाफ उनकी टीम को तीन विकेट से हार मिली। सचिन तेंदुलकर के 49वें एकदिवसीय शतक के बावजूद भारत 300 रनों का आंकड़ा नहीं पार कर सका। भारत ने इस मैच में 29 रन अंतराल पर अपने नौ बल्लेबाजों के विकेट गंवाए। इस स्थिति ने भारतीय बल्लेबाजी क्रम की पोल खोल दी। ग्रुप का समीकरण गड़बड़ाया : 11 मार्च को बांग्लादेश के हाथों इंग्लैंड की हार ने ग्रुप 'बी' का समीकरण खराब कर दिया। अब बांग्लादेश भी क्वार्टरफाइनल की दौड़ में शामिल हो चुका था। नीदरलैंड्स को हराकर उसने इस पर मुहर लगा दी। भारत के लिए यह असामान्य स्थिति थी। इंग्लैंड ने वेस्टइंडीज को हराकर अपने अंकों की संख्या सात कर ली और भारत के साथ बराबरी पर आ गया लेकिन नेट रन रेट के मामले में वह थोड़ा पिछड़ रहा था। भारत के लिए यही उम्मीद की किरण थी। मीरपुर में बांग्लादेश और द. अफ्रीका के बीच हुए मुकाबले से इस ग्रुप के भाग्य का फैसला होना था। बांग्लादेश की हार की सूरत में वेस्टइंडीज, इंग्लैंड और भारत क्वार्टरफाइनल में प्रवेश कर जाते। हुआ भी यही। अपने घरेलू मैदान पर खेलते हुए बांग्लादेश की टीम 78 रनों पर ढेर हो गई। इस तरह भारत, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज क्वार्टरफाइनल में पहुंच गए। भारत का अंतिम लीग मैच : भारत ने अपने अंतिम लीग मैच में रविवार को होली के दिन वेस्टइंडीज का सामना किया। इस मैच में भारत ने खराब शुरुआत के बावजूद अच्छी वापसी की और 300 का स्कोर हासिल करता दिख रहा था लेकिन 50 रन के अंतराल पर सात विकेट गंवाने से उसकी यह मुराद धरी की धरी रह गई। उसके इस प्रदर्शन के बाद साफ हो गया कि नागपुर में 29 रनों पर नौ विकेट गंवाना कोई अपवाद नहीं था। बल्लेबाजों के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद गेंदबाजों ने शुरुआती 30 ओवरों में निराश किया लेकिन जहीर खान द्वारा ड्वोन स्मिथ को बोल्ड करने के साथ ही भारतीय टीम ऊर्जा से भर गई। इसके बाद सभी गेंदाबजों ने इस मौके का फायदा उठाते हुए विकेट झटके और भारत यह मैच 80 रनों के अंतर से जीतने में सफल रहा। टीम इंडिया के प्रदर्शन का आकलन : छह मैचों के पोस्टमार्टम से साफ हो गया है कि लीग स्तर पर टीम इंडिया के प्रदर्शन में स्थायित्व की कमी साफ तौर पर दिखी। उसके प्रदर्शन में वह ठहराव नही दिखा, जो इस ग्रुप में द. अफरीका या फिर ग्रुप 'ए' में पाकिस्तान या फिर श्रीलंका के प्रदर्शन में नजर आया। टीम की कमजोर कड़ी कमजोर ही रही उलटे जो मजबूती थी, उसमें भी सेंध लगती दिखी। कुछ बल्लेबाजों ने अपनी प्रतिभा के साथ न्याय किया लेकिन यूसुफ पठान जैसे मैच जिताऊ खिलाड़ी बुरी तरह फ्लॉप रहे। क्वार्टरफाइनल मुकाबला : भारत को 24 मार्च को अहमदाबाद में ऑस्ट्रेलिया से भिड़ना है। अभ्याय मैच में बेशक भारत ने ऑस्ट्रेलिया को हराया था लेकिन बीते एक महीने में ऑस्ट्रेलिया ने शानदार तरक्की की है। उसके प्रदर्शन में एक बार फिर स्थायित्व दिखाई दे रहा है। अंतिम ग्रुप मैच में पाकिस्तान के हाथों मिली हार के बावजूद ऑस्ट्रलिया की साख कम नहीं हुई है। इस कारण भारत को उसे हराने के लिए इन तीन दिनों में अपनी कमजोरियों को दूर करने के साथ-साथ अपने मजबूत पक्ष कहे जाने वाले बल्लेबाजों में आत्मविश्वास का ऑक्सीजन फूंकना होगा। क्या हैं कमियां : सबसे पहले गेंदबाजी, फिर मध्यक्रम की बल्लेबाजी, करीबी क्षेत्ररक्षण और फिर कप्तान के कुछ अनबुझ फैसले। इन कमियों को दूर किए बिना भारत के लिए विश्व कप के सेमीफाइनल में पहुंचने का सपना पालना बेमानी है। कप्तान धोनी को अपने व्यवहार और सोच में लचीलापन लाते हुए सर्वमान्य टीम संयोजन पर विचार करना होगा।
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