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This Article is From Aug 18, 2016

फाइनल में पहुंचने के बाद पीवी सिंधु ने किया गोल्‍ड का वादा, कहा- इसके लिए जीजान लगा दूंगी

फाइनल में पहुंचने के बाद पीवी सिंधु ने किया गोल्‍ड का वादा, कहा- इसके लिए जीजान लगा दूंगी
पीवी सिंधु ने फाइनल में स्‍थान बनाकर भारत का एक मेडल पक्‍का कर दिया है.
  • जापान की नोजोमी ओकुहोरा को हराकर फाइनल में पहुंचीं
  • फाइनल में कल स्‍पेन की कैरोलिना मारिन से है मुकाबला
  • हर महत्‍वपूर्ण चैंपियनशिप में कोई न कोई पदक जीत चुकी हैं सिंधु
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नई दिल्‍ली: रियो ओलिंपिक में महिला बैडमिंटन सिंगल्‍स के फाइनल में स्‍थान बनाकर भारत की पीवी सिंधु ने गुरुवार को इतिहास रच दिया. सेमीफाइनल मुकाबले में जीत के बाद सिंधु ने NDTV से बात करते हुए कहा कि मेरा लक्ष्‍य ओलिंपिक में गोल्‍ड जीतना है और इसके लिए जीजान लगा दूंगी. सिंधु को फाइनल में वर्ल्‍ड नंबर वन स्‍पेन की कैरोलिना मारिन का मुकाबला करना है.

गौरतलब है कि लंदन में हुए पिछले ओलिंपिक के बैडमिंटन सिंगल्‍स इवेंट में साइना नेहवाल भारत के लिए मेडल जीतकर लाई थीं. चार वर्ष बाद अब यह काम पीवी सिंधु ने कर दिखाया है, वह भी पदक का रंग बदलकर. सिंधु ने गुरुवार को जबर्दस्‍त प्रदर्शन करते हुए जापान की नोजोमी ओकुहारा को हराते हुए महिला सिंगल्‍स इवेंट के फाइनल में स्‍थान बना लिया है. सिंधु के लिहाज से खास बात यह रही कि जहां साइना को सेमीफाइनल में मिली हार के बाद तीसरे-चौथे स्‍थान के लिए हुए मैच को जीतकर कांस्य हासिल किया था, वहीं सिंधु ने फाइनल में स्‍थान बनाकर सिल्वर पक्‍का कर लिया है, वहीं गोल्ड के लिए उन्हें मारिन को हराना होगा.

पुसारला वेंकट सिंधु यानी पीवी सिंधु को खेल अपने माता-पिता से विरासत में मिला. उनके पिता पीवी रमन्‍नाऔर मां पी. विजया दोनों वालीबॉल के खिलाड़ी रहे हैं. पिता रामन्‍ना तो खेलों में अपने योगदान के लिए बेटी की तरह अर्जुन अवार्ड भी जीत चुके हैं.  आठ साल की कच्‍ची उम्र में बैडमिंटन खेलना शुरू करने वाली सिंधु के करियर में बड़ा मोड़ तब आया जब वे गोपीचंद की बैडमिंटन एकेडमी से जुड़ीं. यहां से सिंधु की कामयाबी का ग्राफ चढ़ता गया. सब जूनियर और जूनियर लेवल पर उन्‍होंने कई खिताब अपने नाम किए.

कमी थी तो बस ओलिंपिक मेडल की...
कॉमनवेल्‍थ यूथ गेम्‍स और एशियन जूनियर चैंपियनशिप में सिंगल्‍स वर्ग में गोल्ड जीतने वाली सिंधु ने जल्‍द ही सीनियर लेवल पर भी चमक दिखानी शुरू कर दी. सिंधु साउथ एशियन गेम्‍स, एशियाड, कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स और वर्ल्‍ड चैंपियनशिप जैसे हर बड़े इवेंट में मेडल जीत चुकी हैं. वर्ल्‍ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में तो उन्‍होंने दो बार ब्रॉन्‍ज मेडल जीतने की उपलब्धि हासिल की है. इन तमाम उपलब्‍धियों के बाद सिंधु के घर के 'शोकेस'  में कमी थी तो केवल ओलिंपिक मेडल की, जिसे उन्‍होंने गुरुवार के अपने प्रदर्शन से हासिल कर लिया. महिला सिंगल्‍स का फाइनल मुकाबला यह तय करेगा कि सिंधु के घर के शोकेस की शान बनने वाले इस मेडल का रंग पीला (गोल्ड) रहेगा या सफेद (सिल्‍वर). वैसे यह तय है कि पूरे ओलिंपिक में शानदार प्रदर्शन के बाद वर्षों से ओलिंपिक मेडल्‍स के लिए तरसते रहे भारतीय खेलप्रेमी उनके पीले मेडल की ही उम्‍मीद लगाए हैं...

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