वर्ल्ड नंबर-1 सानिया मिर्जा चैंपियन बनकर वापस लौट आई हैं। सानिया की जीत कई मायनों में न सिर्फ भारत बल्कि पाकिस्तान के लिए भी फख्र की वजह बन गई है। सानिया की हर नई मंज़िल भारत और पाकिस्तान में लाखों लड़कियों और महिलाओं को प्रेरित करती है।
महान नेल्सन मंडेला के मशहूर शब्द याद आते हैं, खेलों में दुनिया को बदलने की ताक़त है। इसमें लोगों को प्रेरित करने की ताक़त होती है। इसमें लोगों को जोड़ने की वह ताक़त होती है, जो दूसरों में कभी-कभी होती है। ये युवाओं से उस भाषा में बात करती है, जो वे समझते हैं। खेल मायूसी की जगह उम्मीद पैदा कर सकते हैं। नस्लभेद को तोड़ने में भी ये सरकार से ज़्यादा ताक़तवर साबित हो सकते हैं।
सानिया की जीत की कहानियों ने भारत में टेनिस की दशा बदल दी है। भले ही डेढ़ दशक के समय में कोई दूसरी सानिया भारत या पाकिस्तान को नहीं मिल पाई, लेकिन भारत में किसी भी टेनिस कोर्ट पर कोई लड़की पसीना बहाती है तो सानिया बनने का ख्वाब ज़रूर पालती है।
सानिया ने भी ख्वाब देखे थे, वर्ल्ड नंबर 1 बनने का ख्वाब। वह कहती हैं कि वह ख्वाब पूरा हो गया। उनके पूरे होते ख्वाब ने फिर से लाखों महिला टेनिस खिलाड़ियों के सपने फिर से सुनहरे कर दिए हैं।
चार्ल्स्टन के ग्रीन क्ले कोर्ट पर पूर्व वर्ल्ड नंबर 1 मार्टिना हिंगिस के साथ ख़िताब जीतते ही सानिया मिर्ज़ा ने डबल्स में निजी तौर पर टॉप रैंकिंग हासिल कर ली।
भारत या पाकिस्तान की महिला टेनिस खिलाड़ी के लिए यह वाकया पहली बार हुआ है। ज़ाहिर है उनके पति और पाकिस्तान के क्रिकेटर शोएब मलिक की खुशी का ठिकाना नहीं है। वह कहते हैं, मैं बेइंतहा खुश हूं और गर्व महसूस कर रहा हूं। सानिया का वर्ल्ड नंबर 1 बनना पाकिस्तान के लिए भी गर्व की बात है। वह यह भी ज़ोर देकर कहते हैं कि सानिया अपने देश के लिए अपना 100 फ़ीसदी देकर मैदान पर उतरती हैं।
पाकिस्तान के पूर्व हॉकी कोच ताहिर ज़मान कहते हैं, सानिया के वर्ल्ड नंबर 1 बनने का यहां भी अच्छा असर पड़ा है। खेलप्रेमी इसे सकारात्मक तरीके से लेते हैं। वह कहते हैं, पाकिस्तान में भारत की तरह महिला टेनिस खिलाड़ियों की संख्या तो नहीं बढ़ी, लेकिन यहां पहले 10 लड़कियां टेनिस खेलती थीं तो अब 40 लड़कियां टेनिस कोर्ट पर नज़र आती हैं।
पांच साल पहले 2010 में शादी के सूत्र में बंधे सानिया-शोएब की जोड़ी की तुलना "पॉश और बेक्स" यानी इंग्लैंड के पूर्व कप्तान डेविड बेक्हम और पॉप स्टार विक्टोरिया बेक्हम की जोड़ी से भी की जाती है। शोएब कहते हैं कि सानिया की कामयाबी से भारत और पाकिस्तान में टेनिस के युवा खिलाड़ी प्रेरित होंगे। शोएब कहते हैं, वे इसके ज़रिये समझ सकते हैं कि कड़ी मेहनत से ग्लोबल स्तर पर क्या कुछ हासिल किया जा सकता है।
सानिया जब भी खेलती हैं भारतीय फ़ैन्स बड़ी उम्मीद और दुआओं के साथ उनके मैच में शरीक होते हैं। सानिया के पति क्रिकेटर शोएब कहते हैं कि वह भी सानिया का मैच सियालकोट में टेलीविज़न पर देख रहे थे। उन्होंने सानिया की जीत पर अपने ससुराल में सबको फ़ोन कर बधाई दी। वह कहते हैं, सानिया से शादी से पहले भी टेनिस से प्यार करता था, लेकिन अब इससे दिल का और क़रीबी रिश्ता हो गया है। वह कहते हैं कि उनके और उनके प्रतिद्वन्द्वियों के मैच भी देखते हैं। सानिया अक्सर टेनिस कोर्ट पर होती हैं इसलिए वह हमेशा उनकी कमी महसूस करते हैं।
33 साल के शोएब और सानिया की दास्तान का रोमांटिक पहलू युवा खेलप्रेमियों के दिल की धड़कनें बढ़ा सकता है, लेकिन इस कामयाबी के पीछे छिपी बेइंतहा मेहनत और बलिदान को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। हैदराबादी टेनिस स्टार की कामयाबी का जश्न सरहद के दोनों ओर मनाया जो रहा है तो सानिया इसकी सही हक़दार भी हैं।
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