भारतीय हॉकी टीम (फाइल फोटो)
रियो ओलिंपिक में अपने दूसरे पूल मैच में अर्जेंटीना को हराने के बाद जोश से भरपूर भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने अपना चौथा लीग मैच नीदरलैंड्स से खेला. डच टीम ने भारत को 2-1 से हरा दिया. भारत को अंतिम सेकेंड में पांच पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन वह स्कोर बराबर नहीं कर पाई.
हालांकि इस हार के बावजूद भारत क्वार्टर फाइनल में पहुंचने में सफल रहा. दरअसल पूल बी का एक अन्य मैच मौजूदा ओलिंपिक चैम्पियन जर्मनी और अर्जेंटीना का मैच 4-4 से बराबर रहा, जिस वजह से भारत के लिए रास्ता साफ हो गया. भारत अब पूल बी में चार मैचों में छह अंक लेकर तीसरे स्थान पर है और अगर वह शुक्रवार को अपने आखिरी लीग मैच में कनाडा से हार भी जाता है, तब भी उसका आखिरी आठ में स्थान तय है. पूल ए और पूल बी से शीर्ष चार पर रहने वाली दो टीमें क्वार्टर फाइनल में जगह बनाएंगी.
ओलिंपिक इतिहास में पहली बार हॉकी में 15-15 मिनट के चार क्वार्टर रखे गए हैं. भारत के एसके उथप्पा ने अपना 100वां इंटरनेशनल मैच खेला. तीसरे क्वार्टर के अंतिम और चौथे क्वार्टर के शुरुआती मिनटों में भारत को 9 खिलाड़ियों से खेलना पड़ा, क्योंकि फाउल पर अंपायर ने सुनील और वीआर रघुनाथ को यलो कार्ड दिखा दिया था.
भारत को लगातार 5 पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन गोल नहीं कर पाया
चौथे क्वार्टर के शुरुआती मिनटों में भारतीय टीम 9 खिलाड़ियों के साथ उतरी और तीसरे मिनट में डच टीम को दूसरा पेनल्टी कॉर्नर दे दिया. वास्तव में तीसरे क्वार्टर के अंतिम समय में दो खिलाड़ियों के यलो कार्ड का दंड चौथे में भी कुछ मिनटों तक जारी रहा. हालांकि श्रीजेश ने डाइव मारते हुए गेंद रोक ली और गोल नहीं हुआ और स्कोर 1-1 ही रहा, लेकिन डच टीम लगातार हमले करती रही. नीदरलैंड को अंतिम 8 मिनट में एक और पेनल्टी कॉर्नर मिल गया. भारतीय खिलाड़ी से डी के भीतर दूसरा फाउल हुआ और डच को तीसरा पेनल्टी कॉर्नर मिल गया, पर गोल नहीं कर पाए. डच ने हमले जारी रखे और अंतिम 7वें मिनट में एक और पेनल्टी कॉर्नर ले लिया. इस बार श्रीजेश नही बचा पाए और वान डेर वीरडेन मिंक ने गोल कर दिया और डच को मुकाबले में 2-1 से आगे कर दिया.
डच टीम ने भारतीय खिलाड़ियों को डी के भीतर कोई मौका नहीं दिया, फिर भी भारत ने शानदार मूव बनाते एक और पेनल्टी कॉर्नर हासिल कर लिया, लेकिन डच गोली ने बचा लिया. अंतिम 50 सेकेंड में भारत ने कई हमले किए, लेकिन गोल का मौका नहीं बना पाए. इसके बाद 6वें सेंकेड में डच टीम ने गलती कर दी और वीडियो रेफरल में अंपायर ने पेनल्टी कॉर्नर दे दिया, गोल तो नहीं हुआ, लेकिन अंपायर ने वीडियो रेफरल लिया और भारत को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिल गया. इस शॉट पर भारत को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिल गया. एक बार फिर पेनल्टी कॉर्नर भारत को मिल गया..लगातार चौथा और फिर पांचवां भी...लेकिन भारत फायदा नहीं उठा पाया और हार गया...
तीसरा क्वार्टर : दोनों टीमों ने 1-1 गोल किए, भारत को दो यलो कार्ड
तीसरे क्वार्टर में भारतीय टीम ने पहले ही मिनट में जोरदार आक्रमण किया, लेकिन विफल रही. इसके बाद डच टीम ने खूबसूरत मूव बनाते हुए भारत पर हमला किया, भारतीय गोली श्रीजेश ने गोल तो बचा लिया, लेकिन गेंद उनके हेलमेट से टकराकर भारतीय खिलाड़ी के शरीर में लग गई और डच को पहला पेनल्टी कॉर्नर मिल गया. इस पेनल्टी कॉर्नर पर हॉफमैन रॉजियर ने 32वें मिनट में रीबाउंड पर गोल दाग दिया. इसके बाद भारतीय टीम दबाव में नजर आई.
डच टीम ने लगातार हमले जारी रखे. तीसरे क्वार्टर के अंतिम 8 मिनट (मैच के 38वें मिनट) में भारत ने मूव बनाया और पहला पेनल्टी कॉर्नर हासिल कर लिया, लेकिन रुपिंदर पाल सिंह की हिट कामयाब नहीं रही. अंपायर ने उसे इसी शॉट पर दूसरा पेनल्टी कॉर्नर भी दे दिया, जिसे वीआर रघुनाथ ने गोल में बदलकर मुकाबला 1-1 से बराबरी पर ला दिया. रघुनाथ का रियो में यह दूसरा गोल रहा. उत्साह से भरपूर भारत ने इसके बाद दो हमले किए, लेकिन जवाब में डच टीम ने भी मोर्चा खोल दिया. भारत को आखिरी के 3 मिनट में उस समय झटका लगा, उसके दो खिलाड़ियों सुनील और रघुनाथ को अंपायर ने यलो कार्ड दिखा दिया. इसके बाद टीम को 9 खिलाड़ियों से ही खेलना पड़ा.
दूसरा क्वार्टर : श्रीजेश ने किए दो शानदार बचाव
दूसरे क्वार्टर में नीदरलैंड ने हमले से शुरुआत की और भारत पर अपनी छवि के अनुरूप दबाव बनाया, हालांकि गोल नहीं हो सका. कनाडा के खिलाफ अपने पिछले मैच में 7 गोल करने वाली डच टीम मैच के 23वें मिनट तक आउट ऑफ टच दिखी, लेकिन इसके बाद उसने मैन टू मैन पासिंग की रणनीति अपनाते हुए कई शानदार मूव बनाए, लेकिन भारतीय रक्षापंक्ति की भी दाद देनी होगी कि उन्होंने गोल का मौका नहीं दिया और खुद को मैच में बनाए रखा. इतना ही नहीं कप्तान और गोलकीपर श्रीजेश ने दो करारे शॉट रोक लिए. पिछले मैचों में पेनल्टी कॉर्नर लुटाने वाली भारतीय टीम ने अभी तक डच टीम को कोई भी ऐसा मौका नहीं दिया है.
पहला क्वार्टर : बराबरी का रहा मुकाबला
पहले क्वार्टर का खेल खत्म हो गया है. इसमें लगभग बराबरी का खेल रहा. दोनों टीमों ने एक-दूसरे पर दवाब बनाने क लिए कई आक्रमण किए हैं, लेकिन डिफेंडरों ने उन्हें नाकाम कर दिया. भारतीय टीम ने पहले क्वराट्र के अंतिम 7 मिनट में कुछ अच्छा खेल दिखाया, लेकिन गोल नहीं कर सके, क्योंकि नीदरलैंड के डिफेंडरों ने अपना काम बखूबी किया. ओवरऑल देखा जाए तो पहले भाग में किसी भी टीम ने कोई सीरियस मूव नहीं बनाया और धीमा खेलीं.
भारतीय टीम एक बार फिर पिछले मैचों की तरह अंतिम क्षणों में पिछड़ गई और अंतिम सेंकेंड में मिले 5 पेनल्टी कॉर्नर पर भी गोल नहीं कर पाई. शुरुआती मैच में आयरलैंड पर 3-2 की करीबी जीत के बाद भारतीय टीम को मौजूदा ओलिंपिक चैंपियन जर्मनी से 1-2 से निराशाजनक हार का मुंह देखना पड़ा था, लेकिन उसने वापसी करते हुए अर्जेंटीना पर 2-1 की अच्छी जीत दर्ज की, जिससे वह छह टीमों के पूल में शीर्ष चार में बरकरार है. अब टीम का लक्ष्य लीग चरण में जितने ज्यादा अंक हो सकें, उतने हासिल करना है ताकि वह अंतिम आठ मुकाबलों में दुनिया की नंबर एक टीम ऑस्ट्रेलिया से भिड़ने से बच सके.
हालांकि इस हार के बावजूद भारत क्वार्टर फाइनल में पहुंचने में सफल रहा. दरअसल पूल बी का एक अन्य मैच मौजूदा ओलिंपिक चैम्पियन जर्मनी और अर्जेंटीना का मैच 4-4 से बराबर रहा, जिस वजह से भारत के लिए रास्ता साफ हो गया. भारत अब पूल बी में चार मैचों में छह अंक लेकर तीसरे स्थान पर है और अगर वह शुक्रवार को अपने आखिरी लीग मैच में कनाडा से हार भी जाता है, तब भी उसका आखिरी आठ में स्थान तय है. पूल ए और पूल बी से शीर्ष चार पर रहने वाली दो टीमें क्वार्टर फाइनल में जगह बनाएंगी.
ओलिंपिक इतिहास में पहली बार हॉकी में 15-15 मिनट के चार क्वार्टर रखे गए हैं. भारत के एसके उथप्पा ने अपना 100वां इंटरनेशनल मैच खेला. तीसरे क्वार्टर के अंतिम और चौथे क्वार्टर के शुरुआती मिनटों में भारत को 9 खिलाड़ियों से खेलना पड़ा, क्योंकि फाउल पर अंपायर ने सुनील और वीआर रघुनाथ को यलो कार्ड दिखा दिया था.
भारत को लगातार 5 पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन गोल नहीं कर पाया
चौथे क्वार्टर के शुरुआती मिनटों में भारतीय टीम 9 खिलाड़ियों के साथ उतरी और तीसरे मिनट में डच टीम को दूसरा पेनल्टी कॉर्नर दे दिया. वास्तव में तीसरे क्वार्टर के अंतिम समय में दो खिलाड़ियों के यलो कार्ड का दंड चौथे में भी कुछ मिनटों तक जारी रहा. हालांकि श्रीजेश ने डाइव मारते हुए गेंद रोक ली और गोल नहीं हुआ और स्कोर 1-1 ही रहा, लेकिन डच टीम लगातार हमले करती रही. नीदरलैंड को अंतिम 8 मिनट में एक और पेनल्टी कॉर्नर मिल गया. भारतीय खिलाड़ी से डी के भीतर दूसरा फाउल हुआ और डच को तीसरा पेनल्टी कॉर्नर मिल गया, पर गोल नहीं कर पाए. डच ने हमले जारी रखे और अंतिम 7वें मिनट में एक और पेनल्टी कॉर्नर ले लिया. इस बार श्रीजेश नही बचा पाए और वान डेर वीरडेन मिंक ने गोल कर दिया और डच को मुकाबले में 2-1 से आगे कर दिया.
डच टीम ने भारतीय खिलाड़ियों को डी के भीतर कोई मौका नहीं दिया, फिर भी भारत ने शानदार मूव बनाते एक और पेनल्टी कॉर्नर हासिल कर लिया, लेकिन डच गोली ने बचा लिया. अंतिम 50 सेकेंड में भारत ने कई हमले किए, लेकिन गोल का मौका नहीं बना पाए. इसके बाद 6वें सेंकेड में डच टीम ने गलती कर दी और वीडियो रेफरल में अंपायर ने पेनल्टी कॉर्नर दे दिया, गोल तो नहीं हुआ, लेकिन अंपायर ने वीडियो रेफरल लिया और भारत को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिल गया. इस शॉट पर भारत को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिल गया. एक बार फिर पेनल्टी कॉर्नर भारत को मिल गया..लगातार चौथा और फिर पांचवां भी...लेकिन भारत फायदा नहीं उठा पाया और हार गया...
तीसरा क्वार्टर : दोनों टीमों ने 1-1 गोल किए, भारत को दो यलो कार्ड
तीसरे क्वार्टर में भारतीय टीम ने पहले ही मिनट में जोरदार आक्रमण किया, लेकिन विफल रही. इसके बाद डच टीम ने खूबसूरत मूव बनाते हुए भारत पर हमला किया, भारतीय गोली श्रीजेश ने गोल तो बचा लिया, लेकिन गेंद उनके हेलमेट से टकराकर भारतीय खिलाड़ी के शरीर में लग गई और डच को पहला पेनल्टी कॉर्नर मिल गया. इस पेनल्टी कॉर्नर पर हॉफमैन रॉजियर ने 32वें मिनट में रीबाउंड पर गोल दाग दिया. इसके बाद भारतीय टीम दबाव में नजर आई.
डच टीम ने लगातार हमले जारी रखे. तीसरे क्वार्टर के अंतिम 8 मिनट (मैच के 38वें मिनट) में भारत ने मूव बनाया और पहला पेनल्टी कॉर्नर हासिल कर लिया, लेकिन रुपिंदर पाल सिंह की हिट कामयाब नहीं रही. अंपायर ने उसे इसी शॉट पर दूसरा पेनल्टी कॉर्नर भी दे दिया, जिसे वीआर रघुनाथ ने गोल में बदलकर मुकाबला 1-1 से बराबरी पर ला दिया. रघुनाथ का रियो में यह दूसरा गोल रहा. उत्साह से भरपूर भारत ने इसके बाद दो हमले किए, लेकिन जवाब में डच टीम ने भी मोर्चा खोल दिया. भारत को आखिरी के 3 मिनट में उस समय झटका लगा, उसके दो खिलाड़ियों सुनील और रघुनाथ को अंपायर ने यलो कार्ड दिखा दिया. इसके बाद टीम को 9 खिलाड़ियों से ही खेलना पड़ा.
दूसरा क्वार्टर : श्रीजेश ने किए दो शानदार बचाव
दूसरे क्वार्टर में नीदरलैंड ने हमले से शुरुआत की और भारत पर अपनी छवि के अनुरूप दबाव बनाया, हालांकि गोल नहीं हो सका. कनाडा के खिलाफ अपने पिछले मैच में 7 गोल करने वाली डच टीम मैच के 23वें मिनट तक आउट ऑफ टच दिखी, लेकिन इसके बाद उसने मैन टू मैन पासिंग की रणनीति अपनाते हुए कई शानदार मूव बनाए, लेकिन भारतीय रक्षापंक्ति की भी दाद देनी होगी कि उन्होंने गोल का मौका नहीं दिया और खुद को मैच में बनाए रखा. इतना ही नहीं कप्तान और गोलकीपर श्रीजेश ने दो करारे शॉट रोक लिए. पिछले मैचों में पेनल्टी कॉर्नर लुटाने वाली भारतीय टीम ने अभी तक डच टीम को कोई भी ऐसा मौका नहीं दिया है.
पहला क्वार्टर : बराबरी का रहा मुकाबला
पहले क्वार्टर का खेल खत्म हो गया है. इसमें लगभग बराबरी का खेल रहा. दोनों टीमों ने एक-दूसरे पर दवाब बनाने क लिए कई आक्रमण किए हैं, लेकिन डिफेंडरों ने उन्हें नाकाम कर दिया. भारतीय टीम ने पहले क्वराट्र के अंतिम 7 मिनट में कुछ अच्छा खेल दिखाया, लेकिन गोल नहीं कर सके, क्योंकि नीदरलैंड के डिफेंडरों ने अपना काम बखूबी किया. ओवरऑल देखा जाए तो पहले भाग में किसी भी टीम ने कोई सीरियस मूव नहीं बनाया और धीमा खेलीं.
भारतीय टीम एक बार फिर पिछले मैचों की तरह अंतिम क्षणों में पिछड़ गई और अंतिम सेंकेंड में मिले 5 पेनल्टी कॉर्नर पर भी गोल नहीं कर पाई. शुरुआती मैच में आयरलैंड पर 3-2 की करीबी जीत के बाद भारतीय टीम को मौजूदा ओलिंपिक चैंपियन जर्मनी से 1-2 से निराशाजनक हार का मुंह देखना पड़ा था, लेकिन उसने वापसी करते हुए अर्जेंटीना पर 2-1 की अच्छी जीत दर्ज की, जिससे वह छह टीमों के पूल में शीर्ष चार में बरकरार है. अब टीम का लक्ष्य लीग चरण में जितने ज्यादा अंक हो सकें, उतने हासिल करना है ताकि वह अंतिम आठ मुकाबलों में दुनिया की नंबर एक टीम ऑस्ट्रेलिया से भिड़ने से बच सके.
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