भारतीय तीरंदाज अतानु दास
- अतानु दास और कोरिया के स्युंग युन ली के बीच जोरदार संघर्ष हुआ
- आखिरकार कोरियाई तीरंदाज ने यह मैच 6-4 से अपने नाम किया
- हालांकि तीरंदाजी के फैन्स और जानकार अतानु के प्रदर्शन की तारीफ कर रहे हैं
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रियो डी जनेरियो:
बारिश और खराब मौसम के बावजूद तीरंदाज अतानु दास पूरे फोकस के साथ निशाना लगाते रहे. बेहद मजूबत कोरियाई प्रतिद्वंद्वी स्युंग युन ली के खिलाफ दूसरा राउंड भी जीता, लेकिन आखिरकार बहुत करीबी मुकाबला हार गए. हालांकि उनके इस शानदार प्रदर्शन की वजह से फैन्स और जानकार अतानु के लिए तालियां बजाते रहे.
अमेरिकी कोच रेंडल टर्नर इस भारतीय अतानु की तारीफ करते नहीं थक रहे. वह कहते हैं, 'दुनिया भर के तीरंदाजों के साथ भारतीय तीरंदाजों को बेहद नजदीक से देखते रहे हैं. भारतीय लड़कियों के साथ अतानु भी बेहद उम्दा किस्म के तीरंदाज हैं. उनकी तकनीक सॉलिड है और दबाव भरे माहौल में भी अपना संयम बनाए रखना जानता है और यह उनकी बहुत बड़ी ताकत है.' उन्होंने एक दिन पहले भी अभ्यास के दौरान अतानु के बारे में कहा था कि वह मैच के दौरान कोरियाई खिलाड़ी को जरूर दबाव में डालेंगे.
वहीं भारतीय कोच धर्मेंद तिवारी कहते हैं कि भारत भले ही पदकों से चूक गया हो, लेकिन यह वक्त धैर्य रखने का है वर्ना आगे नुकसान हो सकता है. वह कहते हैं कि इस हार से खिलाड़ियों और फैन्स सबको मायूसी हुई है, लेकिन अगर अभी से ही टीम को आगे सवारने और बेंच को मजबूत करने की नीति से भटके तो आगे भारतीय तिरंदाजी को नुकसान हो सकता है. उनका मानना है कि अतानु जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी के प्रदर्शन को सकारात्मक तौर लें, तो आगे तैयारी करने में मदद मिलेगी.
फिलहाल रियो से आ रही मायूसी की खबरों में अतानु दास के प्रदर्शन की शायद ज्यादा चर्चा ना हो, लेकिन इसे पॉजीटिव तरीके से सोचें, तभी खेलों में आगे बढ़ने की गुंजाइश बन सकती है.
अमेरिकी कोच रेंडल टर्नर इस भारतीय अतानु की तारीफ करते नहीं थक रहे. वह कहते हैं, 'दुनिया भर के तीरंदाजों के साथ भारतीय तीरंदाजों को बेहद नजदीक से देखते रहे हैं. भारतीय लड़कियों के साथ अतानु भी बेहद उम्दा किस्म के तीरंदाज हैं. उनकी तकनीक सॉलिड है और दबाव भरे माहौल में भी अपना संयम बनाए रखना जानता है और यह उनकी बहुत बड़ी ताकत है.' उन्होंने एक दिन पहले भी अभ्यास के दौरान अतानु के बारे में कहा था कि वह मैच के दौरान कोरियाई खिलाड़ी को जरूर दबाव में डालेंगे.
वहीं भारतीय कोच धर्मेंद तिवारी कहते हैं कि भारत भले ही पदकों से चूक गया हो, लेकिन यह वक्त धैर्य रखने का है वर्ना आगे नुकसान हो सकता है. वह कहते हैं कि इस हार से खिलाड़ियों और फैन्स सबको मायूसी हुई है, लेकिन अगर अभी से ही टीम को आगे सवारने और बेंच को मजबूत करने की नीति से भटके तो आगे भारतीय तिरंदाजी को नुकसान हो सकता है. उनका मानना है कि अतानु जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी के प्रदर्शन को सकारात्मक तौर लें, तो आगे तैयारी करने में मदद मिलेगी.
फिलहाल रियो से आ रही मायूसी की खबरों में अतानु दास के प्रदर्शन की शायद ज्यादा चर्चा ना हो, लेकिन इसे पॉजीटिव तरीके से सोचें, तभी खेलों में आगे बढ़ने की गुंजाइश बन सकती है.
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