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This Article is From Aug 13, 2016

जानिए, ओलिंपिक में पीटी उषा के बाद दौड़ में भारत के लिए उम्मीद जगाने वालीं ललिता बाबर के बारे में

जानिए, ओलिंपिक में पीटी उषा के बाद दौड़ में भारत के लिए उम्मीद जगाने वालीं ललिता बाबर के बारे में
एक्शन में ललिता बाबर (फाइल फोटो)
  • ललिता शिवाजी बाबर, महाराष्ट्र के सतारा जिले की रहने वाली हैं
  • अकसर स्कूल का रास्ता दौड़ कर ही पूरा करना पड़ता था
  • अंडर 20 नेशनल मैराथन चैंपियनशिप में गोल मेडल की जीत से शुरुआत
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नई दिल्ली: रियो ओलिंपिक में शनिवार को एक राहत भरी खबर रही. भारत की लंबी दूरी की महिला धावक ललिता शिवाजी बाबर ने रियो ओलिंपिक में महिलाओं की 3000 मीटर स्टीपलचेज स्पर्धा के फाइनल के लिए क्वालिफाई कर लिया है. पीटी उषा के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाली वह दूसरी भारतीय बन गईं हैं. उषा ने 1984 में 400 मीटर दौड़ की ट्रैक स्पर्धा के फाइनल में जगह बनाई थी. आखिर यह ललिता शिवाजी बाबर हैं कौन, आइए जानते हैं....

ललिता बाबर, महाराष्ट्र के सतारा जिले की रहने वाली हैं. उनके दौड़ की कहानी बचपन से ही शुरू होती है. जब वह छोटी थीं तब उन्हें स्कूल के लिए चार किलोमीटर चलकर जाना पड़ता था. लेट होने की स्थिति में अक्सर स्कूल का रास्ता दौड़कर ही पूरा करना पड़ता था. इसी वजह से ललिता ने स्कूल से ही दौड़ने की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना आरंभ कर दिया था. इसमें उनका आत्मविश्वास देखते ही बनता था. उन्होंने कई बार बच्चों की लंबी दूरी की दौड़ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और जीत हासिल की. (रियो : ललिता बाबर ने 3000 मी स्टीपलचेज रेस में फाइनल के क्वालिफाई किया)

ललिता को सबसे पहली बार बड़ी सफलता उस समय मिली जब उन्होंने अंडर-20 नेशनल मैराथन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता. 2005 में यह रेस पुणे में आयोजित हुई थी. हाल ही में उन्होंने कई राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी तोड़े हैं. 2014 में मुंबई मैराथन में उन्होंने 2.50.31 घंटे का समय लेकर यह रेस पूरी की थी. यह रेस उन्होंने तीन बार जीती भी और फिर स्टीपलचेज की ओर ध्यान दिया और कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स में इस वर्ग में भाग लिया था और जीत दर्ज की.

2014 में दक्षिण कोरिया के इंचियॉन गेम्स में ललिता बाबर ने गोल्ड मेडल जीता था. यहां पर उन्होंने 9.35.37 मिनट का समय निकाला था. 2015 एशियन एथेलेटिक्स में उन्होंने अपना रिकॉर्ड तोड़ा और यह दूरी 9.34.13 मिनट में पूरी की और राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बनाया.

भारत की ओर से पूर्व ओलिंपियन और लॉन्ग जम्पर अंजू बॉबी जार्ज पहली भारतीय महिला थीं, जिसने फील्ड इवेंट के लिए क्वालिफाई किया था. ललिता को फाइनल में कोई भी पदक अपने नाम करने के लिए कम से कम वर्ल्ड की इन एथलीटों से बेहतर समय निकालना होगा- रूस की युलिया ने जब 3000 मीटर स्टीपलचेज में स्वर्ण जीता था, तब उन्होंने 9:06.72 का समय निकाला था. उनके बाद सिल्वर और कांस्य जीतने वाली एथलीट ने 9:08.37 और 9:09.84 का समय लिया था. ट्यूनीशिया की हबीबा घ्रिबी के नाम इसका वर्ल्ड रिकॉर्ड है. उन्होंने 9:05.36 का समय निकाला था.

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