स्टीपलचेज के भागतीं ललिता शिवाजी बाबर (चित्र में चौथे स्थान पर)
रियो डि जिनेरियो:
भारत को रियो ओलिंपिक के 10वें दिन एथलीट ललिता बाबर से पहला पदक मिलने की उम्मीद थी, लेकिन एक बार फिर देश को झटका लगा. महिलाओं की 3000 मीटर स्टीपलचेज में ललिता बाबर दसवें स्थान पर रहीं. इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक बुरुंडी की रुथ जेबेट, रजत पदक कीनिया की हाइविन किएंग जेप्किमोय और कांस्य पदक अमेरिका की एमा कोबर्न को मिला.
अब 100 से अधिक सदस्यों के दल की निगाहें सोमवार सुबह से ही महाराष्ट्र की ललिता पर टिकी थी. उन्होंने क्वालीफाइंग में लगभग सात सेकेंड के अंतर से नया राष्ट्रीय रिकार्ड बनाया था. ललिता पिछले 32 वर्षों में ओलिंपिक ट्रैक स्पर्धा के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट बनी हैं. उनसे पहले पीटी उषा ने लॉस एंजिलिस ही ऐसा कर पाई थीं. ( जानिए, ओलिंपिक में पीटी उषा के बाद दौड़ में भारत के लिए उम्मीद जगाने वालीं ललिता बाबर के बारे में )
भारत की लंबी दूरी की महिला धावक ललिता शिवाजी बाबर ने रियो ओलिंपिक में शनिवार को महिलाओं की 3000 मीटर स्टीपलचेज स्पर्धा के फाइनल के लिए क्वालीफाई कर लिया था.
पीटी उषा के बाद दूसरी भारतीय
ललिता से पहले 1984 में पीटी ऊषा ने ट्रैक स्पर्धा के फाइनल में जगह बनाई थी. ऊषा ने यह कमाल लास एंजिलिस में 400 मीटर की दौड़ में किया था. अगर पूरे एथलीटिक्स की बात करें तो पुरुष चक्का फेंक के एथलीट विकास गौड़ा इससे पहले ओलिंपिक फाइनल में पहुंचने वाले आखिरी भारतीय एथलीट थे. उन्होंने बीजिंग 2008 में फाइनल में जगह बनाई थी.
1 सेकेंड से पिछड़ीं थीं
शनिवार को हीट-2 में शामिल 18 प्रतिभागियों में शीर्ष-3 ने सीधे-सीधे फाइनल के लिए क्वालिफाई कर लिया और चौथे स्थान पर रहीं तंजानिया की धावक हबीबा गरीबी से ललिता मात्र 1 सेकेंड पीछे रहीं. ललिता ने रियो में अपना बेहतरीन और राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बनाया. रियो में दौड़ में उन्होंने 09:19:76 का समय लिया था.
बीच में गिर गईं थी
ललिता ने हीट-2 में अच्छी शुरुआत की थी, लेकिन बीच में गिर जाने से उनकी रिद्म पर कुछ फर्क पड़ा. हालांकि इसके बावजूद उन्होंने आधी रेस तक बढ़त बना ली थी. फिर 2500 मीटर के बाद उनकी गति धीमी हो गई. कीनिया की बीटराइस चेपकोच, अमेरिका की एम्मा कोबर्न और ट्यूनीशिया की हबीबा घिरीबी उनसे आगे निकल गईं थी.
अब 100 से अधिक सदस्यों के दल की निगाहें सोमवार सुबह से ही महाराष्ट्र की ललिता पर टिकी थी. उन्होंने क्वालीफाइंग में लगभग सात सेकेंड के अंतर से नया राष्ट्रीय रिकार्ड बनाया था. ललिता पिछले 32 वर्षों में ओलिंपिक ट्रैक स्पर्धा के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट बनी हैं. उनसे पहले पीटी उषा ने लॉस एंजिलिस ही ऐसा कर पाई थीं. ( जानिए, ओलिंपिक में पीटी उषा के बाद दौड़ में भारत के लिए उम्मीद जगाने वालीं ललिता बाबर के बारे में )
भारत की लंबी दूरी की महिला धावक ललिता शिवाजी बाबर ने रियो ओलिंपिक में शनिवार को महिलाओं की 3000 मीटर स्टीपलचेज स्पर्धा के फाइनल के लिए क्वालीफाई कर लिया था.
पीटी उषा के बाद दूसरी भारतीय
ललिता से पहले 1984 में पीटी ऊषा ने ट्रैक स्पर्धा के फाइनल में जगह बनाई थी. ऊषा ने यह कमाल लास एंजिलिस में 400 मीटर की दौड़ में किया था. अगर पूरे एथलीटिक्स की बात करें तो पुरुष चक्का फेंक के एथलीट विकास गौड़ा इससे पहले ओलिंपिक फाइनल में पहुंचने वाले आखिरी भारतीय एथलीट थे. उन्होंने बीजिंग 2008 में फाइनल में जगह बनाई थी.
1 सेकेंड से पिछड़ीं थीं
शनिवार को हीट-2 में शामिल 18 प्रतिभागियों में शीर्ष-3 ने सीधे-सीधे फाइनल के लिए क्वालिफाई कर लिया और चौथे स्थान पर रहीं तंजानिया की धावक हबीबा गरीबी से ललिता मात्र 1 सेकेंड पीछे रहीं. ललिता ने रियो में अपना बेहतरीन और राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बनाया. रियो में दौड़ में उन्होंने 09:19:76 का समय लिया था.
बीच में गिर गईं थी
ललिता ने हीट-2 में अच्छी शुरुआत की थी, लेकिन बीच में गिर जाने से उनकी रिद्म पर कुछ फर्क पड़ा. हालांकि इसके बावजूद उन्होंने आधी रेस तक बढ़त बना ली थी. फिर 2500 मीटर के बाद उनकी गति धीमी हो गई. कीनिया की बीटराइस चेपकोच, अमेरिका की एम्मा कोबर्न और ट्यूनीशिया की हबीबा घिरीबी उनसे आगे निकल गईं थी.
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