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This Article is From Aug 17, 2016

बैडमिंटन कोचिंग के लिए रोज लगभग 120 किलोमीटर सफर करती थी पीवी सिंधु

बैडमिंटन कोचिंग के लिए रोज लगभग 120 किलोमीटर सफर करती थी पीवी सिंधु
पीवी सिंधु (फाइल फोटो)
  • बेटी के प्रदर्शन से पीवी रमन्ना काफी खुश हैं
  • पीवी सिंधु ने 7-8 साल की उम्र से बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया
  • बेटी को ट्रेनिंग करवाने के लिए रोज 120 किलोमीटर का सफर करते थे
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नई दिल्ली: साक्षी मलिक के बाद अब पीवी सिंधु ने भारत के लिए एक पदक पक्का कर दिया है. सिंधु सेमीफाइनल में जापान की नोजोमी ओकुहारा को सीधे सेटों में 21-19 और 21-10 से हराकर फाइनल में पहुंची हैं. अब सिंधु का मुकाबला दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी स्पेन के कैरोलिना मरीन से होगा. अगर सिंधु मरीन को हरा देती हैं तो इतिहास रचते हुए बैडमिंटन में पहला गोल्‍ड पदक जीतेंगी, अगर हार भी जाती है तो कम से कम उन्हें रजत पदक मिलेगा.

7-8 साल की उम्र में बैडमिंटन खेलना शुरू किया
सिंधु ने 7-8 साल की उम्र में बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था और बैडमिंटन ही उनकी ज़िंदगी में सब कुछ था. सिंधु के माता-पिता पेशेवर वॉलीबॉल खिलाड़ी थे, लेकिन उन्होंने अपनी बेटी को कभी वॉलीबॉल खेलने के लिए मजबूर नहीं किया. बैडमिंटन के प्रति सिंधु की रुचि देखते हुए उनके पिता उसे ट्रेनिंग के लिए घर से 30 किलोमीटर दूर गाचीबौली ले जाते थे. ट्रेनिंग रोज़ सुबह और शाम को होती थी और रोज लगभग 120 किलोमीटर सफर करना पड़ता था.

सिंधु एक अच्छी छात्रा भी हैं और फर्स्ट क्लास में बी-कॉम पास हैं
चार पांच साल तक ऐसा करना पड़ा फिर आखिरकार उनके पिता खुद गाचीबौली शिफ्ट हो गए. सिंधु खेल के साथ-साथ पढ़ने में अच्‍छी छात्रा भी थीं जो फर्स्ट क्लास में बी-कॉम पास हैं. सिंधु बैडमिंटन से इतना प्यार करती थी कि खेल के वजह से अपने बहन की शादी में शामिल नहीं हो पाई थीं.

सिंधु के सफलता के पीछे गोपीचंद का हाथ है
सिंधु सेमीफाइनल में पहुंचने के बाद एनडीटीवी ने जब सिंधु के सफलता के पीछे की राज के बारे में उनके पिता से पीवी रमन्ना पूछा था तब उनका कहना था सिंधु को कामयाब खिलाड़ी बनाने में उनके कोच गोपीचंद का हाथ है. रमन्ना का कहना था कि गोपीचंद की वजह से आज सिंधु यहां तक पहुंची है. सिंधु के पिता गोपीचंद की तारीफ करते हुए यह भी बताया था कि अगर गोपीचंद नहीं होते तो सिंधु इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाती. रमन्ना का कहना था  कि गोपीचंद हमेशा सिंधु को ज्यादा से ज्यादा खेल के लिए सलाह देते थे. सिंधु थक जाती थी, लेकिन फिर भी गोपीचंद और एक-दो राउंड खेलने के लिए कहते थे.

पिता और बेटी दोनों को मिल चुका है अर्जुन अवार्ड
आपको बता दें कि शानदार खेल की वजह से सिंधु को 18 साल की उम्र में अर्जुन अवार्ड मिला जबकि उनके पिता पीवी रमन्ना को 39 साल की उम्र में अर्जुन अवार्ड मिला था. यह बहुत कम बार देखा गया है कि जब एक ही परिवार के दो सदस्यों को अलग-अलग खेल के लिए अर्जुन अवार्ड मिला हो. बैडमिंटन खेलने से पहले सिंधु डॉक्टर बनना चाहती थी, लेकिन जब उसने देखा कि डॉक्टर बनने के लिए बहुत ज्यादा पढ़ाई करनी पड़ती है तब बैडमिंटन रैकेट ही पकड़ लिया. सिंधु ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि वह सबसे ज्यादा तेलुगु मूवी देखना पसंद करती हैं.

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