संघर्षपूर्ण फाइनल मुकाबले में हार के साथ सिंधु को सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा (फाइल फोटो)
- फाइनल में सिंधु हारी नहीं बल्कि कैरोलिना मारिन जीतीं
- साइना की हार से हताश देश के लिए जीता सिल्वर मेडल
- अपने से ऊंची वरीयता वाली कई खिलाड़ियों को हराया
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नई दिल्ली:
देशवासियों की उम्मीद पूरी नहीं हो सकीं.... बेहद संघर्षपूर्ण फाइनल मुकाबले में स्पेन की कैरोलिना मारिन की जीत के मायने यह है कि हमारी सिंधु को सिल्वर मेडल से ही संतोष करना पड़ा. सिंधु पूरे मैच के दौरान बेहद बहादुरी से 'लड़ीं लेकिन मैच में मारिन उनसे बेहतर साबित हुईं. एक तरह से इस परिणाम को सिंधु की हार के बजाय मारिन की जीत कहना ज्यादा दुरुस्त होगा. फाइनल हारने के बावजूद सिंधु ने अपना और देशवासियों को गौरव बढ़ाया. आखिरकार ओलिंपिक जैसे खेलों के महाकुंभ में सिल्वर जीतना भी कोई आसान काम नहीं है.
बैडमिंटन में साइना नेहवाल की हार के बाद जब भारतीयों की पदक की उम्मीदें धुंधुली पड़ने लगी थीं. हर खेल से आशा के बजाय निराशा की ही खबरें आ रही थी, तब दो महिला खिलाड़ियों सिंधु और साक्षी मलिक ने भारतीय हौसले को बुलंद रखा. बैडमिंटन की बात करें तो साइना नेहवाल की हार से हताश हो चुके देश को सिंधु ने अपने शानदार खेल से इस अंदाज में भरोसा दिया कि 'मैं हूं ना.' फाइनल तक के अपने सफर में उन्होंने अपने से ऊंची वरीयता की कई खिलाड़ियों को हराया. मेडल्स के लिए तरसते इस मुल्क को सम्मान दिलाने के लिए सिंधु और साक्षी वाकई प्रशंसा की हकदार हैं. बेहतर होगा कि सिंधु के फाइनल हारने का दुख मनाने के बजाय उनके सिल्वर जीतने की खुशी मनाई जाए.
सिंधु का फाइनल तक पहुंचना इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि उन्हें ओलिंपिक में नौवीं रैंकिंग मिली थी. सिंधु ने अपने पहले मैच में शानदार जीत दर्ज की थी और हंगरी की लौरा सारोसी को सीधे गेम में 21-8, 21-9 से हराया था. अपना दूसरा ग्रुप मैच जीतने के लिए उन्हें एक घंटा 11 मिनट तक कठिन संघर्ष करना पड़ा था. सिंधु ने कनाडा की मिशेल ली को 19-21, 21-15, 21-17 से हराया.
प्री-क्वार्टरफाइनल में वर्ल्ड नंबर आठ चीनी ताइपेइ की यिंग जू ताइ को सीधे गेम में हराया. यह मैच उन्होंने सीधे सेटों 21-13, 21-15 में जीता. इसके बाद से सिंधु का प्रदर्शन निखरता ही गया. क्वार्टर फाइनल में वर्ल्ड नंबर दो वांग यिहान को 22-20, 21-19 से हराया था. जबकि सेमीफाइनल में उन्होंने वर्ल्ड नंबर 6 जापान की नोजोमी ओकुहारा को सीधे सेटों में हराया था. हर भारतीय खेलप्रेमी उम्मीद कर रहा था कि जीत का यह सफर फाइनल में भी बरकरार रहेगा लेकिन मारिन के दमदार खेल के कारण ऐसा नहीं हो सका.
दूसरी ओर, लंदन ओलिंपिक की ब्रॉन्ज मेडलिस्ट साइना नेहवाल रियो में अपेक्षा अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सकीं. इसका कारण उनका चोटिल होना रहा. घुटने की चोट से परेशान साइना ने अपने पहले मैच में मेजबान ब्राजील की लोहानी विन्सेंट को 21-17, 21-17 से हराया था, लेकिन दूसरे मैच में 61वीं वर्ल्ड रैंकिंग वाली यूक्रेन की मारिया यूलितिना से उन्हें 18-21, 19-21 से हारना पड़ा.
बैडमिंटन में साइना नेहवाल की हार के बाद जब भारतीयों की पदक की उम्मीदें धुंधुली पड़ने लगी थीं. हर खेल से आशा के बजाय निराशा की ही खबरें आ रही थी, तब दो महिला खिलाड़ियों सिंधु और साक्षी मलिक ने भारतीय हौसले को बुलंद रखा. बैडमिंटन की बात करें तो साइना नेहवाल की हार से हताश हो चुके देश को सिंधु ने अपने शानदार खेल से इस अंदाज में भरोसा दिया कि 'मैं हूं ना.' फाइनल तक के अपने सफर में उन्होंने अपने से ऊंची वरीयता की कई खिलाड़ियों को हराया. मेडल्स के लिए तरसते इस मुल्क को सम्मान दिलाने के लिए सिंधु और साक्षी वाकई प्रशंसा की हकदार हैं. बेहतर होगा कि सिंधु के फाइनल हारने का दुख मनाने के बजाय उनके सिल्वर जीतने की खुशी मनाई जाए.
सिंधु का फाइनल तक पहुंचना इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि उन्हें ओलिंपिक में नौवीं रैंकिंग मिली थी. सिंधु ने अपने पहले मैच में शानदार जीत दर्ज की थी और हंगरी की लौरा सारोसी को सीधे गेम में 21-8, 21-9 से हराया था. अपना दूसरा ग्रुप मैच जीतने के लिए उन्हें एक घंटा 11 मिनट तक कठिन संघर्ष करना पड़ा था. सिंधु ने कनाडा की मिशेल ली को 19-21, 21-15, 21-17 से हराया.
प्री-क्वार्टरफाइनल में वर्ल्ड नंबर आठ चीनी ताइपेइ की यिंग जू ताइ को सीधे गेम में हराया. यह मैच उन्होंने सीधे सेटों 21-13, 21-15 में जीता. इसके बाद से सिंधु का प्रदर्शन निखरता ही गया. क्वार्टर फाइनल में वर्ल्ड नंबर दो वांग यिहान को 22-20, 21-19 से हराया था. जबकि सेमीफाइनल में उन्होंने वर्ल्ड नंबर 6 जापान की नोजोमी ओकुहारा को सीधे सेटों में हराया था. हर भारतीय खेलप्रेमी उम्मीद कर रहा था कि जीत का यह सफर फाइनल में भी बरकरार रहेगा लेकिन मारिन के दमदार खेल के कारण ऐसा नहीं हो सका.
दूसरी ओर, लंदन ओलिंपिक की ब्रॉन्ज मेडलिस्ट साइना नेहवाल रियो में अपेक्षा अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सकीं. इसका कारण उनका चोटिल होना रहा. घुटने की चोट से परेशान साइना ने अपने पहले मैच में मेजबान ब्राजील की लोहानी विन्सेंट को 21-17, 21-17 से हराया था, लेकिन दूसरे मैच में 61वीं वर्ल्ड रैंकिंग वाली यूक्रेन की मारिया यूलितिना से उन्हें 18-21, 19-21 से हारना पड़ा.
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