फाइल फोटो।
भारतीय बैडमिंटन संघ (बीएआई) की अनुशासन समिति ने बैंगलुरू में इंडियन बैडमिंटन लीग (आईबीएल) मैच के दौरान अग्रणी युगल महिला खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा के खराब व्यवहार को लेकर उनपर आजीवन प्रतिबंध लगाए जाने की सिफारिश की है।
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नई दिल्ली:
भारतीय बैडमिंटन संघ (बीएआई) की अनुशासन समिति ने बैंगलुरू में इंडियन बैडमिंटन लीग (आईबीएल) मैच के दौरान अग्रणी युगल महिला खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा के खराब व्यवहार को लेकर उनपर आजीवन प्रतिबंध लगाए जाने की सिफारिश की है।
बीएआई अनुशासन समिति के अध्यक्ष एस. मुरलीधरन ने कहा, "हमने 25 अगस्त को आईबीएल मैच के दौरान ज्वाला के खराब व्यवहार को लेकर उनके खिलाफ आजीवन प्रतिबंध की सिफारिश की है। ज्वाला ने हमें भेजे गए जवाब में किए की माफी मांगी है लेकिन अगर वह बिना किसी शर्त के बीएआई अध्यक्ष से माफी मांग लें तो फिर उन्हें माफ किया जा सकता है। अब इस मामले में अंतिम फैसला का हक अध्यक्ष को है।"
गुट्टा क्रिश स्मैशर्स दिल्ली की आयकन खिलाड़ी रही हैं और 25 अगस्त को उनकी टीम ने बांगा बीट्स के खिलाफ खेलने से इनकार कर दिया था। गुट्टा ने इसका नेतृत्व किया था। कारण था कि बीट्स के एक खिलाड़ी के स्थानापन्न का फैसला अंतिम समय में किया गया था। आईबीएल की गवर्निग काउंसिल ने इसे हरी झंडी दे दी थी लेकिन इसके बावजूद स्मैशर्स ने विरोध जताया था।
इसके बाद गुट्टा को कारण बताओ नोटिस दिया गया था और उन्हें अपने इस व्यवहार को लेकर सितम्बर के पहले सप्ताह में जवाब देने को कहा गया था।
बीएआई की कार्यकारिणी ने इस मामले की जांच के लिए उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत न्यायाधीश को नियुक्त किया था। स्मैशर्स के इस व्यवहार के कारण मैच आधा घंटा देरी से शुरू हुआ था।
बीएआई अनुशासन समिति के अध्यक्ष एस. मुरलीधरन ने कहा, "हमने 25 अगस्त को आईबीएल मैच के दौरान ज्वाला के खराब व्यवहार को लेकर उनके खिलाफ आजीवन प्रतिबंध की सिफारिश की है। ज्वाला ने हमें भेजे गए जवाब में किए की माफी मांगी है लेकिन अगर वह बिना किसी शर्त के बीएआई अध्यक्ष से माफी मांग लें तो फिर उन्हें माफ किया जा सकता है। अब इस मामले में अंतिम फैसला का हक अध्यक्ष को है।"
गुट्टा क्रिश स्मैशर्स दिल्ली की आयकन खिलाड़ी रही हैं और 25 अगस्त को उनकी टीम ने बांगा बीट्स के खिलाफ खेलने से इनकार कर दिया था। गुट्टा ने इसका नेतृत्व किया था। कारण था कि बीट्स के एक खिलाड़ी के स्थानापन्न का फैसला अंतिम समय में किया गया था। आईबीएल की गवर्निग काउंसिल ने इसे हरी झंडी दे दी थी लेकिन इसके बावजूद स्मैशर्स ने विरोध जताया था।
इसके बाद गुट्टा को कारण बताओ नोटिस दिया गया था और उन्हें अपने इस व्यवहार को लेकर सितम्बर के पहले सप्ताह में जवाब देने को कहा गया था।
बीएआई की कार्यकारिणी ने इस मामले की जांच के लिए उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत न्यायाधीश को नियुक्त किया था। स्मैशर्स के इस व्यवहार के कारण मैच आधा घंटा देरी से शुरू हुआ था।
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