विज्ञापन
This Article is From Aug 03, 2017

क्या आप जानते हैं पुरुष फुटबॉल टीम की इस महिला कोच को? उनके बारे में जानेंगे तो हैरान रह जाएंगे..

रहीला का बचपन बलूचिस्तान में अपनी दो बहनों के साथ फुटबॉल खेलते हुए बीता. चूंकि क्वेटा में कोई फुटबॉल का मैदान नहीं था तो वह गर्ल्स कॉलेज के हॉकी मैदान पर खेलतीं.

क्या आप जानते हैं पुरुष फुटबॉल टीम की इस महिला कोच को? उनके बारे में जानेंगे तो हैरान रह जाएंगे..
पाकिस्तान की रहीला ज़रमीन हैं महिलाओं की प्रेरणा...
  • रहीला ज़रमीन राष्ट्रीय महिला फुटबॉल टीम की मैनेजर हैं
  • वह पुरुष फुटबॉल टीम कराची इलेक्ट्रिक की कोच हैं
  • वह साउथ एशिया की पहली महिला हैं जो किसी पुरुष टीम की कोच हैं
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
नई दिल्ली: अगर किसी पुरुष फुटबॉल टीम की कोच महिला हो तो ये अपने आप में एक रोचक खबर है. लेकिन इससे भी बड़ी बात यह है कि ऐसा पाकिस्‍तान में हो रहा है. जी हां, पाकिस्‍तान की राष्‍ट्रीय महिला फुटबॉल टीम की मैनेजर रहीला ज़रमीन को एक पेशेवर पुरुष फुटबॉल टीम का कोच नियुक्‍त किया गया है. कराची इलेक्‍ट्र‍िक नाम की पुरुष टीम ने रहीला को अपना कोच बनाया है. यही नहीं, रहीला लीज़र लीग की ब्रैंड ऐम्बेसडर भी हैं. वह दक्षिण एशिया की पहली महिला हैं जो पुरुषों की किसी प्रफेशनल टीम की कोच हैं.

रहीला का बचपन बलूचिस्तान में अपनी दो बहनों के साथ फुटबॉल खेलते हुए बीता. चूंकि क्वेटा में कोई फुटबॉल का मैदान नहीं था तो वह गर्ल्स कॉलेज के हॉकी मैदान पर खेलतीं. शाह मीर बलूच ने Dawn के लिए रहीला ज़रमीन का इंटरव्यू किया. इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उन्हें फुटबॉल की प्रेरणा कई खिलाड़ियों से मिलीं लेकिन एक नाम जो सदा उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा रहा, वह था डेविड बेकहम का. 

यह भी पढ़ें- मियामी में फुटबॉल स्टेडियम के लिए डेविड बेकहम ने हासिल की तीन एकड़ जमीन

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि वह फुटबॉल खेलते वक्त डेविड बेकहम की कॉपी करने की कोशिश करतीं. इसलिए नहीं क्योंकि वह उनके टैटू और हेटरस्टाइल्स से प्रभावित थीं बल्कि इसलिए क्योंकि वह एक शानदार खिलाड़ी थे. अपने परिवार को वह इस खेल को चुनने और इसकी संघर्षों से पार पाने का श्रेय देती हैं. 

यह भी पढ़ें- फुटबॉल खिलाड़ी डेविड बेकहम को 'सबसे आकर्षक व्यक्ति' का खिताब

रहीला कहती हैं, 'प्रांतीय सरकार की ओर से उन्हें कोई सहायता नहीं मिली. साल 2012 में वह बलूचिस्तान के लिए मेडल जीतकर लाईं. 2013 और 2014 में उन्हें सिल्वर और गोल्ड मेडल मिले लेकिन सरकार ने उनके प्रयासों को गंभीरता से नहीं लिया.

इंटरव्‍यू में उन्होंने बताया कि उनकी बहन शैला बलूच FIFA द्वारा सबसे युवा प्लेयर के तौर पर चुनी गईं. और वह खुद पहली पाकिस्तानी फुटबॉलर बनीं जिन्होंने फॉरेन लीग में हैट-ट्रिक हासिल की हो. लेकिन पाकिस्तान की न तो प्रांतीय न ही संघीय सरकार की ओर से कोई सराहना मिली. रहीला ने कहा, 'कुछ लोग मेरी मां की भी आलोचना करते हैं क्योंकि वह बलूचिस्तान की महिला फुटबॉल टीम की प्रेसिडेंट थीं और यह दावा करते हैं कि हम उनकी वजह से आगे बढ़ पाए जबकि सच तो यह है कि हमने संघर्ष किया.' 

रहीला ने कहा कि 'बाधाएं उस रास्ते का हिस्सा होती हैं जिस पर चलकर सफलता मिलती है. मुझे लगता है ये मुझे आगे भी मिलती रहेंगी. लेकिन मेरा लक्ष्य स्‍पष्‍ट है.'

VIDEO- कश्मीर में पत्थरबाजी छोड़ लड़कियों ने अपनाई फुटबॉल


उन्होंने बताया, 'मैं अभी लीज़र लीग की ब्रैंड ऐम्बेसडर हूं और हमने महिलाओं को फुटबॉल खेलने को प्रेरित करने के लिए बलूचिस्तान में मैदान बनाने शुरू कर दिए हैं. ग्वादर में मैदान तैयार है. मैं वहां प्रमोशन के लिए जाऊंगी और दूसरे शहरों में भी जाऊंगी.'

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com