डस्टिन ब्राउन (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
डस्टिन ब्राउन ने विम्बलडन में रफायल नडाल को दूसरे दौर के मैच में 7-5, 3-6, 6-4, 6-4 से मात दी और जर्मनी का ये खिलाड़ी रातों-रात विश्व टेनिस सर्किट में सितारा बन गया।
डस्टिन ब्राउन का जन्म 8 दिसंबर 1984 को जर्मनी हैनॉवर शहर के पास शेल नाम की जगह में हुआ। पिता जमैका के मुल निवासी हैं, जबकि माता जर्मन हैं। टेनिस के अलावा डस्टिन को फुटबॉल जूडो और हैंडबॉल जैसे खेलों का शौक रहा है, मगर 8 साल की उम्र से उन्होंने टेनिस में ज़्यादा दिलचस्पी दिखानी शुरू कर दी।
जर्मनी में नस्लभेद की समस्या काफी गंभीर है और स्कूल के दिनों में डस्टिन ब्राउन को भी इसका शिकार होना पड़ा। ये सिलसिला टेनिस कोर्ट पर भी जारी रहा और एक वक्त ऐसा था कि नस्लभेद से परेशान होकर डस्टिन टेनिस छोड़ना चाहते थे, लेकिन तभी हैनोवर शहर में टेनिस अकादमी चलाने वाले अमेरिकी माइकल विटेंबर्ग की नज़र उन पर पड़ी और डस्टिन ने टेनिस की शुरुआत दुबारा शुरू की।
मगर ब्राउन जब 11 साल के थे उनके माता-पिता जमैका चले गए। जमैका में टेनिस खेल इतना मशहूर नहीं है न ही वहां इस खेल से जुड़ी सुविधाएं हैं। मगर इस पूरे दौर ने ब्राउन को मानसिक रूप से मजबूत बनाया।
2004 में उनका परिवार फिर से जर्मनी आ गया और तब उनकी मां ने उन्हें एक ऐसी वैन भेंट की, जिससे ब्राउन पूरे यूरोप में सफर कर सकते थे और टेनिस भी खेल सकते थे।
मगर पैसे की किल्लत फिर भी रही। ब्राउन कभी-कभी अपनी वैन को किराए पर दे देते थे और रात खुले आसमान के नीचे गुज़ारते थे। इतना ही नहीं वह अपने साथी खिलाड़ियों के छोटे काम भी करते थे, जिससे उन्हें थोड़ी बहुत कमाई भी हो जाती थी।
वैसे विम्बलडन में रफायल नडाल को हराने के बाद दुनिया की नज़रों में वह आज स्टार बने हैं, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि वह साल 2014 में भी वह ग्रास-कोर्ट पर गैरी-वैबर टूर्नामेंट में भी मात दे चुके हैं।
डस्टिन ब्राउन का जन्म 8 दिसंबर 1984 को जर्मनी हैनॉवर शहर के पास शेल नाम की जगह में हुआ। पिता जमैका के मुल निवासी हैं, जबकि माता जर्मन हैं। टेनिस के अलावा डस्टिन को फुटबॉल जूडो और हैंडबॉल जैसे खेलों का शौक रहा है, मगर 8 साल की उम्र से उन्होंने टेनिस में ज़्यादा दिलचस्पी दिखानी शुरू कर दी।
जर्मनी में नस्लभेद की समस्या काफी गंभीर है और स्कूल के दिनों में डस्टिन ब्राउन को भी इसका शिकार होना पड़ा। ये सिलसिला टेनिस कोर्ट पर भी जारी रहा और एक वक्त ऐसा था कि नस्लभेद से परेशान होकर डस्टिन टेनिस छोड़ना चाहते थे, लेकिन तभी हैनोवर शहर में टेनिस अकादमी चलाने वाले अमेरिकी माइकल विटेंबर्ग की नज़र उन पर पड़ी और डस्टिन ने टेनिस की शुरुआत दुबारा शुरू की।
मगर ब्राउन जब 11 साल के थे उनके माता-पिता जमैका चले गए। जमैका में टेनिस खेल इतना मशहूर नहीं है न ही वहां इस खेल से जुड़ी सुविधाएं हैं। मगर इस पूरे दौर ने ब्राउन को मानसिक रूप से मजबूत बनाया।
2004 में उनका परिवार फिर से जर्मनी आ गया और तब उनकी मां ने उन्हें एक ऐसी वैन भेंट की, जिससे ब्राउन पूरे यूरोप में सफर कर सकते थे और टेनिस भी खेल सकते थे।
मगर पैसे की किल्लत फिर भी रही। ब्राउन कभी-कभी अपनी वैन को किराए पर दे देते थे और रात खुले आसमान के नीचे गुज़ारते थे। इतना ही नहीं वह अपने साथी खिलाड़ियों के छोटे काम भी करते थे, जिससे उन्हें थोड़ी बहुत कमाई भी हो जाती थी।
वैसे विम्बलडन में रफायल नडाल को हराने के बाद दुनिया की नज़रों में वह आज स्टार बने हैं, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि वह साल 2014 में भी वह ग्रास-कोर्ट पर गैरी-वैबर टूर्नामेंट में भी मात दे चुके हैं।
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