रियो ओलिंपिक की तैराकी प्रतियोगिता में सिमोन और पैनी दोनों ने स्वर्ण जीता
- अमेरिकी तैराक सिमोन मैनुएल, ओलिंपिक पदक जीतने वाली पहली अश्वेत महिला
- 60 के दशक में अमेरिका में अश्वेतों का सार्वजनिक पूल में जाना मना था
- एक पूल में अश्वेतों को बाहर निकालने के लिए एसिड डाल दिया गया
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सिमोन मैनुएल - अगर आप रियो ओलिंपिक देख रहे हैं तो मुमकिन है कि इस नाम से आप अपरिचित नहीं होगें. अगर नहीं जानते तो हम बता देते हैं कि यह अमेरिकी महिला तैराक हैं जिन्होंने इस बार ओलिपिंक में 100 मीटर फ्री स्टाइल में स्वर्ण पदक जीता है. ओलिंपिक की तैराकी प्रतियोगिता में यह ख्याति हासिल करने वाली सिमोन पहली अश्वेत महिला हैं. जीत के बाद सिमोन ने कहा था कि 'यह मेडल सिर्फ मेरे लिए नहीं, यह उन अफ्रीकी-अमेरिकियों के लिए है जो मुझसे पहले यहां थे और जो मेरी प्रेरणा रहे हैं.' सिमोन ने यह पदक कनाडा की पेनी ओलैकसियक के साथ जीता है. दोनों ने ही यह रेस 52.70 में पूरी की जिसके बाद दोनों ने ही स्वर्ण पदक हासिल किया.
पूल का पानी निकाला
आमतौर पर ओलिंपिक के अलग अलग खेलों की पदक तालिका में किसी अमेरिकी का ऊपर रहना बहुत ताज्जुब की बात नहीं लगती लेकिन सिमोन का मामला अलग है. इसके लिए अमेरिकी इतिहास के पन्नों को पलटने की जरूरत है जब वहां के स्विमिंग पूल में अश्वेतों को उंगली तक डालने की मनाही थी. ज्यादा दूर की बात नहीं है, 60 के दशक में ही फिल्म अभिनेता डोरोथी डैनड्रिज जो कि एक अश्वेत थे, उन्होंने लास वेगस के एक पूल में अपना अंगूठा क्या डुबो दिया था, पूल से पूरे पानी को ही निकाल दिया गया.
सिमोन ने यह पदक कनाडा की पेनी ओलैकसियक के साथ जीता
अमेरिका की नामी पत्रकार इसाबेल विल्करसन ने इस मामले में एक फेसबुक पोस्ट लिखी है जिसमें उन्होंने डोरोथी के साथ हुई इस घटना के साथ साथ उन अहम घटनाओं का ज़िक्र किया जब अमेरिका के स्वीमिंग पूल में अश्वेतों के तैरने से बवाल खड़ा हो जाता था. इसाबेल लिखती हैं 'ओलिंपिक तैराकी में मेडल जीतने वाली पहली अफ्रीकी अमेरिकी महिला बनने वाली सिमोन मैनुएल के आंसूओं में इतिहास छुपा है. 60 के दशक तक अमेरिका के सार्वजनिक स्वीमिंग पूल में अश्वेतों के तैरने पर प्रतिबंध था.'
अश्वेतों को पूल से निकालने के लिए असंवेदनशील कदम उठा लिए जाते थे
पूल में एसिड डाला
डोरोथी के साथ हुई घटना का ज़िक्र करने के बाद विल्करसन लिखती हैं कि 'एक और पूल को भी इसलिए खाली कर दिया गया था क्योंकि उसमें मशहूर गायक और डांसर सैमी डेविस जूनियर तैर लिए थे. 1964 में एक आदमी फ्लोरिडा के पूल में तैर रहे अश्वेतों को बाहर निकालने के लिए कूद पड़ा और एक मैनेजर ने तो नागिरक अधिकारों के लिए चल रहे विरोध के दौरान पूल के पानी में एसिड डाल दिया था. 1954 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में वर्णभेद को खत्म करने के समर्थन में फैसला सुनाया था, वहीं दूसरी तरफ एक फेडरेल जज ने बाल्टीमोर के स्वीमिंग पूलों को अलग अलग रखने की बात कही थी क्योंकि 'पूल, स्कूलों से ज्यादा संवेदनशील होते हैं.'
'अश्वेत अच्छे तैराक नहीं होते..'
अमेरिकी पत्रकार लिखती हैं 'पीढ़ियों तक अफ्रीकी-अमेरिकियों को स्वीमिंग पूल में जाने की मनाही रही और इसके बाद यह मिथक भी फैला कि अश्वेतों में तैरने की काबिलियत नहीं है. उस वक्त अपने बयानों से चर्चा में रहने वाले अमेरिकी प्रबंधक अल कम्पानिस ने एक इंटरव्यू में यह तक कहा था कि अफ्रीकी-अमेरिकी, पेशेवर खेलों में प्रशासनिक ओहदों के लायक नहीं है. जब उनसे इस बयान की सफाई देने को कहा गया तो उन्होंने कहा 'अश्वेतों पुरुष और महिलाएं क्यों अच्छे तैराक नहीं होते? क्योंकि उनमें वह उछाल ही नहीं होता. तीस साल बाद सिमोन मैनुएल ने तैराकी में स्वर्ण जीतकर इतिहास को ललकारा है.'
पूल का पानी निकाला
आमतौर पर ओलिंपिक के अलग अलग खेलों की पदक तालिका में किसी अमेरिकी का ऊपर रहना बहुत ताज्जुब की बात नहीं लगती लेकिन सिमोन का मामला अलग है. इसके लिए अमेरिकी इतिहास के पन्नों को पलटने की जरूरत है जब वहां के स्विमिंग पूल में अश्वेतों को उंगली तक डालने की मनाही थी. ज्यादा दूर की बात नहीं है, 60 के दशक में ही फिल्म अभिनेता डोरोथी डैनड्रिज जो कि एक अश्वेत थे, उन्होंने लास वेगस के एक पूल में अपना अंगूठा क्या डुबो दिया था, पूल से पूरे पानी को ही निकाल दिया गया.

अमेरिका की नामी पत्रकार इसाबेल विल्करसन ने इस मामले में एक फेसबुक पोस्ट लिखी है जिसमें उन्होंने डोरोथी के साथ हुई इस घटना के साथ साथ उन अहम घटनाओं का ज़िक्र किया जब अमेरिका के स्वीमिंग पूल में अश्वेतों के तैरने से बवाल खड़ा हो जाता था. इसाबेल लिखती हैं 'ओलिंपिक तैराकी में मेडल जीतने वाली पहली अफ्रीकी अमेरिकी महिला बनने वाली सिमोन मैनुएल के आंसूओं में इतिहास छुपा है. 60 के दशक तक अमेरिका के सार्वजनिक स्वीमिंग पूल में अश्वेतों के तैरने पर प्रतिबंध था.'

पूल में एसिड डाला
डोरोथी के साथ हुई घटना का ज़िक्र करने के बाद विल्करसन लिखती हैं कि 'एक और पूल को भी इसलिए खाली कर दिया गया था क्योंकि उसमें मशहूर गायक और डांसर सैमी डेविस जूनियर तैर लिए थे. 1964 में एक आदमी फ्लोरिडा के पूल में तैर रहे अश्वेतों को बाहर निकालने के लिए कूद पड़ा और एक मैनेजर ने तो नागिरक अधिकारों के लिए चल रहे विरोध के दौरान पूल के पानी में एसिड डाल दिया था. 1954 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में वर्णभेद को खत्म करने के समर्थन में फैसला सुनाया था, वहीं दूसरी तरफ एक फेडरेल जज ने बाल्टीमोर के स्वीमिंग पूलों को अलग अलग रखने की बात कही थी क्योंकि 'पूल, स्कूलों से ज्यादा संवेदनशील होते हैं.'
'अश्वेत अच्छे तैराक नहीं होते..'
अमेरिकी पत्रकार लिखती हैं 'पीढ़ियों तक अफ्रीकी-अमेरिकियों को स्वीमिंग पूल में जाने की मनाही रही और इसके बाद यह मिथक भी फैला कि अश्वेतों में तैरने की काबिलियत नहीं है. उस वक्त अपने बयानों से चर्चा में रहने वाले अमेरिकी प्रबंधक अल कम्पानिस ने एक इंटरव्यू में यह तक कहा था कि अफ्रीकी-अमेरिकी, पेशेवर खेलों में प्रशासनिक ओहदों के लायक नहीं है. जब उनसे इस बयान की सफाई देने को कहा गया तो उन्होंने कहा 'अश्वेतों पुरुष और महिलाएं क्यों अच्छे तैराक नहीं होते? क्योंकि उनमें वह उछाल ही नहीं होता. तीस साल बाद सिमोन मैनुएल ने तैराकी में स्वर्ण जीतकर इतिहास को ललकारा है.'
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