अभिनव बिंद्रा (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
भारतीय खिलाड़ियों को रियो ओलिंपिक में पदक भले ही महज़ 2 मिले हों लेकिन बहुत से ऐसे प्रदर्शन इस ओलिंपिक में रहे जो या तो पदक के करीब आए और या फिर उन्होंने अपने प्रदर्शन से प्रभावित किया. तीन ऐसे पदक रहे जो भारत बहुत कम अंतर से चूक गया.
पदक के करीब पहुंचे खिलाड़ी
-शूटिंग
अभिनव बिंद्रा - 10 मीटर एयर राइफ़ल में कांस्य से 0.1 अंक से चूके. ऐन मुक़ाबले से पहले अभिनव की राइफ़ल का गिर जाना और उसकी साइट टूट जाना भी एक वजह बताया गया लेकिन अभिनव ने इस पर कुछ भी नहीं कहा. वो इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं निजी स्पर्धा में भारत के एकमात्र गोल्ड मेडलिस्ट के तौर पर ये अभिनव का आखिरी ओलिंपिक साबित हुआ.
-जिमनास्टिक्स
दीपा कर्माकर - वॉल्ट फ़ाइनल में कांस्य से 0.150 अंक से चूकीं. सबसे पहले क्वालिफ़ाई कर के इतिहास रचा. फिर फ़ाइनल में पहुंचकर इतिहास रचा और आखिर में महज़ 0.15 अंकों से कांस्य से चूकने ने उन्हें इतिहास के पन्नों में मिल्खा सिंह और पीटी ऊषा के साथ खड़ा कर दिया.
-टेनिस
सानिया-बोपन्ना की जोड़ी चौथे स्थान पर रही. एक वक्त लग रहा था कि ये जोड़ी अपना रजत पदक पक्का कर लेगी जब सेमी फ़ाइनल में पहला सेट 6.2 से जीत लिया था लेकिन उसके बाद रजत तो दूर कांस्य पदक भी इनके हाथ नहीं लगा.
इन खिलाड़ियों के अलावा भी भारत के लिए कुछ खेल और खिलाड़ी ऐसे रहे जिन्होंने उम्मीदें जगाई हैं, जिन्होंने इतिहास रचा है.
इन खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने उम्मीद जगाई
-एथलेटिक्स
ललिता बाबर- 3000 मीटर स्टीपलचेज़ में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया. 32 साल बाद फ़ाइनल में पहुंचीं. ये उनका निजी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी रहा. वो 10वें स्थान पर रहीं. इनसे पहले ट्रैक के फ़ाइनल में 1984 लॉस एंजिलिस में पीटी ऊषा ने फ़ाइनल में पहुंचकर चौथा स्थान हासिल किया था.
-शूटिंग
जीतू राय - 10 मीटर एयर पिस्टल के फ़ाइनल में पहुंचे और 8वें स्थान पर रहे. जीतू अपना पहला ही ओलिंपिक खेल रहे थे और भारत के लिए पदक के सबसे बड़े दावेदार थे लेकिन वो भारत को पदक नहीं दिला सके. इसके बावजूद वो भारत के सबसे टैलेंटड शूटर में शुमार हैं.
-रोइंग
दत्तू भोकानल - सिंगल स्कल्स में कुल 13वें स्थान पर रहे. हीट्स में तीसरे स्थान पर रहकर क्वार्टर फ़ाइनल में चूक गए लेकिन विश्व में 13वें स्थान पर रहे.
-हॉकी
36 साल बाद क्वार्टर फ़ाइनल में पहुंची टीम और अपने खेल से प्रभावित किया. बढ़त लेने के बाद अंतिम पलों में मैच गंवा दिया. पहली बार पिछले कई वर्षों में ऐसा लगा कि हॉकी टीम में दम है और पदक आ सकता है.
-बैडमिंटन
श्रीकांत ने क्वार्टर फ़ाइनल में लिन डैन को टक्कर दी. अपने पहले ही ओलिंपिक में क्वार्टर फ़ाइनल तक का सफ़र तय किया और लिन डैन को आखिर तक परेशान किया.
-तीरंदाज़ी
अतानु दास प्रीक्वार्टर फाइनल में पहुचने वाले पहले तीरंदाज़ बने और बहुत ही कम अंतर से 10 पॉइंटर से चूके जो अगले दौर में जाने का उन्हें मौका दे सकता था.
मतलब यह हुआ कि 2 खिलाड़ी पदक तक पहुंचे लेकिन पदक के करीब और पदक की राह पर बहुत से भारतीय खिलाड़ी नज़र आए. अब ज़रूरत है तो इन खिलाड़ियों की प्रतिभा को समझते हुए इन पर ध्यान देने की और आगे के लिए इन्हें पदक के और करीब या फिर पदक तक पहुंचाने की.
पदक के करीब पहुंचे खिलाड़ी
-शूटिंग
अभिनव बिंद्रा - 10 मीटर एयर राइफ़ल में कांस्य से 0.1 अंक से चूके. ऐन मुक़ाबले से पहले अभिनव की राइफ़ल का गिर जाना और उसकी साइट टूट जाना भी एक वजह बताया गया लेकिन अभिनव ने इस पर कुछ भी नहीं कहा. वो इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं निजी स्पर्धा में भारत के एकमात्र गोल्ड मेडलिस्ट के तौर पर ये अभिनव का आखिरी ओलिंपिक साबित हुआ.
-जिमनास्टिक्स
दीपा कर्माकर - वॉल्ट फ़ाइनल में कांस्य से 0.150 अंक से चूकीं. सबसे पहले क्वालिफ़ाई कर के इतिहास रचा. फिर फ़ाइनल में पहुंचकर इतिहास रचा और आखिर में महज़ 0.15 अंकों से कांस्य से चूकने ने उन्हें इतिहास के पन्नों में मिल्खा सिंह और पीटी ऊषा के साथ खड़ा कर दिया.
-टेनिस
सानिया-बोपन्ना की जोड़ी चौथे स्थान पर रही. एक वक्त लग रहा था कि ये जोड़ी अपना रजत पदक पक्का कर लेगी जब सेमी फ़ाइनल में पहला सेट 6.2 से जीत लिया था लेकिन उसके बाद रजत तो दूर कांस्य पदक भी इनके हाथ नहीं लगा.
इन खिलाड़ियों के अलावा भी भारत के लिए कुछ खेल और खिलाड़ी ऐसे रहे जिन्होंने उम्मीदें जगाई हैं, जिन्होंने इतिहास रचा है.
इन खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने उम्मीद जगाई
-एथलेटिक्स
ललिता बाबर- 3000 मीटर स्टीपलचेज़ में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया. 32 साल बाद फ़ाइनल में पहुंचीं. ये उनका निजी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी रहा. वो 10वें स्थान पर रहीं. इनसे पहले ट्रैक के फ़ाइनल में 1984 लॉस एंजिलिस में पीटी ऊषा ने फ़ाइनल में पहुंचकर चौथा स्थान हासिल किया था.
-शूटिंग
जीतू राय - 10 मीटर एयर पिस्टल के फ़ाइनल में पहुंचे और 8वें स्थान पर रहे. जीतू अपना पहला ही ओलिंपिक खेल रहे थे और भारत के लिए पदक के सबसे बड़े दावेदार थे लेकिन वो भारत को पदक नहीं दिला सके. इसके बावजूद वो भारत के सबसे टैलेंटड शूटर में शुमार हैं.
-रोइंग
दत्तू भोकानल - सिंगल स्कल्स में कुल 13वें स्थान पर रहे. हीट्स में तीसरे स्थान पर रहकर क्वार्टर फ़ाइनल में चूक गए लेकिन विश्व में 13वें स्थान पर रहे.
-हॉकी
36 साल बाद क्वार्टर फ़ाइनल में पहुंची टीम और अपने खेल से प्रभावित किया. बढ़त लेने के बाद अंतिम पलों में मैच गंवा दिया. पहली बार पिछले कई वर्षों में ऐसा लगा कि हॉकी टीम में दम है और पदक आ सकता है.
-बैडमिंटन
श्रीकांत ने क्वार्टर फ़ाइनल में लिन डैन को टक्कर दी. अपने पहले ही ओलिंपिक में क्वार्टर फ़ाइनल तक का सफ़र तय किया और लिन डैन को आखिर तक परेशान किया.
-तीरंदाज़ी
अतानु दास प्रीक्वार्टर फाइनल में पहुचने वाले पहले तीरंदाज़ बने और बहुत ही कम अंतर से 10 पॉइंटर से चूके जो अगले दौर में जाने का उन्हें मौका दे सकता था.
मतलब यह हुआ कि 2 खिलाड़ी पदक तक पहुंचे लेकिन पदक के करीब और पदक की राह पर बहुत से भारतीय खिलाड़ी नज़र आए. अब ज़रूरत है तो इन खिलाड़ियों की प्रतिभा को समझते हुए इन पर ध्यान देने की और आगे के लिए इन्हें पदक के और करीब या फिर पदक तक पहुंचाने की.
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