जीत के पल: तिरंगा लहराकर अपनी जीत का इजहार करतीं साक्ष्ाी मलिक
रियो डि जेनेरियो:
साक्षी भले ही पदक हासिल करने में कामयाब हो गईं लेकिन मैच की शुरुआत में ऐसा लग रहा था कि वह यह पदक हासिल नहीं कर सकेंगी. मैच के अंतिम क्षणों में पासा पलटते हुए साक्षी ने बाजी अपने नाम की. वह मैच के पहले पीरियड में 0-5 से पिछड़ गई थीं. किर्गिस्तान की प्रतिद्वंद्वी एसुलू तिनिवेकोवा उन पर भारी पड़ रही थी. दूसरे पीरियड का पहला मिनट भी खाली निकल गया और साक्षी के पास कुछ कर गुजरने के लिए महज दो मिनट बचे थे.
लेकिन साक्षी ने हार नहीं मानी और जुझारू रुख दिखाते हुए दूसरे मिनट में पहले मूव में अपने विरोधी को मैट पर पटखनी दी और चंद सेकंड बाद ऐसा ही दूसरा मूव करके मैच में वापसी की. उनको इन दोनों मूव के जरिये 4 प्वांइट मिले और बस अब वह अपने विरोधी से एक प्वांइट पीछे थीं. बस फिर क्या था, किर्गिस्तान के खिलाड़ी की मैच पर पकड़ ढीली होते ही वह थोड़ा नर्वस दिखी और इसी बीच मौके को भुनाते हुए साक्षी ने एक और प्वाइंट हासिल किया.
तीसरे और अंतिम मिनट का खेल खत्म होने में जब चंद सेकंड ही बचे थे तो साक्षी ने अपने विरोधी का पैर पकड़कर गिरा दिया और इस तरह दो और प्वाइंट हासिल कर मैच पर अपराजेय बढ़त हासिल की और उनके पक्ष में स्कोर 7-5 हो गया. उसके बाद जैसे ही मैच खत्म होने की घंटी बजी, साक्षी ने हवा में छलांग लगाकर अपनी जीत का इजहार किया.
चिंता के क्षण...
लेकिन मुकाबला अभी खत्म नहीं हुआ था क्योंकि किर्गिस्तान की खिलाड़ी के कोचिंग स्टाफ ने साक्षी के अंतिम मूव पर सवालिया निशान लगाते हुए उस प्वाइंट की समीक्षा की मांग की. जजों ने रीप्ले देखने के बाद फैसला भारत के हक में दिया और विरोधी पक्ष की विफल मांग के चलते एक अतिरिक्त प्वाइंट साक्षी को मिला. इससे अंतिम तौर पर साक्षी ने मुकाबला 8-5 से जीतकर इतिहास रच दिया.
इस जीत के साथ ओलिंपिक में पदक हासिल करने वाली वह पहली महिला पहलवान बनीं. जीत के उस गौरवशाली पल में साक्षी के दोनों कोचों ने उनको गले लगा लिया. इसके साथ ही रियो ओलिंपिक में 11 दिन के लंबे इंतजार के बाद मेडल के लिहाज से भारत का भी खाता खुला.
लेकिन साक्षी ने हार नहीं मानी और जुझारू रुख दिखाते हुए दूसरे मिनट में पहले मूव में अपने विरोधी को मैट पर पटखनी दी और चंद सेकंड बाद ऐसा ही दूसरा मूव करके मैच में वापसी की. उनको इन दोनों मूव के जरिये 4 प्वांइट मिले और बस अब वह अपने विरोधी से एक प्वांइट पीछे थीं. बस फिर क्या था, किर्गिस्तान के खिलाड़ी की मैच पर पकड़ ढीली होते ही वह थोड़ा नर्वस दिखी और इसी बीच मौके को भुनाते हुए साक्षी ने एक और प्वाइंट हासिल किया.
तीसरे और अंतिम मिनट का खेल खत्म होने में जब चंद सेकंड ही बचे थे तो साक्षी ने अपने विरोधी का पैर पकड़कर गिरा दिया और इस तरह दो और प्वाइंट हासिल कर मैच पर अपराजेय बढ़त हासिल की और उनके पक्ष में स्कोर 7-5 हो गया. उसके बाद जैसे ही मैच खत्म होने की घंटी बजी, साक्षी ने हवा में छलांग लगाकर अपनी जीत का इजहार किया.
चिंता के क्षण...
लेकिन मुकाबला अभी खत्म नहीं हुआ था क्योंकि किर्गिस्तान की खिलाड़ी के कोचिंग स्टाफ ने साक्षी के अंतिम मूव पर सवालिया निशान लगाते हुए उस प्वाइंट की समीक्षा की मांग की. जजों ने रीप्ले देखने के बाद फैसला भारत के हक में दिया और विरोधी पक्ष की विफल मांग के चलते एक अतिरिक्त प्वाइंट साक्षी को मिला. इससे अंतिम तौर पर साक्षी ने मुकाबला 8-5 से जीतकर इतिहास रच दिया.
इस जीत के साथ ओलिंपिक में पदक हासिल करने वाली वह पहली महिला पहलवान बनीं. जीत के उस गौरवशाली पल में साक्षी के दोनों कोचों ने उनको गले लगा लिया. इसके साथ ही रियो ओलिंपिक में 11 दिन के लंबे इंतजार के बाद मेडल के लिहाज से भारत का भी खाता खुला.
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