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This Article is From Aug 15, 2016

रियो ओलिंपिक : ...और जब रोते हुए सानिया ने कहा, 'नहीं जानती 2020 में खेलूंगी या नहीं'

रियो ओलिंपिक : ...और जब रोते हुए सानिया ने कहा, 'नहीं जानती 2020 में खेलूंगी या नहीं'
रोहन बोपन्ना और सानिया मिर्जा की फाइल तस्वीर
  • सानिया-बोपन्ना की जोड़ी कांस्य पदक मुकाबले में हार गई
  • हम अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर सके : सानिया
  • 'हार से उबरकर वापसी की कोशिश करनी होगी'
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रियो डि जिनेरियो: रियो के ओलिंपिक पार्क के कोर्ट नंबर 1 पर सानिया मिर्जा और रोहन बोपन्‍ना की जोड़ी चूकी. इसके साथ ही करीब सवा सौ करोड़ भारतीयों के हाथों से मेडल फिसल गया. हार के फौरन बाद जब सानिया प्रेस से मुखातिब हुईं तो पहले दो सवालों में ही उनकी आंखें नम हो गईं. इस बार सानिया अपनी भावनाओं में बहती रहीं और आंसू पोंछकर बात करती रहीं और कहती रहीं कि इसे स्‍वीकार करना आसान नहीं है लेकिन स्‍वीकार करना ही होगा. ये बहुत मुश्किल है.

सानिया के लिए ये तय करना इस वक्‍त मुश्किल था कि उनके टेनिस करियर का अंजाम क्‍या होने जा रहा है. उन्‍होंने कहा, ''ओलिंपिक खेल चार साल बाद आते हैं. मुझे नहीं पता कि मैं 2020 में आऊंगी भी या नहीं.''  

लेकिन उनका मानना है कि एक खिलाड़ी के रूप में इससे जल्‍दी उबरने की जरूरत है लेकिन इसमें थोड़ा वक्‍त भी लगेगा. वो कहती हैं, ''टेनिस खिलाड़ी होने के नाते हमें सिनसिनाटी में खेलने का मौका मिलने जा रहा है. वहां जीत हासिल कर मैं इस हार के दर्द से उबरना चाहूंगी.''  

सानिया और रोहन दोनों का ही कहना है कि उन्‍होंने अपना बेहतरीन प्रदर्शन करने की कोशिश की. ये दीगर बात है कि उनकी यह कोशिश उनको पोडियम तक नहीं पहुंचा सकी.

सानिया ने कहा, ''हमने वो किया, जो हम बेहतरीन तरीके से करते रहे हैं और टेनिस में आपको मौकों को प्‍वाइंट्स में बदलना होता है वर्ना आपको हार का सामना करना पड़ता है. यही खेल है. यही जीवन है.'' पूरे प्रेस कांफ्रेंस के दौरान वो अपने आंसुओं को पोंछती हुई बात करती रहीं और जब वहां से रुखसत हुईं तो रोहन बोपन्‍ना उनको संभालते हुए ड्रेसिंग रूम की तरफ ले गए.  

इससे पहले सानिया और बोपन्ना की चौथी वरीय भारतीय जोड़ी कांस्य पदक के मुकाबले में लुसी हरादेका और रादेक स्टेपानेक की चेक गणराज्य की जोड़ी से 1-6, 5-7 से हार गई. सानिया 29 वर्ष की हो चुकी हैं और अपने करियर में तीन बार करियर को खत्म करने वाली गंभीर चोटों से उबरी है, वह बखूबी जानती हैं कि यह उनका अंतिम ओलिंपिक था और उनके पास ओलिंपिक पदक जीतने का यह सर्वश्रेष्ठ मौका था.

इस हार ने लिएंडर पेस और महेश भूपति की 2004 एथेंस में पुरुष वर्ग के मैराथन युगल कांस्य पदक मैच की याद ताजा कर दी. सानिया ने कहा कि उन्हें इस दुख से उबरकर डब्ल्यूटीए टूर पर सिनसिनाटी टूर्नामेंट के लिए तैयार होना होगा.

सानिया ने कहा, 'हम दोनों अपना सर्वश्रेष्ठ नहीं कर सके. हमारे पास मौके थे. दूसरा सेट ठीक था, लेकिन हम इसे अंक में तब्दील नहीं कर सके. उन्होंने कहा, 'इस समय मैं कुछ और नहीं कह सकती, यही जिंदगी है, आपको आगे बढ़ना होता है.'

बोपन्ना ने कहा, 'शुरू में सर्विस गंवाना हमें भारी पड़ा, मैं अपने सर्विस गेम में अच्छा नहीं कर सका. 24 घंटे के अंदर हमने दो करीबी मैच गंवा दिए, जिसमें हम आसानी से एक पदक जीत सकते थे. आप अपना सर्वश्रेष्ठ करते हैं, लेकिन फिर भी यह कम रह जाता है.'
(एजेंसी भाषा से भी इनपुट)

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