नई दिल्ली:
भारत ने चीन में हुए वर्ल्ड स्कूल गेम्स में 9 स्वर्ण के साथ कुल 17 पदक जीते। भारतीय टीम लड़कों में सातवें और लड़कियों में आठवें नंबर पर रही। ये खबरें मीडिया में किसी कोने में दब गईं, लेकिन जानकार इनमें से कई खिलाड़ियों को आनेवाले वक्त में स्टार बनने का दम देखते हैं।
दिल्ली के नामचीन सरदार पटेल स्कूल के छात्र तेजस्विन शंकर का नाम उनकी प्रिंसिपल अनुराधा जोशी बड़े गर्व से लेती हैं। तेजस्विन चीन में 2/11 मीटर ऊंची कूद के साथ स्वर्ण पदक जीत कर लौटे हैं। वापस लौटते ही वो सबसे पहले अपनी प्रधानाचार्य के पांव छूने स्कूल आते हैं और फिर पूर्व ओलिंपियन जीएस रंधावा के घर जाकर उनके पांव छूते हैं।
टोक्यो ओलिंपिक्स में पांचवें नंबर पर रहने वाले जीएस रंधावा कहते हैं कि इन बच्चों की वजह से उनमें फिर से ऊर्जा आ गई है। 76 साल के रंधावा को फिर से भारतीय एथलेटिक्स से उम्मीद जगने लगी है।
हाई जंप के नए चैंपियन सरदार पटेल स्कूल के तेजस्विन शंकर और दिल्ली के एक सरकारी स्कूल के शानदार एथलीट बेअंत सिंह का नाम पिछले दिनों मीडिया में कहीं-कहीं जरूर आया, लेकिन इनके कारनामों पर टेलिविजन चैनल्स और अखबारों की नजरे इनायत कम ही हुईं।
लेकिन, एथलेटिक्स ग्राउंड और अपने स्कूलों में ये किसी हीरो से कम नहीं। बगैर किसी सरकारी इनामों के ऐलान के बावजूद इनके हौसले बुलंद हैं। तेजस्विन कहते हैं कि एशियन चैंपियनशिप के दौरान कतर के वर्ल्ड चैंपियन खिलाड़ी मुताज एस्सा बरशिम ने उनकी तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने अबतक किसी भारतीय को एथलेटिक्स में इतना अच्छा प्रदर्शन करते नहीं देखा। तेजस्विन कहते हैं कि ये उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
800 मीटर के चैंपियन बड़े दावे तो नहीं करते, लेकिन यहां से लेकर 2020 ओलिंपिक तक का उन्होंने रोड मैप तैयार कर रखा है। वो कहते हैं पूरी मेहनत करूंगा ताकि वो हासिल कर सकूं जो भारतीय एथलीटों का सपना होता है।
दोनों खिलाड़ियों के एथलीट बनने की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। तेजस्विन ने क्रिकेट से एथलेटिक्स ग्राउंड का सफर तय किया है तो बेअंत ने कुश्ती से एथलेटिक्स ट्रैक का। तेजस्विन के कोच सुनील कुमार कहते हैं कि दो साल पहले उन्होंने तेज गेंदबाजी करते इस खिलाड़ी की बाउंस करते देख उन्हें हाई जंप करने की सलाह दी। तेजस्विन ने वो सलाह मान ली और उनकी दुनिया ही बदल गई।
तेजस्विन ने वुहान में 2/11 मीटर ऊंची कूद के साथ स्वर्ण पदक जीता जबकि बेअंत सिंह ने 1 मिनट 52/50 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक पर कब्ज़ा जमाया। पूर्व ओलिंपियन जीएस रंधावा इनमें दुनिया में सबसे आगे जाने का माद्दा देखते हैं।
भारत के हर्डल्स किंग ओलिंपियन गुरुबचन सिंह रंधावा कहते हैं कि उन्हें अंदाजा तो था कि तेजस्विन और बेअंत अच्छा प्रदर्शन करेंगे, लेकिन इनके गोल्ड मेडल हासिल करना उनकी उम्मीदों से आगे की बात है। रंधावा ये भी कहते हैं कि अगर इन खिलाड़ियों को सही ट्रेनिंग, उम्दा कोच और अच्छे टूर्नामेंट में हिस्सा लेने का मौका मिलता रहा तो ये दुनिया के सबसे ऊंचे स्तर पर भी कमाल करने का माद्दा रखते हैं।
एथेलटिक्स में ओलिंपिक्स का पदक अब तक भारतीय खिलाड़ियों की पहुंच से बाहर ही रहा है, लेकिन इन युवा खिलाड़ियों ने वर्ल्ड स्कूल लेवल पर एक उम्मीद जगाई है। खेल प्रेमी इन्हें दुनिया के सबसे बड़े स्टेज पर भी ऐतिहासिक कारनामा करते देखना जरूर चाहेंगे।
दिल्ली के नामचीन सरदार पटेल स्कूल के छात्र तेजस्विन शंकर का नाम उनकी प्रिंसिपल अनुराधा जोशी बड़े गर्व से लेती हैं। तेजस्विन चीन में 2/11 मीटर ऊंची कूद के साथ स्वर्ण पदक जीत कर लौटे हैं। वापस लौटते ही वो सबसे पहले अपनी प्रधानाचार्य के पांव छूने स्कूल आते हैं और फिर पूर्व ओलिंपियन जीएस रंधावा के घर जाकर उनके पांव छूते हैं।
टोक्यो ओलिंपिक्स में पांचवें नंबर पर रहने वाले जीएस रंधावा कहते हैं कि इन बच्चों की वजह से उनमें फिर से ऊर्जा आ गई है। 76 साल के रंधावा को फिर से भारतीय एथलेटिक्स से उम्मीद जगने लगी है।
हाई जंप के नए चैंपियन सरदार पटेल स्कूल के तेजस्विन शंकर और दिल्ली के एक सरकारी स्कूल के शानदार एथलीट बेअंत सिंह का नाम पिछले दिनों मीडिया में कहीं-कहीं जरूर आया, लेकिन इनके कारनामों पर टेलिविजन चैनल्स और अखबारों की नजरे इनायत कम ही हुईं।
लेकिन, एथलेटिक्स ग्राउंड और अपने स्कूलों में ये किसी हीरो से कम नहीं। बगैर किसी सरकारी इनामों के ऐलान के बावजूद इनके हौसले बुलंद हैं। तेजस्विन कहते हैं कि एशियन चैंपियनशिप के दौरान कतर के वर्ल्ड चैंपियन खिलाड़ी मुताज एस्सा बरशिम ने उनकी तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने अबतक किसी भारतीय को एथलेटिक्स में इतना अच्छा प्रदर्शन करते नहीं देखा। तेजस्विन कहते हैं कि ये उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
800 मीटर के चैंपियन बड़े दावे तो नहीं करते, लेकिन यहां से लेकर 2020 ओलिंपिक तक का उन्होंने रोड मैप तैयार कर रखा है। वो कहते हैं पूरी मेहनत करूंगा ताकि वो हासिल कर सकूं जो भारतीय एथलीटों का सपना होता है।
दोनों खिलाड़ियों के एथलीट बनने की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। तेजस्विन ने क्रिकेट से एथलेटिक्स ग्राउंड का सफर तय किया है तो बेअंत ने कुश्ती से एथलेटिक्स ट्रैक का। तेजस्विन के कोच सुनील कुमार कहते हैं कि दो साल पहले उन्होंने तेज गेंदबाजी करते इस खिलाड़ी की बाउंस करते देख उन्हें हाई जंप करने की सलाह दी। तेजस्विन ने वो सलाह मान ली और उनकी दुनिया ही बदल गई।
तेजस्विन ने वुहान में 2/11 मीटर ऊंची कूद के साथ स्वर्ण पदक जीता जबकि बेअंत सिंह ने 1 मिनट 52/50 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक पर कब्ज़ा जमाया। पूर्व ओलिंपियन जीएस रंधावा इनमें दुनिया में सबसे आगे जाने का माद्दा देखते हैं।
भारत के हर्डल्स किंग ओलिंपियन गुरुबचन सिंह रंधावा कहते हैं कि उन्हें अंदाजा तो था कि तेजस्विन और बेअंत अच्छा प्रदर्शन करेंगे, लेकिन इनके गोल्ड मेडल हासिल करना उनकी उम्मीदों से आगे की बात है। रंधावा ये भी कहते हैं कि अगर इन खिलाड़ियों को सही ट्रेनिंग, उम्दा कोच और अच्छे टूर्नामेंट में हिस्सा लेने का मौका मिलता रहा तो ये दुनिया के सबसे ऊंचे स्तर पर भी कमाल करने का माद्दा रखते हैं।
एथेलटिक्स में ओलिंपिक्स का पदक अब तक भारतीय खिलाड़ियों की पहुंच से बाहर ही रहा है, लेकिन इन युवा खिलाड़ियों ने वर्ल्ड स्कूल लेवल पर एक उम्मीद जगाई है। खेल प्रेमी इन्हें दुनिया के सबसे बड़े स्टेज पर भी ऐतिहासिक कारनामा करते देखना जरूर चाहेंगे।
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