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This Article is From Feb 02, 2014

महज 24 घंटे में ले लिया गया था सचिन को भारत रत्न देने का फैसला

महज 24 घंटे में ले लिया गया था सचिन को भारत रत्न देने का फैसला
भोपाल:

क्रिकेट का भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर को 'भारत रत्न' देने का निर्णय लेने में केंद्र सरकार की दिलचस्पी को इस बात से समझा जा सकता है कि सचिन को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने का निर्णय लेने के लिए केंद्र सरकार को सारी औपचारिकता पूरी करने में महज 24 घंटों लगे थे। यह खुलासा सूचना के अधिकार के तहत सामने आए दस्तावेजों से हुआ है।

मध्य प्रदेश के बैतूल निवासी हेमंत दुबे को आरटीआई के तहत मिली जानकारी बताती है कि केंद्र सरकार ने तेंदुलकर का न केवल मात्र चार घंटे में 24 साल के सफर का बायोडाटा तैयार कर लिया, बल्कि 24 घंटे के अंदर भारत रत्न देने का फैसला भी कर लिया गया था।

दुबे को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से आरटीआई के तहत दी गई जानकारी के अनुसार, 14 नवंबर से शुरू वेस्टइंडीज के खिलाफ सचिन के विदाई टेस्ट के पहले ही दिन पीएमओ ने अपराह्न 1.35 बजे खेल मंत्रालय से तत्काल तेंदुलकर का बायोडाटा मांगा। खेल मंत्रालय ने शाम 5.23 बजे तक पीएमओ को ईमेल के जरिए सचिन के करियर का बायोडाटा भेज भी दिया।

दुबे ने बताया कि बायोडाटा सचिन से नहीं मांगा गया, बल्कि खेल मंत्रालय ने पीएमओ से भेजे गए फॉर्मेट के अनुसार खुद चार घंटे में सचिन का बायोडाटा तैयार किया। अगले ही दिन जरूरी कार्यवाही पूरी कर प्रधानमंत्री ने इसे मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेज दिया। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी प्रधानमंत्री के प्रस्ताव को मंजूरी देने में देर नहीं लगाई, और 16 नवंबर को टेस्ट मैच खत्म होते ही सचिन को भारत रत्न देने की घोषणा कर दी गई।

कैंसर से जूझ रहे बैतूल निवासी हेमंत दुबे ने बताया कि गत 17 जुलाई 2013 को खेल मंत्रालय द्वारा मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न दिए जाने की विधिवत सिफारिश प्रधानमंत्री को भेजी गई थी, परंतु उस सिफारिश को दरकिनार कर दिया गया।

खास बात यह है कि भारत रत्न के लिए खेल मंत्रालय ने हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की सिफारिश की थी, लेकिन पीएमओ ने सचिन के नाम को आगे बढ़ाने के लिए ध्यानचंद के नाम पर कोई विचार नहीं किया।

दुबे ने दस्तावेजों के आधार पर कहा कि बीते वर्ष महाराष्ट्र सरकार ने विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर सचिन को भारत रत्न देने की सिफारिश पीएमओ से की थी, लेकिन तब उस पर विचार नहीं किया गया था। सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक के. कस्तूरीरंगन ने भारत रत्न के लिए वैज्ञानिक सीएनआर राव के नाम की भी सिफारिश कर रखी थी। कस्तूरीरंगन ने 28 सितंबर को उनके नाम की सिफारिश पीएमओ को भेजी थी।

दुबे का कहना है कि आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी भी अधूरी दी गई है। पीएमओ ने संविधान के अनुच्छेद 74(2) के तहत राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच इस संबंध में हुई बातचीत और पत्राचार का ब्यौरा देने से इनकार कर दिया।

दुबे ने बताया कि वह पीएमओ के इस फैसले के खिलाफ जनहित याचिका दायर करेंगे।

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