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This Article is From Aug 17, 2016

रियो ओलिंपिक: लिन डेन से हार गए श्रीकांत, लेकिन उनके संघर्ष के कायल हुए फैंस...

रियो ओलिंपिक: लिन डेन से हार गए श्रीकांत, लेकिन उनके संघर्ष के कायल हुए फैंस...
श्रीकांत की हार के साथ ही बैडमिंटन के पुरुष वर्ग में भारत की चुनौती खत्‍म हो गई है (फाइल फोटो)
  • सचिन तेंदुलकर भी हैं श्रीकांत के खेल के प्रशंसक
  • शुरुआत में डबल्‍स मुकाबले खेलते थे श्रीकांत
  • गोपी सर के कहने पर सिंगल्‍स की ओर किया रुख
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बैडमिंटन के पुरुष वर्ग में भारत के के.श्रीकांत भले ही चीन की 'दीवार' लिन डेन से पार नहीं पा सके, लेकिन मैच में संघर्ष क्षमता का परिचय देते हुए वे खेलप्रेमियों के दिल जीतने में सफल रहे. पहला गेम आसानी से हारने के बाद जब लग रहा था कि चीनी शटलर मैच को आसानी से कब्‍जे में कर लेगा तभी श्रीकांत ने अपने खेल का स्‍तर ऊपर उठाया और दूसरा गेम जीत लिया. तीसरे गेम में भी दोनों खिलाड़ि‍यों के बीच संघर्ष हुआ. एक समय श्रीकांत मामूली बढ़त भी लिए हुए थे लेकिन अपनी पूरी क्षमता को दांव पर लगाते हुए लिन डेन ने मैच अपने नाम कर लिया.

श्रीकांत भले ही पदक की होड़ से बाहर हो गए हों, लेकिन सर्वकालीन श्रेष्‍ठ खिलाड़ि‍यों में से एक डेन को संघर्ष के लिए मजबूर कर उन्‍होंने बैडमिंटन में भारत की बढ़ती ताकत का अहसास करा दिया है.  

श्रीकांत बचपन से ही जुझारू खिलाड़ी रहे हैं. उनकी इस क्षमता के कायल मास्‍टर ब्‍लास्‍टर सचिन तेंदुलकर भी हैं. ज्‍यादा लोगों को जानकारी नहीं होगी कि क्रिकेट के अलावा सचिन टेबलटेनिस और बैडमिंटन भी बखूबी खेलते हैं. सचिन तेंदुलकर के साथ हुई अपनी मुलाकात का जिक्र करते हुए श्रीकांत ने मीडिया को बताया था कि ' सचिन सर का मैं बचपन से फैन रहा हूं। सचिन मेरे अंकल के घर आए थे जो उनके दोस्त हैं. टीम इंडिया के इस महान बल्‍लेबाज से मेरी मुलाकात वहीं हुई थी. मुझे थोड़ी देर तक सचिन से बात करने का मौका मिला था, इस दौरान उन्‍होंने मेरा हौसला बढ़ाते हुए कहा था कि मैं एक दिन नंबर 1 जरूर बनूंगा.'

23 वर्षीय श्रीकांत मूल रूप से आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले से हैं. उनके पिता केवीएस कृष्णा किसान हैं. श्रीकांत ने बैडमिंटन की शुरुआत डबल्‍स मुकाबले खेलकर की थी. बैडमिंटन में भारत के सर्वश्रेष्‍ठ खिलाड़ि‍यों में से एक गोपीचंद के कहने पर उन्‍होंने सिंगल्‍स मुकाबले खेलने शुरू किए और देखते हुए देखते भारत के शीर्ष शटलरों में शुमार हो गए. श्रीकांत की प्रतिभा को निखारने में गोपीचंद का अहम योगदान रहा है. गोपी की अकादमी में ही वे अभ्‍यास करते हैं. वैसे श्रीकांत ही क्‍या, गोपीचंद भारत के इस दौर के ज्‍यादातर खिलाड़ि‍यों के मार्गदर्शक और आदर्श हैं.

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