नई दिल्ली:
ओलिंपिक पदक विजेता विजेन्दर सिंह के प्रोफ़ेशनल बनने को लेकर कई लोगों ने सवाल उठाए। विजेन्दर के लिए प्रोफ़ेशनल बॉक्सर बनने का फ़ैसला कितना आसान या मुश्किल रहा, इस फ़ैसले के क्या मायने होंगे इन सब सवालों के जवाब के लिए हमारे संवाददाता विमल मोहन ने विजेन्दर से ख़ास बात की।
सवाल: आपने जो कुछ हासिल किया, उसे हासिल करना किसी भी खिलाड़ी का ख़्वाब होता है। आपने खेलों से सब कुछ हासिल कर लिया है। लेकिन आपके सपने बड़े हो गए हैं?
विजेन्दर: सपने देखना हो तो छोटे क्यों देखूं? बड़े सपने आपको बड़ी मंज़िल तक पहुंचा सकते हैं।
सवाल: ओलिंपिक में गोल्ड मेडल हासिल करने का सपना रह गया?
विजेन्दर: मैंने ओलिंपिक में एक मेडल का सपना देखा था, जो पूरा हो गया। 2012 के लंदन ओलिंपिक्स में गोल्ड जीतना चाहता था, लेकिन नसीब में नहीं था तो नहीं जीत सका। वहां मैंने दुनिया के टॉप बॉक्सर (अमेरिका के टेरेल गौशा) को हराया, लेकिन उस मुक्केबाज़ से हार गया (उज़्बेकिस्तान के अब्बोस अतोएव) जिसे मैंने दो साल पहले हराया था। शायद ऐसा ही होना था। लेकिन मैं अब आगे की सोच रहा हूं।
सवाल: क्या वजह है कि आप प्रोफ़ेशनल बॉक्सिंग में जा रहे हैं- पैसा, नाम या कुछ और?
विजेन्दर: सारी वजहें हैं। ये एक नई शुरुआत है। कई लोगों ने भारत में पहले भी कोशिश की, लेकिन वो बहुत ऊंचाई तक नहीं पहुंच सके। मोहम्मद अली, माइक टायसन और मैनी पैकिआओ जैसे मुक्केबाज़ों ने प्रोफ़ेशनल बॉक्सिंग के ज़रिये खुद का और अपने देश का नाम रोशन किया। मैं भारत का नाम रोशन करना चाहता हूं। मैं कोशिश कर रहा हूं ताकि मुझे या मेरे फ़ैन्स को अफ़सोस नहीं रह जाए कि मैंने प्रोफ़ेशनल बॉक्सिंग में कोशिश नहीं की।
सवाल: लेकिन यह इतना आसान नहीं होगा..
विजेन्दर: बिल्कुल...यह आसान नहीं होगा। ज़िन्दगी में कुछ भी आसान नहीं है- ना मेरा काम ना आपका काम। लेकिन चैंपियन वही होता है, जो मुश्किलों को तोड़कर आगे निकल जाए।
सवाल: प्रोफ़ेशनल बनने की ट्रेनिंग भी आसान नहीं रही थी..?
विजेन्दर: सेलेक्शन की ट्रेनिंग भी एकदम अलग थी। क़रीब दस दिन की मुश्किल ट्रेनिंग थी। उस दौरान आपको अकेले 5 किलोमीटर दौड़ना होता है। कोई साथ नहीं होता। एक सिस्टम होता है ट्रेनिंग का और जो कठिन होता है।
सवाल: प्रोफ़ेशनल मैचों के 4-6-8-10 या 12 राउंड के मैचों के लिए आप कितने तैयार हैं?
विजेन्दर: मैं मानसिक तौर पर तैयार हूं। फ़ाइट के लिए तैयारी करूंगा। जब बॉक्सिंग को अपना खेल चुन ही लिया है, तो मार-पिटाई से क्या डरना। मैं ये नहीं कहता कि मैं माइक टायसन या मोहम्मद अली बन जाऊंगा। मैं ये भी नहीं जानता कि मैं कामयाब हो पाऊंगा या नहीं। मैं एक कोशिश कर रहा हूं, लोग सपोर्ट करेंगे तो ये सफ़र आसान हो जाएगा।
सवाल: आपने प्रोफ़ेशनल रिंग में घुसने का कब मन बनाया?
विजेन्दर: माइंड तो 2005-06 से ही बना रहा था, तब हम लोग प्रो बॉक्सर होने की बात करते थे। मौक़ा अब जाकर आया है।
सवाल: आप किस प्रोफ़ेशनल बॉक्सर के जैसा बनना चाहते हैं?
विजेन्दर: मैं आमिर ख़ान की बॉक्सिंग देखता हूं। मैं मोहम्मद अली, माइक टायसन, मैनी पैकियाओ सबकी बॉक्सिंग देखता हूं। विजेन्दर सिंह इन सबका निचोड़ भी हो सकता है।
सवाल: बीजिंग ओलिंपिक का पदक जीतने के बाद से ग्लैमर आपकी ज़िन्दगी का हिस्सा हो गया है, वो कैसे छूटेगा?
विजेन्दर: वो नहीं छूटेगा। छूटना भी नहीं चाहिए। कई खिलाड़ियों का जीवन ग्लैमर से भरा होता है, मेरा भी है।
सवाल: हरियाणा सरकार के मंत्री जैसा बयान दे रहे हैं, ऐसे में आपकी डीएसपी की नौकरी जा सकती है...?
विजेन्दर: क्रिकेट, कबड्डी, गोल्फ़, हॉकी में कई खिलाड़ी प्रोफ़ेशनल स्तर पर खेल रहे हैं और सरकारी नौकरी कर रहे हैं। उन सबके लिए एक नियम है। मुझ पर भी वही नियम लागू होना चाहिए। मैं हरियाणा पुलिस में काम करता हूं। मैं क्यों चाहूंगा कि मेरी वजह से कानून टूटे?
सवाल: रियो में बाकी मुक्केबाज़ों से क्या उम्मीद रहेगी?
विजेन्दर: रियो ओलिंपिक्स में शिव थापा, देवेन्दो, विकास, सुमित सांगवान, जांगड़ा- इन सबसे उम्मीद है। मैं इन सबसे सीखता भी हूं। दो दिनों पहले मैरीकॉम से भी बात हुई। वो भी रियो की तैयारी कर रहीं हैं। मैंने ओलिंपिक में अपना रोल अदा कर दिया और अब प्रोफ़ेशनल बनकर नाम कमाना चाहता हूं।
सवाल: रियो में रिज़ल्ट अच्छा रहेगा?
विजेन्दर: 100% अच्छा रहेगा। लेकिन उससे पहले फ़ेडरेशन के बहुत सारे मसले हल हो जाने चाहिए। वरना, भारतीय बॉक्सरों के भविष्य पर असर पड़ सकता है। रियो में रिज़ल्ट पहले से ज़रूर अच्छा रहेगा। मुझे पूरी उम्मीद है।
सवाल: आपने जो कुछ हासिल किया, उसे हासिल करना किसी भी खिलाड़ी का ख़्वाब होता है। आपने खेलों से सब कुछ हासिल कर लिया है। लेकिन आपके सपने बड़े हो गए हैं?
विजेन्दर: सपने देखना हो तो छोटे क्यों देखूं? बड़े सपने आपको बड़ी मंज़िल तक पहुंचा सकते हैं।
सवाल: ओलिंपिक में गोल्ड मेडल हासिल करने का सपना रह गया?
विजेन्दर: मैंने ओलिंपिक में एक मेडल का सपना देखा था, जो पूरा हो गया। 2012 के लंदन ओलिंपिक्स में गोल्ड जीतना चाहता था, लेकिन नसीब में नहीं था तो नहीं जीत सका। वहां मैंने दुनिया के टॉप बॉक्सर (अमेरिका के टेरेल गौशा) को हराया, लेकिन उस मुक्केबाज़ से हार गया (उज़्बेकिस्तान के अब्बोस अतोएव) जिसे मैंने दो साल पहले हराया था। शायद ऐसा ही होना था। लेकिन मैं अब आगे की सोच रहा हूं।
सवाल: क्या वजह है कि आप प्रोफ़ेशनल बॉक्सिंग में जा रहे हैं- पैसा, नाम या कुछ और?
विजेन्दर: सारी वजहें हैं। ये एक नई शुरुआत है। कई लोगों ने भारत में पहले भी कोशिश की, लेकिन वो बहुत ऊंचाई तक नहीं पहुंच सके। मोहम्मद अली, माइक टायसन और मैनी पैकिआओ जैसे मुक्केबाज़ों ने प्रोफ़ेशनल बॉक्सिंग के ज़रिये खुद का और अपने देश का नाम रोशन किया। मैं भारत का नाम रोशन करना चाहता हूं। मैं कोशिश कर रहा हूं ताकि मुझे या मेरे फ़ैन्स को अफ़सोस नहीं रह जाए कि मैंने प्रोफ़ेशनल बॉक्सिंग में कोशिश नहीं की।
सवाल: लेकिन यह इतना आसान नहीं होगा..
विजेन्दर: बिल्कुल...यह आसान नहीं होगा। ज़िन्दगी में कुछ भी आसान नहीं है- ना मेरा काम ना आपका काम। लेकिन चैंपियन वही होता है, जो मुश्किलों को तोड़कर आगे निकल जाए।
सवाल: प्रोफ़ेशनल बनने की ट्रेनिंग भी आसान नहीं रही थी..?
विजेन्दर: सेलेक्शन की ट्रेनिंग भी एकदम अलग थी। क़रीब दस दिन की मुश्किल ट्रेनिंग थी। उस दौरान आपको अकेले 5 किलोमीटर दौड़ना होता है। कोई साथ नहीं होता। एक सिस्टम होता है ट्रेनिंग का और जो कठिन होता है।
सवाल: प्रोफ़ेशनल मैचों के 4-6-8-10 या 12 राउंड के मैचों के लिए आप कितने तैयार हैं?
विजेन्दर: मैं मानसिक तौर पर तैयार हूं। फ़ाइट के लिए तैयारी करूंगा। जब बॉक्सिंग को अपना खेल चुन ही लिया है, तो मार-पिटाई से क्या डरना। मैं ये नहीं कहता कि मैं माइक टायसन या मोहम्मद अली बन जाऊंगा। मैं ये भी नहीं जानता कि मैं कामयाब हो पाऊंगा या नहीं। मैं एक कोशिश कर रहा हूं, लोग सपोर्ट करेंगे तो ये सफ़र आसान हो जाएगा।
सवाल: आपने प्रोफ़ेशनल रिंग में घुसने का कब मन बनाया?
विजेन्दर: माइंड तो 2005-06 से ही बना रहा था, तब हम लोग प्रो बॉक्सर होने की बात करते थे। मौक़ा अब जाकर आया है।
सवाल: आप किस प्रोफ़ेशनल बॉक्सर के जैसा बनना चाहते हैं?
विजेन्दर: मैं आमिर ख़ान की बॉक्सिंग देखता हूं। मैं मोहम्मद अली, माइक टायसन, मैनी पैकियाओ सबकी बॉक्सिंग देखता हूं। विजेन्दर सिंह इन सबका निचोड़ भी हो सकता है।
सवाल: बीजिंग ओलिंपिक का पदक जीतने के बाद से ग्लैमर आपकी ज़िन्दगी का हिस्सा हो गया है, वो कैसे छूटेगा?
विजेन्दर: वो नहीं छूटेगा। छूटना भी नहीं चाहिए। कई खिलाड़ियों का जीवन ग्लैमर से भरा होता है, मेरा भी है।
सवाल: हरियाणा सरकार के मंत्री जैसा बयान दे रहे हैं, ऐसे में आपकी डीएसपी की नौकरी जा सकती है...?
विजेन्दर: क्रिकेट, कबड्डी, गोल्फ़, हॉकी में कई खिलाड़ी प्रोफ़ेशनल स्तर पर खेल रहे हैं और सरकारी नौकरी कर रहे हैं। उन सबके लिए एक नियम है। मुझ पर भी वही नियम लागू होना चाहिए। मैं हरियाणा पुलिस में काम करता हूं। मैं क्यों चाहूंगा कि मेरी वजह से कानून टूटे?
सवाल: रियो में बाकी मुक्केबाज़ों से क्या उम्मीद रहेगी?
विजेन्दर: रियो ओलिंपिक्स में शिव थापा, देवेन्दो, विकास, सुमित सांगवान, जांगड़ा- इन सबसे उम्मीद है। मैं इन सबसे सीखता भी हूं। दो दिनों पहले मैरीकॉम से भी बात हुई। वो भी रियो की तैयारी कर रहीं हैं। मैंने ओलिंपिक में अपना रोल अदा कर दिया और अब प्रोफ़ेशनल बनकर नाम कमाना चाहता हूं।
सवाल: रियो में रिज़ल्ट अच्छा रहेगा?
विजेन्दर: 100% अच्छा रहेगा। लेकिन उससे पहले फ़ेडरेशन के बहुत सारे मसले हल हो जाने चाहिए। वरना, भारतीय बॉक्सरों के भविष्य पर असर पड़ सकता है। रियो में रिज़ल्ट पहले से ज़रूर अच्छा रहेगा। मुझे पूरी उम्मीद है।
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